भारत को बड़ी राहत! रूस से तेल खरीदने पर फिलहाल नहीं लगेगा 100% टैरिफ, जानें क्या होगा फायदा

नई दिल्ली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 100 फीसदी टैरिफ के इरादे को टाल दिया है। ‘लिंडसे ग्राहम कानून’ के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले भारत समेत पांच देशों पर कड़े प्रतिबंध लगने थे, जिसे ट्रंप ने 18 अक्तूबर की समयसीमा से पहले रोक दिया। ट्रंप के इस रुख से भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने और अमेरिकी बाजार में अपने निर्यात को सुरक्षित रखने की दोहरी संजीवनी मिल गई है।

ट्रंप ने शुक्रवार रात एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट के तहत निर्धारित प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों को लागू करने से छूट दे दी। यह कदम रूस के साथ अमेरिका और वैश्विक बाजारों के लिए डीजल की सप्लाई के संबंध में समझौता होने के कुछ दिन बाद उठाया गया है। वहीं, ट्रंप ने अपने आदेश में कहा कि इस समय यह छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। हालांकि, अमेरिकी सांसद रिचर्ड ब्लूमेंथल ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा, इन छूटों का मकसद व्लादिमीर पुतिन को खुश करना है।

रुबियो की भारत यात्रा से ठीक पहले फैसला
अमेरिकी कांग्रेस ने 16 सितंबर को ग्राहम अधिनियम पारित किया था। इस कानून के तहत ट्रंप को रूस से कच्चा तेल या गैस आयात करने वाले पांच सबसे बड़े देशों भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान से आने वाली वस्तुओं पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार मिला था।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की 17 से 22 अक्टूबर के बीच भारत यात्रा प्रस्तावित है। अब दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा और ऊर्जा साझेदारी पर बातचीत सकारात्मक माहौल में होगी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बीते महीने न्यूयॉर्क में रुबियो से मुलाकात में अधिनियम पर चिंता जताई थी।

भारत को क्या होगा फायदा?
सस्ते तेल की बेरोकटोक खरीद: भारत रूस से तेल खरीद जारी रख सकेगा। अगस्त में भारतीय तेल आयात में रूस का हिस्सा 44% था। यह छूट घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर रखने में अहम है।

नुकसान से बचाव: कानून लागू होता तो अमेरिका जाने वाले भारतीय सामानों पर 100% तक दंडात्मक टैरिफ लग सकता था। फैसले ने भारतीय निर्यातकों को संभावित नुकसान से बचा लिया है।

व्यापार वार्ता जारी: प्रतिबंध टलने से भारत और अमेरिका के बीच जारी द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं के पटरी से उतरने का जोखिम भी खत्म हो गया है।

ट्रंप की भी मजबूरी: अमेरिका में मध्यावधि चुनाव से पहले डीजल की बढ़ती कीमतों ने ट्रंप प्रशासन पर दबाव बना दिया था। खुद अमेरिका ने रूस से डीजल खरीद का समझौता किया है। ऐसे में वह भारत को कैसे रोक सकता था।

क्या पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा?
इसका जवाब है- तुरंत नहीं। यह फैसला मौजूदा कीमतों को घटाने वाला नहीं है। इसका मतलब है कि टैरिफ के कारण कीमतें बढ़ने का तत्काल खतरा टल गया है। भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम कई चीजों पर निर्भर करते हैं:

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत
    रुपया-डॉलर विनिमय दर
    केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स
    शिपिंग, रिफाइनिंग और वितरण लागत
    तेल कंपनियों की कीमत-नीति

इसलिए रूसी तेल की सप्लाई बनी रहने से दबाव कम हो सकता है, पर उपभोक्ता को सीधा फायदा तभी दिखेगा जब कच्चे तेल की कीमतें लगातार गिरें या सरकार टैक्स घटाए

ट्रंप की छूट से भारत को अस्थायी राहत
थिंक टैंक जीटीआरआई ने शनिवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ‘ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ (SRIA) के तहत प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों से दी गई छूट भारत को केवल अस्थायी राहत दे सकती है, लेकिन इससे कोई स्थायी निश्चितता नहीं मिलेगी।

थिंक टैंक ने कहा कि ऐसे में नई दिल्ली को अपनी ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा करनी चाहिए और वाणिज्यिक शर्तों पर तेल खरीदना जारी रखना चाहिए।

जीटीआरआई ने कहा कि इस कानून में वाशिंगटन ने टैरिफ को फिर से लागू करने के अधिकार को अभी भी सुरक्षित रखा है। उनके मुताबिक, इस छूट की कोई निश्चित समाप्ति तारीख नहीं है और इसे कभी भी वापस लिया जा सकता है। उनके मुताबिक, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रूसी ऊर्जा की खरीद पर नजर रखना जारी रखेंगे। इससे अमेरिकी प्रशासन को इस छूट की समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टैरिफ को फिर से लागू करने का मौका मिल सकता है।

पिछले महीने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान हुए एक समझौते के तहत वाशिंगटन ने 10 जनवरी तक चीन पर शुल्क न बढ़ाने का वादा किया। अगर चीन को छूट मिली रहे और भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की कोशिश की जाए, तो यह दोनों देशों के बीच संबंधों पर असर डाल सकता है।

विशेषज्ञ बोले-पाबंदियां कम होने के बाद भारत रूसी तेल का आयात जारी रखेगा

वहीं विश्लेषकों का मानना है कि भारत मौजूदा स्तर के करीब ही रूस से कच्चे तेल का आयात जारी रखेगा।

जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाले आंकड़ों से पता चलता है कि भारत इस साल औसतन 18 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) के साथ समुद्री मार्ग से रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक रहा है, जो चीन (12 लाख बीपीडी) से ज्यादा है।

ऊर्जा शोध संस्था केपलर को उम्मीद है कि अक्टूबर में आयात 18-19 लाख बीपीडी के आसपास बना रहेगा। यह मात्रा साल के मध्य के उच्चतम स्तरों से काफी कम है। भारतीय आयात जून में 26 लाख बीपीडी और जुलाई में 25.7 लाख बीपीडी के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था।

More From Author

रायपुर में आज भिड़ेंगी महिला क्रिकेट टीमें, दूसरा टी20 मैच आज

‘पुलिस ने मेरे बेटे की जान ली’, गौरव की मौत पर मां ने लगाए गंभीर आरोप

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 14099/197

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.