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  • रजत जयंती वर्ष में छत्तीसगढ़ को मिलेगा नया गौरव – प्रधानमंत्री मोदी करेंगे भव्य विधानसभा भवन का लोकार्पण

    रजत जयंती वर्ष में छत्तीसगढ़ को मिलेगा नया गौरव – प्रधानमंत्री मोदी करेंगे भव्य विधानसभा भवन का लोकार्पण

    छत्तीसगढ़ विधानसभा का नया भवन : परंपरा और आधुनिकता का संगम

    रायपुर,

    छत्तीसगढ़ के इतिहास में 1 नवम्बर का दिन एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी राज्य की जनता को विधानसभा का नया भवन समर्पित करेंगे। वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद रायपुर के राजकुमार कॉलेज से शुरू हुई छत्तीसगढ़ विधानसभा को 25 वर्षों के बाद रजत जयंती वर्ष में अपना भव्य, आधुनिक और पूर्ण सुविधायुक्त स्थायी भवन मिलने जा रहा है। यह भवन केवल एक खूबसूरत इमारत ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक भी है।

    ‘धान का कटोरा’ कहलाने वाले छत्तीसगढ़ की पहचान को इस भवन की वास्तुकला में बखूबी पिरोया गया है। विधानसभा के सदन की सीलिंग पर धान की बालियों और पत्तियों को उकेरा गया है, जो प्रदेश की कृषि-प्रधान संस्कृति का प्रतीक है। भवन के ज्यादातर दरवाजे और फर्नीचर बस्तर के पारंपरिक काष्ठ शिल्पियों द्वारा बनाए गए हैं। इस तरह नया विधानसभा भवन आधुनिकता और परंपरा का एक जीवंत संगम बन गया है।

    भविष्य की जरूरतों के अनुरूप अत्याधुनिक भवन

    नए विधानसभा भवन को वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। यह पूरी तरह सर्वसुविधायुक्त और सुसज्जित भवन है, जिसके सदन को 200 सदस्यों तक के बैठने के लिए विस्तारित किया जा सकता है। पेपरलेस विधानसभा संचालन के लिए आवश्यक तकनीकी सुविधाओं का समावेश भी किया गया है, जिससे यह भवन ‘स्मार्ट विधानसभा’ के रूप में विकसित होगा।

    324 करोड़ की लागत से बना 51 एकड़ में फैला परिसर

    कुल 51 एकड़ में फैले इस परिसर का निर्माण 324 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है। भवन को तीन मुख्य हिस्सों—विंग-ए, विंग-बी और विंग-सी—में विभाजित किया गया है। विंग-ए में विधानसभा का सचिवालय, विंग-बी में सदन, सेंट्रल हॉल, मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय, तथा विंग-सी में मंत्रियों के कार्यालय स्थित हैं।

    हरित तकनीक से निर्मित पर्यावरण अनुकूल भवन

    यह भवन पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल और हरित निर्माण तकनीक से बनाया गया है। परिसर में सोलर प्लांट की स्थापना के साथ वर्षा जल संचयन हेतु दो सरोवर भी बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा, भवन में पर्यावरण-संरक्षण के सभी मानकों का पालन किया गया है।

    500 सीटर ऑडिटोरियम और 100 सीटर सेंट्रल हॉल

    विधानसभा भवन में 500 दर्शक क्षमता वाला अत्याधुनिक ऑडिटोरियम और 100 सीटर सेंट्रल हॉल बनाया गया है। भवन की वास्तुकला आधुनिकता और पारंपरिक शैलियों का उत्कृष्ट मेल है।

    तीन करोड़ जनता की आकांक्षाओं का प्रतीक

    छत्तीसगढ़ की संस्कृति और शिल्प से सजे-संवरे इस नए विधानसभा भवन में राज्य के तीन करोड़ नागरिकों की उम्मीदें, आकांक्षाएं और आत्मगौरव साकार होता दिखेगा। यह भवन न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था  का, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान, प्रगति और परंपरा का प्रतीक भी बनेगा।

  • प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में भोपाल की बेटियाँ देंगी बैंड की प्रस्तुति

    प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में भोपाल की बेटियाँ देंगी बैंड की प्रस्तुति

    स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परिसर में होगी प्रस्तुति

    भोपाल 
    भोपाल की बेटियाँ राष्ट्रीय एकता दिवस 31 अक्टूबर 2025 को गुजरात के एकता नगर (स्टैच्यू ऑफ यूनिटी) परिसर में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में मध्यप्रदेश का मान बढ़ाएंगी।

    स्कूल ​शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित बैंड प्रतियोगिता में सेंट जोसेफ कॉन्वेंट ईदगाह हिल्स स्कूल भोपाल की बालिका टीम ने राज्य में प्रथम स्थान हासिल कर राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश का प्रतिनि​धित्व करते हुए देश में दूसरा स्थान हासिल किया था। उसी टीम को केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परिसर में 31 अक्टूबर को होने वाले कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के लिए चुना है। गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय बैंड प्रतियोगिता में शामिल दो टीमों को आमंत्रित किया है। बालिका वर्ग में द्वितीय स्थान हासिल करने वाले भोपाल के सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल और बालक वर्ग में देश में पहला स्थान हासिल करने वाली राजस्थान की टीम शामिल है। यह दोनों टीमें संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री श्री मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री शाह की मौजूदगी में होने वाले कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुति देंगी।

    यह कार्यक्रम लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में प्रदेश की बैंड टीम राज्य पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, अन्य सुरक्षा बल और एनसीसी की टीमों के साथ मंच साझा करेगी।

    बैंड में शामिल 30 बालिकाओं की टीम उनके प्र​शिक्षक श्री रसिक नागर पांडेय के साथ 23 अक्टूबर को गुजरात के लिए प्रस्थान करेगी। श्री पांडेय ने बताया कि कार्यक्रम में बैंड टीम द्वारा हिन्दी, गुजराती, अंग्रेजी, स्पेनिश और जर्मन धुनें प्रस्तुत की जाएंगी। स्कूल की प्राचार्य सिस्टर लिली ने बताया कि बैंड की टीम पिछले 15 दिन से इस गौरवपूर्ण कार्यक्रम के लिए तैयारी कर रही है। इस कार्यक्रम में ​शामिल होना हमारे स्कूल, भोपाल और पूरे मध्यप्रदेश के लिए गौरव की बात है।

     

  • संघ की शताब्दी पर बोले प्रधानमंत्री मोदी: राष्ट्र प्रथम ही संघ का मूल भाव

    संघ की शताब्दी पर बोले प्रधानमंत्री मोदी: राष्ट्र प्रथम ही संघ का मूल भाव

    नई दिल्ली

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक अक्टूबर को विजयादशमी के मौके पर आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए. नई दिल्ली के डॉक्टर आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में हुए संघ के शताब्दी समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए पीएम मोदी ने विशेष रूप से तैयार किया गया स्मृति डाक टिकट और सिक्का जारी किया.

    पीएम मोदी ने इस अवसर पर अपने संबोधन में संघ के स्वयंसेवक रहे विजय कुमार मल्होत्रा के निधन का उल्लेख करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और देशवासियों को नवरात्रि की बधाई दी. पीएम मोदी ने संघ के शताब्दी वर्ष का गवाह बनने को गौरव का पल बताया और कहा कि आज जो सिक्का जारी हुआ है, उस पर पहली बार भारत माता की तस्वीर अंकित हुई है. इस पर संघ का बोधवाक्य भी लिखा हुआ है.

