Tag: Public Participation

  • मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय साइबर जागृति अभियान एवं ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 के अभिनंदन समारोह में हुए शामिल

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय साइबर जागृति अभियान एवं ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 के अभिनंदन समारोह में हुए शामिल

    रायपुर

      डिजिटल युग में साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आए हैं और इनसे सुरक्षित रहने का सबसे प्रभावी माध्यम जागरूकता, सतर्कता और जनभागीदारी है। साइबर सुरक्षा केवल शासन और पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। हमें साइबर जागरूकता को जनआंदोलन का स्वरूप देना होगा, तभी हम साइबर ठगी और डिजिटल अपराधों से सुरक्षित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार कर सकेंगे। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा आयोजित ‘साइबर जागृति अभियान एवं ट्रैफिक हैकाथॉन-2026’ के अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। 
     
    डिजिटल क्रांति ने जीवन आसान बनाया, अब साइबर सुरक्षा के प्रति सजगता जरूरी

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया ने देश में अभूतपूर्व परिवर्तन किया है। वर्ष 2014 में जब प्रधानमंत्री  मोदी ने डिजिटल इंडिया की परिकल्पना प्रस्तुत की थी, उस समय इतने विशाल देश और बड़ी ग्रामीण आबादी के बीच डिजिटल अर्थव्यवस्था की सफलता को लेकर अनेक आशंकाएं व्यक्त की जाती थीं। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। गांव का सामान्य नागरिक भी मोबाइल फोन के माध्यम से डिजिटल भुगतान कर रहा है और तकनीक के जरिए देश-दुनिया से जुड़ा हुआ है।

    उन्होंने कहा कि डिजिटल सुविधाओं के विस्तार ने जहां नागरिकों के जीवन को आसान बनाया है, वहीं साइबर ठगी और डिजिटल अपराधों की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। अपराधी नई-नई तकनीकों और तरीकों का उपयोग कर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। कई बार तकनीकी रूप से जानकार व्यक्ति भी इनके जाल में फंस जाते हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक को साइबर अपराध के तौर-तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।

    सात सप्ताह के अभियान से 1.70 करोड़ लोगों तक पहुंचा साइबर सुरक्षा का संदेश

    मुख्यमंत्री  साय ने छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चलाए गए सात सप्ताह के विशेष साइबर जागृति अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इस अभियान ने साइबर सुरक्षा के संदेश को शहरों से लेकर गांवों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।

    उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान प्रत्येक सप्ताह अलग-अलग विषयों को केंद्र में रखकर अभिनव गतिविधियां आयोजित की गईं। विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, विद्यालयों, ग्राम पंचायतों, हाट-बाजारों और सार्वजनिक स्थलों तक पहुंचकर नागरिकों को जागरूक किया गया। अभियान के दौरान 5 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, 5 लाख से अधिक सेल्फी के माध्यम से नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की गई और लगभग 1 करोड़ 70 लाख लोगों तक साइबर अपराधों से बचाव का संदेश पहुंचाया गया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी यह दर्शाती है कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार और नागरिक से जुड़ा विषय बन चुका है।

    अभियान का समापन नहीं, यह एक नई शुरुआत है : मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि साइबर जागृति अभियान को किसी निश्चित अवधि तक सीमित नहीं रखा जा सकता। सात सप्ताह का यह अभियान समाप्त जरूर हुआ है, लेकिन साइबर जागरूकता की यह यात्रा आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

    उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना है। इसके लिए पुलिस और प्रशासन के साथ सामाजिक संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, युवाओं और आम नागरिकों को भी सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। विशेष रूप से युवाओं को साइबर जागरूकता के संवाहक के रूप में आगे आकर अपने परिवार और समाज को सुरक्षित बनाने में योगदान देना चाहिए।

    रायपुर की यातायात व्यवस्था सुधारने युवाओं के अभिनव सुझावों पर होगा गंभीरता से विचार

    मुख्यमंत्री  साय ने ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 की सराहना करते हुए कहा कि राजधानी रायपुर का तेजी से विस्तार हो रहा है। बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के साथ यातायात प्रबंधन की चुनौतियां भी बढ़ी हैं।  सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और यातायात को अधिक सुरक्षित एवं सुगम बनाने के लिए तकनीक, नवाचार और जनभागीदारी का बेहतर समन्वय आवश्यक है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रैफिक हैकाथॉन के माध्यम से विद्यार्थियों, युवाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थाओं ने राजधानी की यातायात समस्याओं का अध्ययन कर व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए हैं। सरकार इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगी तथा जो समाधान उपयोगी और व्यवहारिक होंगे, उन्हें लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

    दूरस्थ क्षेत्रों को परिवहन से जोड़ रही मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा

    मुख्यमंत्री  साय ने प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा विकास की बुनियादी आवश्यकता है। सार्वजनिक परिवहन के साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण पहले ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

