₹1200 करोड़ की योजना से जवाई बांध को मिलेगा पानी, राजस्थान के 900 गांवों की बुझेगी प्यास

 पाली
पाली शहर में गहराते जल संकट के बीच हेमावास बांध थोड़ी राहत देगा। करीब 17 साल बाद हेमावास बांध का पानी एक बार फिर पाली शहर के भीतरी इलाकों के लोगों की प्यास बुझाएगा। बांध में वर्तमान में 101 एमसीएफटी से अधिक पानी है। इसे नहर के बजाय बांध के पास पंप लगाकर जवाई पाइपलाइन में डाला जाएगा। यहां से पानी भैरूघाट स्थित सिटी हेडवर्क्स तक पहुंचेगा और भीतरी क्षेत्रों में आपूर्ति की जाएगी। जलापूर्ति शुरू होने पर शहरवासियों को करीब 20 से 25 दिन तक राहत मिलने की उम्मीद है। हेमावास बांध से पानी लेने के लिए जलदाय विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बांध से पानी उठाने और पाइपलाइन में पहुंचाने की व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

नहर में दीवार, पंप से सीधे पाइपलाइन में पहुंचेगा पानी
हेमावास बांध से पानी लेने के लिए बांध के आगे नहर में दीवार बनवाई जा रही है। इसका उद्देश्य चामुंडा माता मंदिर क्षेत्र में स्थित बांध की मोरी से पानी छोड़ने पर उसे आगे नहर में बहने से रोकना है। इसी दीवार के पास सांचौर से मंगवाया गया 80 हॉर्स पावर का पंप लगाया जाएगा। यह पंप एक घंटे में 10 लाख लीटर पानी उठाने की क्षमता रखता है। हालांकि, जलदाय विभाग के अनुसार, पानी की आपूर्ति के लिए पंप को उसकी पूरी क्षमता से चलाने की आवश्यकता नहीं होगी। पंप के माध्यम से पानी सीधे जवाई पाइपलाइन में डाल दिया जाएगा। इससे पानी भैरूघाट स्थित सिटी हेडवर्क्स तक पहुंच सकेगा।

पहले भी लिया जाता रहा है हेमावास का पानी
हेमावास बांध के पानी का पहले भी कई बार उपयोग किया गया है, लेकिन अब तक इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से मंडली हेडवर्क्स से जुड़े क्षेत्रों में जलापूर्ति के लिए होता रहा है। इनमें टैगोर नगर, गांधीनगर सहित अन्य क्षेत्र और सोजत आदि के लिए होने वाली जलापूर्ति शामिल रही है।

इन्होंने कहा…
पाली शहर के सिटी हेडवर्क्स से जुड़े क्षेत्रों में हेमावास के पानी की आपूर्ति जल्द शुरू की जाएगी। इसके लिए तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
-कान सिंह राणावत, अधिशासी अभियंता, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, पाली

हेमावास बांध के पानी को सिटी हैंडवर्क्स तक लाने के लिए सांचौर से मंगवाया गया पंप

दो बांधों से जवाई तक पहुंचेगा पानी, 1200 करोड़ की योजना से 900 गांवों की बुझेगी प्यास
पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े जवाई बांध को पानी से भरने के लिए प्रस्तावित दो जलाशयों का निर्माण क्षेत्र की जल समस्या के समाधान की दिशा में अहम साबित हो सकता है। करीब 1200 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले सेई और साबरमती (बुझा व चकसांडमारिया) जलाशयों से पानी को टनल, पाइपलाइन और जरूरत के अनुसार पंपिंग के जरिए जवाई बांध तक पहुंचाने की योजना है।

इस परियोजना की खास बात यह है कि इसमें पानी को केवल बांधों में संग्रहित करने तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उसे जवाई बांध तक पहुंचाने के लिए अलग-अलग तकनीकी व्यवस्थाओं का नेटवर्क तैयार करने का प्रस्ताव है। इस परियोजना से जवाई बांध में पानी की उपलब्धता बढ़ने के साथ पाली और सिरोही जिलों, शिवगंज तथा ब्यावर जिले के जैतारण क्षेत्र सहित करीब 900 गांवों की पेयजल समस्या के समाधान की उम्मीद है।

योजना के तहत सेई नदी पर बनने वाले सेई जलाशय और साबरमती नदी क्षेत्र में प्रस्तावित जलाशय से पानी को टनल, ग्रेविटी पाइपलाइन, प्रेशराइज्ड पाइपलाइन और पंपिंग जैसी तकनीकों से जवाई तक लाया जाएगा। दोनों जलाशयों से पानी आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग हिस्सों में भूमिगत सुरंगों और पाइपलाइन का नेटवर्क तैयार किया जाएगा। जहां जलस्रोत और आगे के मार्ग के बीच ऊंचाई का पर्याप्त अंतर होगा, वहां ग्रेविटी सिस्टम से पानी प्राकृतिक ढलान के कारण आगे बढ़ सकेगा।

जवाई बांध तक इस तरह लाया जाएगा पानी
जहां प्राकृतिक ढलान से पानी पहुंचाना संभव नहीं होगा, वहां प्रेशराइज्ड पाइपलाइन और पंपिंग व्यवस्था की जाएगी। अधिशासी अभियंता धर्मेश सिंघवी के अनुसार, बांधों से जवाई तक पानी लाने के लिए तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं।

परियोजना के तहत तीन टनल बनाना प्रस्तावित है। इनमें टनल-ए की लंबाई करीब 5.82 किलोमीटर, टनल-बी की लंबाई 7.4 किलोमीटर और टनल-सी की लंबाई 7.8 किलोमीटर होगी। परियोजना में करीब 15.12 किलोमीटर लंबी प्रेशराइज्ड पाइपलाइन और 5.67 किलोमीटर लंबी ग्रेविटी पाइपलाइन प्रस्तावित है। इसके अलावा, 28.6 किलोमीटर लंबी ग्रेविटी पाइपलाइन भी बनाई जाएगी।

पत्रिका व्यू: परियोजना को गति देना जरूरी
जवाई बांध पश्चिमी राजस्थान की पेयजल व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में दो जलाशयों के निर्माण और उनसे जवाई बांध तक पानी लाने की योजना क्षेत्र की वर्तमान और भविष्य की जल जरूरतों से जुड़ी है। यदि जलाशयों का निर्माण और पानी को जवाई बांध तक पहुंचाने वाला नेटवर्क समय पर विकसित होता है, तो क्षेत्र में जल उपलब्धता बढ़ाने और पेयजल संकट कम करने में मदद मिल सकती है।

 

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