    उन्होंने यह भी कहा कि संघ के स्वयंसेवक 1963 में 26 जनवरी की परेड में भी शामिल हुए थे और आन-बान-शान के साथ देशभक्ति की धुन पर कदमताल किया था. इसकी झलक भी डाक टिकट में है. पीएम मोदी ने कहा कि स्वयंसेवक जिस तरह राष्ट्र निर्माण के काम में जुटे हुए हैं, उसकी झलक भी टिकट में है. उन्होंने स्मारक सिक्कों और डाक टिकट के लिए देशवासियों को बधाई भी दी.

    पीएम मोदी ने कहा कि संघ ने समाज के हर आयाम को छुआ है. संघ के स्वयंसेवक समाज को समृद्ध करने में जुटे हैं. उन्होंने कहा कि यह अविरल तप का फल है, यह राष्ट्र प्रवाह प्रबल है. पीएम ने कहा कि आदिवासी कल्याण से लेकर विविध क्षेत्रों में संघ के स्वयंसेवक काम कर रहे हैं. धाराएं बढ़ीं, लेकिन विरोधाभास नहीं. विचार एक ही है- राष्ट्र निर्माण. संघ ने राष्ट्र निर्माण के लिए व्यक्ति निर्माण की राह चुनी. इसके लिए शाखाएं शुरू हुईं.

    उन्होंने कहा कि संघ की शाखाएं व्यक्ति निर्माण की वेदी हैं. इन शाखाओं में त्याग पनपता रहता है. पीएम ने कहा कि अहं से वयम तक की यात्रा शाखाओं में पूरी होती है. शाखा जैसी सरल जीवन पद्धति ही संघ के सौ वर्षों के सफर का आधार बने. उन्होंने कहा कि समर्पण, सेवा और राष्ट्र निर्माण की साधना से. संघ ने जिस कालखंड में जो चुनौती आई, उसमें संघ ने खुद को झोंक दिया.

    आजादी के आंदोलन में संघ का बहुत योगदान- पीएम मोदी

    पीएम मोदी ने आजादी के आंदोलन में डॉक्टर हेडगेवार की सक्रिय भागीदारी से लेकर हैदराबाद के निजाम और दादरा नगर हवेली तक, संघ का बहुत योगदान रहा. उन्होंने कहा कि इसके बाद भी संघ को कुचलने का प्रयास हुआ. संघ को मुख्य धारा में नहीं आने देने के लिए अनगिनत साजिशें हुईं. पीएम मोदी ने कहा कि गुरु जी जब जेल से बाहर आए, तब उन्होंने बहुत सहजता से कहा था कि कभी कभी जीभ दांतों के बीच में आ जाती है, लेकिन हम दांत नहीं तोड़ दिया करते. जीभ भी हमारी है, दांत भी.

    उन्होंने कहा कि जेल में तरह-तरह की यातनाएं दी गईं, अत्याचार हुए लेकिन गुरु जी के मन में कोई भेद नहीं था. उनका व्यक्तित्व ऋषितुल्य था. पीएम मोदी ने कहा कि संघ पर चाहे प्रतिबंध लगे, लेकिन स्वयंसेवकों ने मन में कटुता को कभी स्थान नहीं दिया. उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्वयंसेवक के लोकतंत्र पर अडिग विश्वास ने मन में कटुता को जन्म नहीं लेने दिया.

    अनेक थपेड़े सहते हुए भी अडिग खड़ा है संघ- पीएम

    पीएम मोदी ने कहा कि समाज के अनेक थपेड़े सहते हुए भी संघ विराट वृक्ष की तरह अडिग खड़ा है. उन्होंने कहा कि अभी एक स्वयंसेवक ने कितनी सुंदर प्रस्तुति दी- हमने देश को ही देव माना है और देह को ही दीप बनाकर जलना सीखा है. पीएम मोदी ने कहा कि शुरू से ही संघ राष्ट्रभक्ति का पर्याय रहा है. जब विभाजन की पीड़ा ने लाखों लोगों को बेघर कर दिया, तब संघ के स्वयंसेवक शरणार्थियों की सेवा में अपने सीमित संसाधनों के साथ सबसे आगे खड़े थे.

    उन्होंने कहा कि 1956 में जब गुजरात में भुज में भूकंप आया था, तब भी स्वयंसेवक आगे थे. खुद कष्ट उठाकर दूसरों का दुख दूर करना, ये संघ के स्वयंसेवकों का परिचायक है. स्वयंसेवक कठिन घड़ी में सेना के साथ खड़े रहे. पीएम मोदी ने 1984 के सिख दंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि तब अनेक सिख परिवार स्वयंसेवकों के घर आश्रय लिया था. उन्होंने कहा कि एपीजे अब्दुल कलाम चित्रकूट गए, नानाजी देशमुख से मिले और संघ के स्वयंसेवकों के कार्य देख हैरान रह गए थे. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी जब नागपुर गए, हैरान रह गए.

    आदिवासी परंपराएं सहेजने में संघ का बड़ा योगदान- पीएम

    पीएम मोदी ने कहा कि उत्तराखंड की आपदा हो या कोई और, संघ के स्वयंसेवक आज भी हर मुश्किल समय में सबसे आगे रहता है. उन्होंने कहा कि संघ ने दुर्गम इलाकों में भी उनकी संस्कृति, भाषा और कला के संरक्षण का कार्य किया. संघ दशकों से आदिवासी परंपराओं, रीति-रिवाजों को सहेजने में बड़ी भूमिका निभाई है. पीएम मोदी ने कहा कि संघ के लाखों स्वयंसेवकों की सराहना करूंगा, जो आदिवासियों का जीवन बेहतर करने में जुटे हैं.

    संघ की स्थापना के समय चुनौतियां अलग थीं, आज अलग- पीएम

    पीएम मोदी ने छुआछूत और ऊंच-नीच की भावना को समाज के लिए बड़ी बीमारी बताया और संघ की ओर से समरसता के लिए उठाए गए कदम गिनाए. उन्होंने कहा कि सौ साल पहले जब संघ अस्तित्व में आया था, तब हमें सैकड़ों वर्षों की राजनीतिक गुलामी से मुक्ति पानी थी. अपनी संस्कृति की रक्षा करनी है. पीएम मोदी ने कहा कि सौ साल बाद आज जब भारत तेजी से विकसित होने की तरफ बढ़ रहा है, तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है, देश का एक बड़ा वर्ग गरीबी को पराजित कर आगे आ रहा है.

    उन्होंने कहा कि हमारे युवाओं के लिए नए-नए अवसर आ रहे हैं, तब आज की चुनौतियां अलग हैं और संघर्ष भी. दूसरे देशों पर हमारी आर्थिक निर्भरता एक साजिश है. डेमोग्राफिक बदलाव एक चुनौती है और हमारी सरकार इन चुनौतियों से तेजी से निपट रही है. पीएम ने कहा कि एक स्वयंसेवक के रूप में मुझे यह कहते हुए खुशी है कि संघ ने इन चुनौतियों को ना केवल चिह्नित किया है, बल्कि निपटने के लिए रोडमैप भी तैयार किया है. उन्होंने स्वबोध की परिभाषा भी बताई और कहा कि आज महानवमी है, देवी सिद्धिदात्री का दिन है. कल विजयादशमी का महापर्व है. विजयादशमी भारतीय संस्कृति के विचार और विश्वास का कालजयी उद्घोष है.