    उन्होंने कहा कि इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा प्रारंभ की गई है। विशेष रूप से वर्षों तक नक्सलवाद से प्रभावित रहे बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों में बस सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। ऐसे मार्गों पर 100 से अधिक बसों का संचालन किया जा रहा है, जहां आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं होने के कारण पहले बस सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने लाभ-हानि से ऊपर उठकर जनहित को प्राथमिकता दी है और इन मार्गों पर बस संचालन से होने वाली आर्थिक क्षति की भरपाई की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के साथ बस में यात्रा के दौरान उन्होंने स्वयं देखा है कि यह सेवा किस तरह लोगों के जीवन में सुविधा और खुशियां लेकर आई है।

    डिजिटल लेनदेन में भारत की अग्रणी भूमिका, सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण : उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा

    उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि आज दुनिया में होने वाले डिजिटल लेनदेन का लगभग 50 प्रतिशत भारत में हो रहा है। यह प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया अभियान की बड़ी उपलब्धि है। डिजिटल लेनदेन ने लोगों के जीवन को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराधों से सुरक्षा की चुनौती भी बढ़ी है।

    उन्होंने कहा कि नागरिकों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ पुलिस ने साइबर जागृति अभियान के माध्यम से अभिनव पहल की है। अभियान के दौरान पुलिस ने धार्मिक आयोजनों, चौक-चौराहों, ग्राम सभाओं, ग्राम पंचायतों, विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और विद्यालयों तक पहुंचकर लोगों को ऑनलाइन ठगी तथा साइबर अपराधों से बचाव के तरीके बताए।

     शर्मा ने कहा कि पुलिस केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर अपराधियों के पूरे नेटवर्क के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई भी कर रही है। साइबर ठगी में उपयोग होने वाले म्यूल खाते खोलने में संलिप्त बैंककर्मियों से लेकर फर्जी सिम उपलब्ध कराने वालों तक कार्रवाई की गई है। इन प्रयासों से साइबर अपराधों से संबंधित एफआईआर में कमी आई है और ठगी गई राशि की रिकवरी की दर में भी वृद्धि हुई है।

    उन्होंने कहा कि यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए केवल पुलिस और प्रशासन के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। समस्याओं का स्थायी समाधान जनभागीदारी और नवाचार से ही संभव है। इसी सोच के साथ ट्रैफिक हैकाथॉन आयोजित किया गया, जिसमें युवाओं ने अनेक उपयोगी और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए हैं।

    सात विषयों के माध्यम से गांव-शहर तक पहुंची साइबर जागरूकता

    छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक संचालित साइबर जागृति अभियान में प्रदेश की 34 पुलिस इकाइयों के समन्वय से सात विषय आधारित सप्ताहों में जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं।

    अभियान में डिजिटल सुरक्षा, वित्तीय धोखाधड़ी एवं यूपीआई सुरक्षा, डिजिटल अरेस्ट, महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा, रोजगार संबंधी ठगी, डेटा गोपनीयता और सामूहिक संकल्प जैसे विषयों पर विशेष रूप से नागरिकों को जागरूक किया गया।

    विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, हाट-बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित कार्यक्रमों में नागरिकों को ओटीपी और पासवर्ड किसी से साझा नहीं करने, संदिग्ध लिंक से बचने, फर्जी निवेश योजनाओं से सावधान रहने तथा डिजिटल अरेस्ट जैसे नए साइबर अपराधों को पहचानने के तरीके बताए गए।

    अभियान में युवाओं को ‘साइबर प्रहरी’ के रूप में जोड़कर उनके माध्यम से परिवार और समाज तक जागरूकता पहुंचाने की पहल की गई। नागरिकों को साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के लिए भी प्रेरित किया गया।

    सोशल मीडिया पर 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज

    साइबर जागृति अभियान में सोशल मीडिया का भी व्यापक उपयोग किया गया। फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब और व्हाट्सऐप के माध्यम से साइबर सुरक्षा से संबंधित संदेश और जागरूकता सामग्री प्रसारित की गई।

    भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के सहयोग से अभियान के दौरान 3,100 से अधिक सोशल मीडिया पोस्ट साझा की गईं, जिन्हें 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज प्राप्त हुए। आई4सी ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अभियान से जुड़ी कई पोस्ट साझा कर इसकी पहुंच को और व्यापक बनाया।

    जिलों के नवाचारों ने साइबर जागरूकता को जनभागीदारी से जोड़ा

    अभियान के दौरान विभिन्न जिलों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अनेक अभिनव प्रयोग किए। मुंगेली जिले में विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से लगभग 15 हजार ग्रामीणों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। गरियाबंद जिले में मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्व-सहायता समूहों की लगभग 493 महिलाओं को साइबर सुरक्षा की जानकारी देकर उनके माध्यम से परिवारों तक जागरूकता पहुंचाई गई।

    दुर्ग जिले में ‘सुरक्षित दुर्ग, साइबर जागरूक दुर्ग’ अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटकों और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से 15 हजार से अधिक नागरिकों को जागरूक किया। रायपुर जिले में आयोजित साइबर जागरूकता लघु फिल्म प्रतियोगिता में 11 राज्यों के 35 जिलों से 162 फिल्में प्राप्त हुईं। इन फिल्मों के माध्यम से लगभग दो लाख लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचने का अनुमान है।