    संघ की स्थापना परंपरा का पुनरुत्थान- पीएम

    पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे महापर्व पर सौ वर्ष पूर्व संघ की स्थापना कोई संयोग नहीं. यह हजारों वर्षों से चली आ रही परंपरा का पुनरुत्थान था, जिसमें राष्ट्र चेतना समय-समय पर उस युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए नए-नए अवतारों में प्रकट होती है. उन्होंने कहा कि संघ उसी का पुण्य अवतार है. यह हमारी पीढ़ी के स्वयंसेवकों का सौभाग्य है, कि हमें संघ के शताब्दी वर्ष जैसा महान अवसर देखने को मिल रहा है. पीएम मोदी ने कहा कि आज इस अवसर पर संघ के स्वयंसेवकों को शुभकामना देता हूं. संघ के संस्थापक हेडगेवार जी के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित करता हू.

  • प्रधानमंत्री मोदी ने IIT भिलाई के नए चरण का वर्चुअल  किया शिलान्यास

    प्रधानमंत्री मोदी ने IIT भिलाई के नए चरण का वर्चुअल किया शिलान्यास

    आईआईटी में आयोजित कार्यक्रम में तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरू खुशवंत साहेब हुए शामिल

    भारत सरकार ने फेस 2 के लिए 2257.55 करोड़ रुपए किए है मंजूर

    रायपुर,

    प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने आज झारसुगुड़ा (ओडिशा) में आयोजित कार्यक्रम के दौरान देश के आठ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में अधोसंरचना विकास कार्यों का वर्चुअल शिलान्यास किया। इनमें आईआईटी भिलाई के फेस-2 परियोजना भी शामिल है। अन्य सात संस्थानों में आईआईटी पटना, आईआईटी इंदौर, आईआईटी जोधपुर, आईआईटी तिरुपति, आईआईटी पलक्कड़, आईआईटी धारवाड़ और आईआईटी जम्मू सम्मिलित हैं।

    इस अवसर का सीधा प्रसारण आईआईटी भिलाई परिसर के नालंदा व्याख्यान कक्ष में किया गया। समारोह में छत्तीसगढ़ के कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब और अहिवारा के विधायक  डोमनलाल कोर्सेवाड़ा उपस्थित रहे।

    मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा आठ आईआईटी परियोजनाओं का शिलान्यास होना पूरे देश और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है। इससे प्रदेश में तकनीकी शिक्षा का विस्तार होगा और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आईआईटी भिलाई के फेस-2 निर्माण पूर्ण होने पर शोधार्थी छात्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    फेस-2 परियोजना : तकनीकी शिक्षा और नवाचार की नई दिशा

    भारत सरकार ने 29 मई 2025 को फेस-2 निर्माण के लिए 2,257.55 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं, जिनमें से 1,092 करोड़ रुपये परिसर निर्माण पर व्यय होंगे। इस चरण में 1 लाख 51 हजार 343 वर्ग मीटर का अतिरिक्त क्षेत्र विकसित किया जाएगा, जिसमें नए इंजीनियरिंग और विज्ञान विभाग, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ, आईसीटी सक्षम व्याख्यान कक्ष और प्रोटोटाइप सुविधाएँ शामिल होंगी।

    छात्र संख्या 1,500 से बढ़कर 3,000 हो जाएगी। परियोजना में छात्रावास, मेस हॉल, खेल परिसर, ओपन एयर थिएटर, कैंटीन, खेल मैदान, टेनिस कोर्ट, आवासीय भवन, स्वास्थ्य केंद्र और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स जैसी सुविधाएँ भी जोड़ी जाएंगी। फेस-2 की सबसे महत्वपूर्ण पहल छत्तीसगढ़ का पहला अनुसंधान पार्क है, जिसकी स्थापना 96 करोड़ रुपये की लागत से की जाएगी। इस परियोजना को अक्टूबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    आईआईटी भिलाई की स्थापना वर्ष 2016 में की गई थी। फेस-1 निर्माण के लिए  1090.17 करोड़ मंजूर किए गए थे, जिसके तहत 1 लाख 34 हजार 450 वर्ग मीटर क्षेत्र में स्मार्ट, पर्यावरण-संवेदनशील और छात्र-केंद्रित परिसर विकसित किया गया, जिसका लोकार्पण प्रधानमंत्री द्वारा 20 फरवरी 2024 को किया गया था। इस परिसर को जीआरआईएचए एलडी रेटिंग और एनएससीआई सुरक्षा पुरस्कार 2021 सहित कई सम्मान प्राप्त हुए हैं।

    आईआईटी भिलाई की उपलब्धियाँ और विशेषताएँ

    आईआईटी भिलाई का परिसर गोंड आदिवासी कला से प्रेरित प्रवेश गलियारों से सुशोभित है, जो छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक हैं। संस्थान वर्तमान में लगभग 185 करोड़ रुपये की 300 से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं का नेतृत्व कर रहा है तथा अब तक 30 पेटेंट दर्ज किए जा चुके हैं।

    संस्थान विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतःविषय साइबर-भौतिक प्रणालियों (NM-ICPS) पर राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत स्थापित सेक्शन 8 कंपनी आईआईटी भिलाई इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी फाउंडेशन (I B I T F) की मेजबानी करता है। हाल ही में आईबीआईटीएफ को वित्तीय क्षेत्र के लिए फिनटेक आधारित नवाचारों को प्रोत्साहित करने हेतु ‘श्रेणी-ए हब’ के रूप में नामित किया गया है।

    आईआईटी भिलाई की एक उल्लेखनीय पहल विद्या समीक्षा केंद्र, छत्तीसगढ़ है, जो राज्यभर के स्कूलों, शिक्षकों और छात्रों के लिए एक केंद्रीकृत, वास्तविक समय डिजिटल निगरानी प्रणाली है। इस मंच ने 10 लाख गैर-मौजूद छात्र रिकॉर्ड की पहचान कर उन्हें समाप्त किया, जिससे लगभग 40 करोड़ रुपये की बचत हुई और 60 लाख पाठ्यपुस्तकों का सही वितरण संभव हो सका।

    इसके अलावा संस्थान ने गहन तकनीकी समाधानों के माध्यम से जनजातीय समुदायों के उत्थान के लिए देशभर में कुल 54 जनजातीय विकास परियोजनाएँ शुरू की हैं, जिन पर 19 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं।

    वर्तमान और भविष्य

    वर्तमान में आईआईटी भिलाई में बी.टेक, एम.टेक, एम.एससी. और पीएच.डी. कार्यक्रमों के अंतर्गत 1,525 छात्र अध्ययनरत हैं। फेस-2 विकास के साथ यह संख्या 3,000 तक पहुँच जाएगी। इससे संस्थान न केवल शिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में बल्कि उद्योग सहयोग और तकनीकी विकास में भी एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित होगा।

    इस अवसर पर संस्था के विषय विशेषज्ञ, प्राध्यापकगण, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

     

     

  • प्रधानमंत्री  मोदी स्वदेशी के हैं ब्रांड एम्बेसडर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रधानमंत्री मोदी स्वदेशी के हैं ब्रांड एम्बेसडर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    हमने हर काल में आई चुनौतियों का सामना स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की ताकत से किया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रधानमंत्री  मोदी स्वदेशी के हैं ब्रांड एम्बेसडर
    स्वावलंबन और स्वदेशी के बीज से ही आत्मनिर्भरता का बनेगा वटवृक्ष
    मुख्यमंत्री ने त्यौहारी सीजन में प्रदेशवासियों को स्वदेशी वस्तुएं खरीदने के लिए किया प्रेरित
    स्वदेशी अभियान की सफलता के लिए समाज की सक्रिय सहभागिता आवश्यक
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वदेशी जागरण सप्ताह का किया शुभारंभ
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वदेशी जनजागरण रैली में हुए शामिल
    पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती से महात्मा गांधी की जयंती तक चलेगा स्वदेशी जागरण सप्ताह
    रवीन्द्र भवन में हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्वदेशी की ताकत से ही हमारी संस्कृति, हजारों हजार साल से अपने गौरव-गरिमा और समृद्धता के साथ विद्यमान है। हर युग और हर काल में आई चुनौतियों का हमने स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की ताकत से ही सामना किया है। महात्मा गांधी ने स्वदेशी के बल पर ही देश को आजादी दिलाई थी। उन्होंने ने जन-जन को विदेशी वस्तुओं को त्यागने और विदेशी वस्त्रों की होली जलाने के लिए प्रेरित किया। अपनी माटी, अपने देश और स्वदेशी व्यवस्था के प्रति हम सबके मन में सम्मान होना चाहिए। महात्मा गांधी और पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों में बहुत समानता थी। महात्मा गांधी और पं. दीनदयाल उपाध्याय भारतीय संस्कृति की लंबी विचार प्रक्रिया के संवाहक हैं। दोनों का ही विचार था कि स्वावलंबन और स्वदेशी के बीज से ही आत्मनिर्भरता का वटवृक्ष बनेगा और भारत, विश्व की प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को पं. दीनदयाल उपाध्याय की जंयती के अवसर पर मध्यप्रदेश जन-अभियान परिषद और स्वदेशी जागरण मंच के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राज्य स्तरीय स्वदेशी जागरण सप्ताह के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। रवीन्द्र भवन में आयोजित कार्यक्रम का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलाचरण के बीच दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रैली में पैदल मार्च कर स्वदेशी अपनाने के लिए जन-जन को किया प्रेरित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माँ भारती, महात्मा गांधी और पं. दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर गायत्री परिवार, ब्रह्म कुमारी संगठन, पंतजलि समूह और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने स्वदेशी के प्रति अपनी प्रतिबद्धिता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव को स्वदेशी संकल्प समर्थन-पत्र सौंपे। कार्यक्रम में स्वदेशी पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वदेशी जागरण सप्ताह के शुभारंभ अवसर पर निकाली गई रैली में मानस भवन से पैदल मार्च करते हुए शामिल हुए। रैली के माध्यम से उद्योग जगत, व्यापारी बन्धुओं, दुकानदारों, विक्रेताओं, छात्र-छात्राओं और समस्त समाज के सदस्यों को स्वदेशी अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। रैली स्वदेशी पर केंद्रित नारों के माध्यम से जन-जागरण करती हुई रवीन्द्र भवन पहुंची।

    भोपाल, बैतूल, शिवपुरी और उज्जैन में लगेंगे स्वदेशी मेले

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वदेशी जागरण सप्ताह में स्वदेशी वस्तुओं का प्रचार-प्रसार करने और बढ़ावा देने के उद्देश्य से पूरे प्रदेश में स्वदेशी जागरण सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। यह महाअभियान प्रदेश के 313 विकासखंडों में पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती 25 सितम्बर से महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर तक चलेगा। प्रसन्नता का विषय है कि आगामी माहों में भोपाल, बैतूल, शिवपुरी और उज्जैन में स्वदेशी मेले आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी स्वदेशी के सबसे बड़े ब्रांड एम्बेसडर हैं। उनके मार्गदर्शन में देश की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। आत्मनिर्भर बनते भारत की विकास यात्रा का मार्ग स्वदेशी से ही खुलता है।

    किसानों और कारीगरों के परिश्रम का सम्मान जरूरी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी मिट्टी, अपनी भूमि के प्रति विश्वास के भाव से ही हम अपने जीवन को सफल और धन्य कर सकते हैं। किसान मिट्टी में श्रम से ही अपने अन्न के भंडार भरते हैं। लघु उद्योग चलाने और उसमें काम करने वाले कारीगर के भी स्वावलंबन के मार्ग पर चलते हैं, उनके परिश्रम का सम्मान आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवरात्रि, दशहरा और दीपावली के त्योहारी सीजन में प्रदेशवासियों को स्वदेशी वस्तुएं खरीदने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी अभियान की सफलता समाज के सहयोग के बिना मंजिल तक नहीं पहुंच सकती है। दीपक और उसकी बाती के लिए जिस प्रकार ऑक्सीजन जरूरी है, उसी प्रकार स्वदेशी जैसे अभियान की सफलता के लिए समाज की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है।

    कार्यक्रम में मध्यप्रदेश जन-अभियान परिषद के उपाध्यक्ष  मोहन नागर, स्वर्णिम भारत वर्ष फाउण्डेशन, अखिल भारतीय सह प्रमुख स्वदेशी मेला, स्वाबलंबी भारत अभियान और सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान मध्यप्रदेश के पदाधिकारी सहित बड़ी संख्या में स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।

     

  • प्रधानमंत्री मोदी का स्वदेशी मंत्र: अब पैसों से नहीं, पसीने से होगी असली पहचान!

    प्रधानमंत्री मोदी का स्वदेशी मंत्र: अब पैसों से नहीं, पसीने से होगी असली पहचान!

    नई दिल्ली

    ‘मेरी स्वदेशी की व्याख्या बहुत सिंपल है. पैसा किसका लगता है, उससे लेना-देना नहीं है.  डॉलर है, पाउंड है… वह करेंसी काली है या गोरी है, मुझे लेना-देना नहीं है. लेकिन जो प्रोडक्शन है उसमें पसीना मेरे देशवासियों का होगा. जो प्रोडक्शन होगा, उसमें महक मेरे देश की मिट्टी की होगी.’ मोदी ने पिछले दिनों गुजरात में मारुति सुजुकी ई-विटारा इलेक्ट्रिक एसयूवी और हाइब्रिड बैटरी यूनिट का उद्घाटन करते हुए जब स्वदेशी की इस तरह व्याख्या की तो कई बातें स्पष्ट हो गईं. पीएम के बयान से यह साफ हो गया कि सरकार के स्वदेशी का दायरा इसके परंपरागत परिभाषा से कहीं व्यापक और वृहद है.

    रविवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में PM  नरेंद्र मोदी ने फिर से स्वदेशी मंत्र का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता को जैसे स्वदेशी के मंत्र से ताकत मिली, वैसे ही देश की समृद्धि को भी स्वदेशी के मंत्र से ही शक्ति मिलेगी. 

    हर घर को स्वदेशी का प्रतीक बनाने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा किआज जाने-अनजाने हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत सी विदेशी चीजें जुड़ गई हैं, हमें पता तक नहीं है. हमारे जेब में कंघी विदेशी है कि देसी है, पता ही नहीं है. हमें इनसे भी मुक्ति पानी होगी. 

     उन्होंने 'मेक इन इंडिया' पर जोर देते हुए कहा कि हम वो सामान खरीदें, जो मेड इन इंडिया हो, जिसमें हमारे देश के नौजवानों की मेहनत लगी हो, हमारे देश के बेटे बेटियों का पसीना हो. उन्होंने कहा कि ये हर भारतीय का मिजाज़ बनना चाहिए.

    स्वदेशी का विचार

    सहज भाषा में कहें तो स्वदेशी का अर्थ है "अपने देश का" या अपने देश में निर्मित वस्तुएं, सेवाएं और देश में पैदा हुए और फले-फूले विचार. स्वदेशी का कॉन्सेप्ट भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था. इसका उद्देश्य विदेशी (विशेषकर ब्रिटिश) वस्तुओं का बहिष्कार कर स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करना था. तब महात्मा गांधी स्वदेशी के ब्रैंड एम्बेसडर थे. 

      आधुनिक संदर्भ में स्वदेशी का मतलब स्थानीय उत्पादों, प्रौद्योगिकी और संसाधनों को प्राथमिकता देना है ताकि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो और विदेशी निर्भरता कम हो. 

      राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और स्वदेशी जागरण मंच जैसे संगठन परंपरागत रूप से स्वदेशी को राष्ट्रीय गौरव और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतीक मानते हैं. इनका तर्क है कि स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग से भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, रोजगार बढ़ेगा. 

      कुछ साल पहले तक तो संघ और स्वदेशी जागरण मंच स्वदेशी को विदेशी कंपनियों की "आर्थिक गुलामी" से बचने का उत्तर मानते थे. ये संगठन  विदेशी निर्भरता कम करने और संरक्षणवादी नीतियों को अपनाने की वकालत करते हैं. 

      प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2020 की कोरोना संकट के दौरान स्वदेशी के पुश पर जोर दिया था. 

      PM मोदी ने 12 मई को "आत्मनिर्भर भारत अभियान" की घोषणा की थी. जिसमें स्वदेशी को आर्थिक आत्मनिर्भरता का आधार बताया गया था. 

      इसका फोकस स्थानीय विनिर्माण, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और विदेशी आयात से निर्भरता कम करना था. इसी दौरान पीएम मोदी ने वोकल फॉर लोकल का नारा दिया. इसका मतलब था कि भारतीयों को स्थानीय उत्पाद, लोकल सामान के बारे में खुलकर बात करना चाहिए और इसका प्रचार करना चाहिए.

      यह पीएम मोदी द्वारा स्वदेशी को जन-आंदोलन के रूप में प्रस्तुत करता था. 

      इसी दौरान पीएम मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की. इसके साथ ही उन्होंने MSME, कृषि, और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन शुरू किए. रक्षा में 101 आयात वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाया गया.

    स्वदेशी को ग्लोबल सप्लाई चेन से जोड़ा

      आगे के वर्षों में पीएम मोदी ने स्वदेशी को केवल स्थानीय उत्पादों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की भूमिका से जोड़ा. इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए जो नारा दिया गया उसी का नाम है, "मेक इन इंडिया, और मेक फॉर द वर्ल्ड" का नारा. 

      पीएम मोदी ने मेक इन इंडिया का नारा दिया तो निश्चित रूप से ये विदेशी पूंजी के स्वागत का न्योता था. दरअसल मेक इन इंडिया स्वदेशी और वैश्वीकरण का मिश्रण है, जो विदेशी पूंजी को आकर्षित कर भारत को मैन्युफैक्चरिंग और नवाचार का हब बनाता है. यह भारत की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति को मजबूत करने की घोषणा है.

    पैसा किसका लगता है, कौन सा देश लगाता है, बड़ी बात नहीं 

      यही वजह है कि पीएम मोदी ने अहमदाबाद में साफ कह दिया है कि स्वदेशी प्रोडक्शन में पैसा किसका लगता है, कौन सा देश लगाता है, ये बड़ी बात नहीं है. जो बड़ी बात है वो यह है कि प्रोडक्शन भारत भूमि में हो और इसका लेबर भी भारत से आए. 

      लेकिन सवाल है कि स्वदेशी को लेकर उस संगठन का क्या कहना है जो भारत में इसके पक्ष में सबसे बड़ा आंदोलन चलाता है. स्वदेशी जागरण मंच भारत में स्वदेशी आंदोलन की बड़ी ताकत है. 

      स्वदेशी को समझाते हुए स्वदेशी जागरण मंच के सह संयोजक अश्विनी महाजन कहते हैं कि इस टर्म को बहुत हद तक बदनाम किया गया और स्वदेशी की जो परिभाषा को जिस तरह से महात्मा गांधी ने समझाया उसके अनुसार स्वदेशी का अर्थ है अपने आस-पास के परिवेश के साजो-सामान का इस्तेमाल करना. उससे सामान बनाना और श्रेष्ठता लाना और अगर उसमें कुछ कमी हो तो उसको ठीक करना. 

      स्वदेशी आंदोलन में विदेशी सहयोग को स्वीकार करने की बात करते हुए अश्विनी महाजन ने आजतक डॉट इन से कहा, "स्वदेशी का मतलब कोई विदेशों से कटना नहीं है. विदेशों से संबंध नहीं रखना इसका मतलब स्वदेशी नहीं है. विदेशों से सामान नहीं खरीदना-बेचना स्वदेशी नहीं है, ये तो ऑटर्की (Autarky) है. स्वदेशी एक सकारात्मक विचार है." आजादी के समय स्वदेशी में बहिष्कार के कॉन्सेपट को समझाते हुए उन्होंने कहा कि ये उस काल की एक खासियत थी. 

      आधुनिक अर्थ में स्वदेशी को समझाते हुए उन्होंने कहा कि, "पीएम मोदी ने पहले मेक इन इंडिया कहा, फिर आत्मनिर्भर भारत कहा, फिर अब स्वदेशी की बात की. ये सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और परिस्थितियों के हिसाब से हम स्वदेशी को चुनते हैं."

    स्वदेशी को बदनाम किया गया

      स्वदेशी जागरण मंच का मानना है कि स्वदेशी को बदनाम किया गया है और इसके लिए मंच सोशलिस्ट विचारधारा को जिम्मेदार मानते हैं. अश्विनी महाजन कहते हैं, " स्वदेशी का मतलब सोशलिस्ट नहीं है, स्वदेशी का ये अर्थ नहीं है कि सरकार सब कुछ करेगी. सरकार सब चीजों पर नियंत्रण रखेगी ऐसा नहीं है. स्वदेशी का मतलब है हम अपने देश में जो संसाधन है उसका देशहित में भरपूर उपयोग करना."  

      जब हम कहते हैं कि मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड तो ये स्वदेशी है. यानि की हम इस क्वालिटी का प्रोडक्ट बनाएं कि दुनिया भर में इसकी मांग हो.  इसका मतलब ये नहीं है कि हम अपने लिए बनाएं और अपने लिए ही इस्तेमाल कर लें. 

      स्वदेशी की आधुनिक विचारधारा में विदेशी साझेदारों के साथ सहभागिता को सहमति देते हुए अश्विनी महाजन कहते हैं कि स्वदेशी का मतलब यह नहीं है कि विदेशों से हमें कुछ सिखना ही नहीं है.  

    हिन्दू सोशलिस्ट सिस्टम का पक्षधर नहीं

      उन्होंने कहा कि हिन्दू कभी भी सोशलिस्ट सिस्टम के पक्षधर नहीं हैं. हिन्दू ग्रोथ मॉडल कहता है कि हमें विश्व के लिए प्रोडक्शन करना है. भारत उद्यमियों का देश है… हमने पिछले 11 सालों में सिर्फ स्टार्ट अप की बात ही की तो एक लाख साठ हजार स्टार्ट अप बन गए. 110-115 यूनिकॉर्न बन गए. हालांकि महाजन ने कहा कि वे इन यूनिकॉर्न की अच्छाई-बुराई में नहीं जा रहे हैं. 

    नेहरू जी ने स्वदेशी को बदनाम किया

      अश्विनी महाजन ने आगे साफ कहा कि नेहरू जी ने स्वदेशी को बदनाम करने का काम किया. उन्होंने कहा कि सरकार सब कुछ अपने हाथ में रखेगी. निजी क्षेत्र कुछ नहीं कर सकता है. हमारे उद्यमी कुछ नहीं कर सकते, हमारे पास पैसा नहीं है, हमारे पास तकनीक नहीं है. लेकिन इन चीजों को विकसित किया जा सकता है. 

      यह पूछे जाने पर कि क्या पीएम मोदी के स्वदेशी पर उदार नीति को देखते हुए मंच ने स्वदेशी की अपनी परिभाषा को हल्का कर किया है? अश्विनी महाजन ने कहा कि मोदी जी भी उसी स्कूल से आते हैं जिस स्कूल ऑफ थॉट से हम आते हैं. उन्होंने कहा कि हमें मिसकोट किया गया, मिसअंडरस्टैंड किया गया और नैरेटिव बनाया गया कि हम स्वदेशी वाले देश को अंधकार में रखना चाहते हैं. 

      'हमारा कहना है कि विदेशी पूंजी के आधार पर जो विकास करने की कोशिश हुई जिसमें पूंजी उनकी शर्तों पर आ रही थी, पेटेंट, ट्रेड, निवेश सब बाहर की कंपनियों की शर्तों पर हो रहा था. हम इसका विरोध कर रहे थे.' 

      स्वदेशी जागरण मंच ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा भारत में हर तरह की विदेशी पूजीं को मेक इन इंडिया के लिए इस्तेमाल किए जाने पर अपनी राय दी. अश्विनी महाजन ने कहा कि सरकारें को अंतरराष्ट्रीय संबंधों को देखते हुए निर्णय करना होता है. कुछ देश को देखते हुए फैसला करना होता है. सरकारें तो सतत चलती रहती हैं. सरकार पार्टी की नहीं देश की सरकार होती है.

    स्वदेशी जागरण मंच की विदेशी की परिभाषा

      उन्होंने स्वदेशी जागरण मंच की विदेशी की परिभाषा बताते हुए कहा कि जो कंपनी विदेश में बनी है वो विदेशी है, जिस कंपनी में 50 प्रतिशत से ज्यादा शेयर विदेश के हैं वो विदेशी हैं. अगर किसी भारतीय का भी पैसा विदेशी रूट से आया है तो वो विदेशी पैसा है. 

      स्वदेशी को प्रगतिशील विचार बताते हुए महाजन ने कहा कि ये बात सही है कि हमें प्रोद्योगिकी का विकास करने की जरूरत है. कई बार हम इस तकनीक को अपने लेवल पर विकसित कर सकते हैं, कई बार हमें विदेशी तकनीक की जरूरत पड़ती है, हम इसे भी सही मानते हैं लेकिन ये आवश्यक बुराई हो जाता है. उन्होंने कहा कि स्वदेशी एक प्रगतिशील विचार है. तो तकनीक जहां से मिले उसे लेना है लेकिन उस पर आश्रित नहीं होना है. 

    क्या स्वदेशी जागरण मंच को सड़क पर उतरने की जरूरत है?

      जब स्वदेशी जागरण मंच से पूछा गया कि क्या मौजूदा माहौल में उन्हें स्वदेशी को पुश देने के लिए फिर से सड़क पर उतरने की जरूरत है. क्या मंच की आवाज कमजोर हुई है तो उन्होंने कहा कि क्या आपको ऐसा लगता है? अश्विनी महाजन ने कहा कि सरकार के सामने हम जितने भी विषय लेकर गए जैसे जेनेटिकली मोडिफाइड सीड्स… सरकार ने इसे माना और बिना हमारे विरोध के थोड़े ही माना. फिर जमीन अधिग्रहण बिल में सुधार की बात आई, हमनें विरोध किया तो वो ठंडे बस्ते में चला गया. फिर RCEP की बात आई, एअर इंडिया का विनिवेश विदेशी कंपनी को किया जा रहा था. हमने विरोध किया. फिर रिटेल ट्रेड में विदेशी निवेश का मसला था. सरकार ने इन सभी मुद्दों को गंभीरता से सुना है और इसका निराकरण भी किया है. कितने लोग हमारी वजह से निकाल दिए गए. अगर हमारी आवाज कमजोर हुई होती तो हमारे विचारों से प्रतिकूल व्यक्ति वहां पर आए फिर चले गए. हमारी वजह से ऐसे लोग निकाल दिए गए ऐसा नहीं है. 

    क्या जरूरत है सड़क पर आंदोलन करूं

      हम सरकार में बैठे लोगों से निवेदन करते हैं कि हम ऐसा समझते हैं हमारी बात मान लेनी चाहिए. अब अगर हमारी बात आप टेबल पर बैठकर मानते हो मुझे क्या जरूरत है कि मैं सड़क पर आकर आंदोलन करूं. वो मेरी बात मान रहे हैं ऐसा नहीं है कुल मिलाकर ये एक आर्थिक विचार है, जिस आर्थिक विचार से हम सब लोग आते हैं. अगर थोड़ा बहुत इधर-उधर होता है तो बैठकर बात कर लेते हैं.

      इस बीच पिछली मन की बात में पीएम मोदी ने स्वदेशी की विचारधारा को फिर पुश किया है. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में बहुत से त्योहारों की धूम होगी. इन त्योहारों में स्वदेशी की बात आपको कभी नहीं भूलनी है. उपहार वही जो भारत में बना हो, पहनावा वही जो भारत में बुना हो, सजावट वही जो भारत में बने सामान से हो. रोशनी वही जो भारत में बनी झालरों से हो. जीवन की हर जरूरत में सब कुछ स्वदेशी हो. गर्व से हमें स्वदेशी को लेकर आगे चलना है.

  • प्रधानमंत्री मोदी 17 सितंबर को MP में देंगे बड़ी रोजगार सौगात

    प्रधानमंत्री मोदी 17 सितंबर को MP में देंगे बड़ी रोजगार सौगात

    भोपाल
    धार जिले के बदनावर क्षेत्र स्थित भैंसोला गांव में स्थापित हो रहे देश के पहले पीएम मित्रा पार्क में अपनी इकाइयां लगाने के लिए टेक्सटाइल क्षेत्र की कंपनियां उत्साहित हैं। वर्धमान, ट्रांइडेट सहित 91 कंपनियों को 1,294 एकड़ भूमि आवंटित भी कर दी गई है। ये कंपनियां 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक निवेश करेंगी, जिससे 72 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। पार्क में निवेश करने के लिए 114 कंपनियों के प्रस्ताव अभी तक प्राप्त हुए हैं।

    लाखों परिवारों के जीवन में आने वाला है ठोस बदलाव
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश की बड़ी टेक्सटाइल कंपनियां पीएम मित्रा पार्क में अपनी इकाइयां लगाना चाहती हैं। सरकार निवेशकों को हर तरह की सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध है। पार्क के पूर्ण विकसित होने पर रोजगार का आंकड़ा तीन लाख तक पहुंचने का अनुमान है। यह केवल संख्या नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के जीवन में आने वाला ठोस बदलाव है।
     
    अभी तक 23 हजार करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव कंपनियां दे चुकी हैं। इन प्राप्त निवेशों से यार्न, फैब्रिक और गारमेंट उत्पादन की संपूर्ण वैल्यू चेन यहीं विकसित होगी, जिससे प्रदेश का टेक्सटाइल उद्योग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेगा। यहां कुल 2158 एकड़ भूमि है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 17 सितंबर को भूमिपूजन करने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।

    किसान मेले किए जाएंगे आयोजित
    मुख्यमंत्री ने कृषि और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को बैठक में निर्देश दिए कि कृषि आधारित उद्योगों के प्रचार-प्रसार के लिए कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग बहुउद्देशीय कृषि मेले आयोजित करें। इनमें किसानों को उनकी फसल सहित अन्य सहायक उत्पादों के विक्रय एवं मार्केटिंग की जानकारियां भी जाएं।

    पीएम मित्रा पार्क से प्रदेश के कपास और रेशम उत्पादक किसानों की जीवन रेखा बदल जाएगी। छह लाख से अधिक कपास उत्पादक किसानों को लाभ मिलेगा। कपास की खपत स्थानीय स्तर पर ही हो जाएगी। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा और कच्चे माल की सप्लाई की एक पूरी चैन तैयार होगी। 

  • PM नरेंद्र मोदी पहली बार बागेश्वर धाम जाएंगे, कैंसर अस्पताल का करेंगे शिलान्यास

    PM नरेंद्र मोदी पहली बार बागेश्वर धाम जाएंगे, कैंसर अस्पताल का करेंगे शिलान्यास

    छतरपुर

    मध्य प्रदेश के साथ ही पूरे बुंदलेखंड के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है। बागेश्वर धाम के पास एक बड़ा कैंसर अस्पताल बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह 23 फरवरी को इसका शिलान्यास करेंगे। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आज इस बारे में जानकारी देते हुए इसे भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी बताया है। हालांकि, अभी प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई।

    बाबा बागेश्वर ने सोमवार को बागेश्वर धाम के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ‘एक्स’ एक वीडियो शेयर कर कहा कि इस बार महाशिवरात्रि का पावन पर्व बहुत भव्य और दिव्य होने वाला है। इस वीडियो के माध्यम से आज हम आप सबको एक बहुत बड़ी खुशखबरी देना चाह रहे हैं। यह बहुत प्रसन्नता का विषय है और हां, हर हाल में पहुंचना जरूर है क्योंकि अपने पावन तीर्थ बागेश्वर धाम में बुंदेलखंड की लगभग 17 जिलों की हृदयस्थली में विराजमान बागेश्वर बालाजी के स्थान पर एक नया इतिहास रचने जा रहा है। वो अनूठा इतिहास यह है कि 23 फरवरी को भूमि पूजन है कैंसर हॉस्पिटल का। इस कैंसर हॉस्पिटल के भूमि पूजन में पता है कौन आने जा रहा है। हमारे भारत के वर्तमान समय में सबसे ज्यादा लोकप्रिय जिन्होंने भारत को पूरी दुनिया में एक ऐसी स्थिति में पहुंचाया है, जहां पूरा विश्व भारत को आशा और अपेक्षा के साथ देख रहा है।

    पहली बार किसी मंदिर परिसर में बनेगा भव्य अस्पताल

    बाबा बागेश्वर ने कहा "अभी तक हॉस्पिटल में मंदिर बना सुना होगा लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है जहां मंदिर में हॉस्पिटल बन रहा है. बागेश्वर धाम में बनने वाले कैंसर अस्पताल का निर्माण 4 चरणों में पूर्ण किया जाएगा, जिसका काम 23 फरवरी से शुरू होगा. पहला चरण 3 साल में पूरा होगा, जिसकी लागत लगभग 200 करोड़ है. 100 बेड के इस अस्पताल के लिए 25 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है और अस्पताल का नाम बालाजी सरकार कैंसर इंस्टीट्यूट रखा जाएगा."

    कैंसर हॉस्पिटल का ये है पूरा प्लान

    बता दें कि बागेश्वर धाम के कैंसर अस्पताल में जर्मनी और इंग्लैंड के डॉक्टर भी सेवाएं देंगे और गरीब मरीजों का इलाज नि:शुल्क किया जाएगा. अस्पताल बनाने के लिए फंड की व्यवस्था कथा से मिलने वाली राशि और दानदाताओं के सहयोग से की जाएगी. अस्पताल में फूड कोर्ट, धर्मशाला, एक्जीबिशन कॉम्पलेक्स, फार्मेसी एवं शॉपिंग कॉम्पलेक्स, यज्ञशाला आदि बनाए जाएंगे. वहीं मरीजों के लिए एंबुलेटरी केयर एरिया, जनरल वार्ड, पैथालॉजी, सीटी स्कैन, एमआरआई, रेडियोथैरेपी एण्ड कीमोथरैपी, ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू की व्यवस्था होगी. अस्पताल का संचालन बागेश्वर धाम ट्रस्ट समिति करेगी.

    बागेश्वर धाम में सामूहिक कन्या विवाह समारोह

    वहीं, पीएम मोदी के दौरे के मद्देनजर जिला प्रशासन भी हाई अलर्ट पर है. तैयारी के लिए बागेश्वर धाम में हुई बैठक में 97 ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक मौजूद रहे. बता दें कि बागेश्वर धाम में 20 फरवरी से 26 फरवरी तक कन्या विवाह महा महोत्सव आयोजित हो रहा है. 251 कन्याओं का विवाह होगा.

    उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत, विश्वामित्र का भारत विश्वमित्र की भूमिका निभा रहा है। इसी विश्वमित्र की भूमिका में विश्वमित्र बंधुत्व के कार्य का निर्वहन करने वाले भारत के लोकप्रिय प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी 23 फरवरी को बागेश्वर धाम पर आ रहे हैं। हम सब भव्य-दिव्य तैयारी करें। गांव-गांव में आमंत्रण भेजो, सब जगह भईया हमारा निमंत्रण पहुंचाओ। 22 तारीख को रात में हर हाल में यहां आ जाना है। 23 तारीख को हम सब मिलकर राम-राम करेंगे और कैंसर हॉस्पिटल के भूमि पूजन के साथ नया इतिहास लिखेंगे। 

    बालाजी सरकार कैंसर इंस्टीट्यूट होगा नाम
    बागेश्वर धाम में बनने वाले अस्पताल का नाम 'बालाजी सरकार कैंसर इंस्टीट्यूट' रखा जाएगा। इस मौके पर बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भारत विश्वामित्र का भारत है, जो चीन, रूस और यूक्रेन का भी मित्र है। भले ही इन देशों के बीच आपसी संवाद न हो, लेकिन भारत विश्व मित्र की भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री देश को एक नई दिशा दे रहे हैं और यह खुशी की बात है कि वे भूमिपूजन कार्यक्रम में बागेश्वर धाम पधार रहे हैं। हम प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और बागेश्वर धाम के सहयोगियों के साथ बेहतर व्यवस्थाएं बनाने में जुटे हैं।

    25 एकड़ में तीन साल में बनेगा अस्पताल
    कैंसर अस्पताल का निर्माण चार चरणों में पूरा किया जाएगा। 200 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 100 बिस्तर वाले अस्पताल के लिए 25 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है। यह अस्पताल तीन साल में बनकर तैयार होगा। अस्पताल के निर्माण में होने वाला खर्च कथा से मिलने वाली राशि और दानदाताओं के सहयोग से जुटाया जाएगा। यहां जर्मनी और इंग्लैंड के डॉक्टर भी सेवाएं देंगे।

    मुफ्त होगा गरीबों का इलाज
    अस्पताल में गरीब मरीजों का इलाज नि:शुल्क किया जाएगा। अस्पताल में फूड कोर्ट, धर्मशाला, एक्जीबिशन कॉम्पलेक्स, फार्मेसी और शॉपिंग कॉम्पलेक्स, यज्ञशाला आदि सुविधाएं बनाई जाएंगी। मरीजों के लिए एंबुलेटरी केयर एरिया, जनरल वार्ड, पैथोलॉजी, सीटी स्कैन, एमआरआई, रेडियोथैरेपी और कीमोथैरेपी, ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू की व्यवस्था भी होगी। अस्पताल का संचालन बागेश्वर धाम ट्रस्ट समिति करेगी। बता दें कि देश राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू भी बागेश्वर धाम आएंगी। वे यहां होने वाले सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव में शामिल होंगी।

  • विकसित भारत युवा सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी कर रहे युवाओं से संवाद

    विकसित भारत युवा सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी कर रहे युवाओं से संवाद

    नई दिल्ली।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को भारत मंडपम पहुंचे। यहां उन्होंने ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ में प्रतिभागियों के साथ मुलाकात की। कार्यक्रम बिना किसी राजनीतिक संबंध वाले एक लाख युवाओं को राजनीति में लाने के उनके प्रयासों के तहत आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम स्वामी विवेकानंद की जयंती के मौके पर होने वाले राष्ट्रीय युवा दिवस पर आयोजित किया जा रहा है।

    कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी युवाओं से 2047 के विकसित भारत के रोड मैप पर उनके विचारों को जानने की कोशिश कर रहे हैं। भारत मंडपम में आयोजित राष्ट्रीय युवा महोत्सव में प्रधानमंत्री युवाओं के साथ महिला सशक्तिकरण, विकसित भारत, डिजिटल भारत, खेलों में श्रेष्ठता जैसे 10 विषयों पर प्रेजेंटेशन भी देखेंगे। कार्यक्रम में देश निर्माण के 10 विषयों पर 2047 में विकसित भारत के लिए उनके विजन को सम्मिलित किया गया है। इसे युवाओं की राजनीति की पाठशाला कहा जा सकता है।
    इसके माध्यम से सरकार का जोर युवा नेता बनाना है, जो देश के विकास के विजन को प्रमुखता देते हुए राजनीति में आगे बढ़े  इस युवा महोत्सव को युवा के लिए युवाओं द्वारा युवा संकल्प के साथ पेश किया गया है।  यह केवल एक आयोजन नहीं बल्कि अभियान है, युवाओं को सशक्त करने, उनकी नेतृत्व क्षमता व्यावहारिक विचार जो कि विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप है। युवाओं को महोत्सव में उनकी योग्यता के अनुरूप प्रमाणपत्र दिया जाएगा। इस बार राष्ट्रीय युवा महोत्सव सांस्कृतिक आदान-प्रदान और युवा ऊर्जा का प्रतीक रहा है, देश निर्माण और विकास के विजन में भी सम्मिलित हो रहा है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि वे विकसित भारत के निर्माण के उद्देश्य से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं से उनकी मुलाकात होगी, उनमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, संस्कृति और अन्य चीजों के प्रति काफी जुनून है। बयान में कहा गया है कि आयोजन का उद्देश्य राष्ट्रीय युवा महोत्सव को पारंपरिक तरीके से आयोजित करने की 25 साल पुरानी परंपरा को तोड़ना है। यह बिना किसी राजनीतिक संबद्धता वाले एक लाख युवाओं को राजनीति में शामिल करने और उन्हें विकसित भारत के विचारों को वास्तविकता के धरातल पर उतारने के संबंध में हैं। इससे पहले, विकसित भारत युवा नेता संवाद के दूसरे दिन विभिन्न क्षेत्रों की दिग्गज हस्तियों ने भारत मंडपम में जुटे युवाओं को बताया कि टेक्नोलॉजी आज की महती जरूरत है। इसलिए उन्हें इसमें खुद को लगातार अपग्रेड करना होगा। विकसित भारत के रोडमैप पर चर्चा के दौरान युवाओं से भारत को स्टार्टअप राजधानी बनाने का आह्वान भी किया गया।

  • प्रधानमंत्री ने स्वामित्व योजना के जरिए ग्रामीण क्षेत्र के संपत्ति मालिकों को संपत्ति का स्वामित्व दिलाया : शिवराज सिंह चौहान

    प्रधानमंत्री ने स्वामित्व योजना के जरिए ग्रामीण क्षेत्र के संपत्ति मालिकों को संपत्ति का स्वामित्व दिलाया : शिवराज सिंह चौहान

    भोपाल
    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामित्व योजना के जरिए ग्रामीण क्षेत्र के संपत्ति मालिकों को संपत्ति का स्वामित्व दिलाया है। गुरुवार को राजस्थान के जोधपुर पहुंचे केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि गांव में लोगों के पास अपनी संपत्ति तो होती थी, मकान भी होता था, मकान के आसपास जमीन भी होती थी। लेकिन, इसका स्वामित्व उनके पास कागज पर या ऑन रिकॉर्ड नहीं होता था। इसी कारण उस संपत्ति का अन्य उपयोग नहीं हो सकता था। जैसे बैंक से लोन लेने के लिए इस संपत्ति का उपयोग नहीं हो सकता था। कई बार बिना नक्शा अथवा स्वामित्व के विवाद भी बहुत होते थे।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस कठिनाई को समझा और स्वामित्व योजना बनाई। उस योजना के अंतर्गत जो संपत्ति मकान के रूप में गांव में है, उसके नक्शे बनाए जा रहे हैं, ड्रोन के माध्यम से आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए उस संपत्ति का स्वामित्व दिया जा रहा है। कई राज्यों में यह काम तेजी से हो रहा है।

    उन्होंने किसानों के लिए केंद्र सरकार के कार्यों का ब्योरा देते हुए कहा कि खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने और किसानों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में छह सूत्री रणनीति बनाई गई है। इसका लक्ष्य उत्पादन बढ़ाना, उत्पादन की लागत घटाना, उत्पादन के ठीक दाम देना, कृषि का विविधीकरण करना, परंपरागत खेती के अलावा फूलों, फलों, सब्जियों, औषधि की खेती को बढ़ावा देना, नुकसान हो तो उसकी भरपाई करना है। इसके साथ ही जैविक तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की कोशिश करना भी शामिल है।

    केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा किसानों को अच्छे बीज मिलें, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए आईसीआर काम कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसी साल 109 नए बीजों की किस्में जारी की है। पानी का बेहतर इंतजाम हो, इसके लिए नदी जोड़ो योजना बनाई गई है। इसके लिए मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच समझौता हुआ है।