    जांजगीर-चांपा जिले में ‘एक राखी साइबर जागृति के नाम’ अभियान के माध्यम से लगभग 1 लाख 61 हजार नागरिकों तक जागरूकता पहुंचाई गई। वहीं बिलासपुर जिले में आकाशवाणी के माध्यम से संचालित विशेष फोन-इन कार्यक्रम से लगभग आठ लाख श्रोताओं तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचा। समारोह में इन अभिनव प्रयासों के लिए संबंधित जिलों को सम्मानित किया गया।

    ट्रैफिक हैकाथॉन में युवाओं ने दिए भविष्य की यातायात व्यवस्था के समाधान

    ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 के ओवरऑल विजेता  कार्तिकेय पंत ने रायपुर के शंकर नगर टर्निंग पॉइंट की यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए ‘टैक्टिकल अर्बनिज्म’ की अवधारणा पर आधारित मॉडल प्रस्तुत किया।

    उन्होंने उपलब्ध सड़क क्षेत्र के बेहतर उपयोग, स्पष्ट लेन मार्किंग, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित स्थान, स्ट्रीट वेंडरों और ऑटोरिक्शा चालकों के लिए व्यवस्थित स्थान निर्धारण तथा यातायात प्रवाह को बेहतर बनाने से जुड़े सुझाव प्रस्तुत किए।

    हैकाथॉन के प्रतिभागियों ने टाटीबंध चौक, तेलीबांधा मरीन ड्राइव, आमापारा चौक, लोधीपारा चौक और शंकर नगर सहित राजधानी के प्रमुख यातायात दबाव वाले क्षेत्रों का अध्ययन कर पार्किंग प्रबंधन, सुरक्षित पैदल मार्ग, सार्वजनिक परिवहन के एकीकरण, लेन मार्किंग तथा यातायात जाम कम करने से संबंधित समाधान प्रस्तुत किए।

    एआई और इंटरनेट ऑफ थिंग्स से स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन के सुझाव

    युवाओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन के लिए भी अभिनव सुझाव प्रस्तुत किए। ‘रायपुर नेत्र’ और ‘दृष्टि’ जैसी प्रस्तावित परियोजनाओं में सीसीटीवी कैमरों और एआई तकनीक के माध्यम से यातायात नियमों के उल्लंघन की पहचान, ट्रैफिक जाम की पूर्व सूचना तथा एम्बुलेंस और अग्निशमन वाहनों के लिए ग्रीन कॉरिडोर तैयार करने जैसी परिकल्पनाएं शामिल रहीं।

    ट्रैफिक हैकाथॉन के सफल आयोजन में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर और द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के छत्तीसगढ़ स्टेट सेंटर ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के प्रस्तावों का दो चरणों में परीक्षण कर उनकी तकनीकी व्यवहार्यता, उपयोगिता और क्रियान्वयन की संभावनाओं का मूल्यांकन किया। आयोजन में शिवाशा फाउंडेशन का भी सहयोग रहा।

    विधायक  राजेश मूणत ने कहा कि राजधानी रायपुर की यातायात व्यवस्था को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को बेहतर समन्वय के साथ कार्य करना होगा। यातायात से जुड़ी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक योजना के साथ व्यावहारिक कदम उठाना आवश्यक है।

    इस अवसर पर छत्तीसगढ़ रजककार बोर्ड के अध्यक्ष  प्रह्लाद रजक, विधायक  राजेश मूणत, रायपुर नगर निगम की महापौर मती मीनल चौबे, पुलिस महानिदेशक  अरुण गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  अमित कुमार सहित जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

  • एक विचार और कार्यशैली की यात्रा गुजरात से विकसित भारत तक—संकल्प, निर्णय और जनभागीदारी

    एक विचार और कार्यशैली की यात्रा गुजरात से विकसित भारत तक—संकल्प, निर्णय और जनभागीदारी

    नरेंद्र मोदी के सरकार के शीर्ष नेतृत्व में 25 वर्ष केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि एक विकसित होती शासन-दृष्टि और कार्यशैली का परिचय हैं। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुई यह यात्रा आज विकसित भारत 2047 के संकल्प तक पहुँच चुकी है।

    गुजरात में जल संकट, सूखा और क्षेत्रीय असमानताओं जैसी चुनौतियों के बीच जल-संरक्षण, सिंचाई, कृषि, बिजली और बुनियादी ढाँचे को प्राथमिकता दी गई। SWAGAT जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से तकनीक, निगरानी और जवाबदेही को प्रशासन का हिस्सा बनाया गया।

    प्रधानमंत्री बनने के बाद यही सोच राष्ट्रीय स्तर पर जनधन, उज्ज्वला, स्वच्छ भारत, आवास, आयुष्मान भारत और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं में दिखाई दी। लक्ष्य रहा कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और नागरिक के जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो।

    डिजिटल इंडिया, UPI और DBT ने तकनीक को शासन का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया, वहीं Make in India और आत्मनिर्भर भारत ने भारत को वैश्विक विनिर्माण और नवाचार का केंद्र बनाने की दिशा में प्रयासों को गति दी।

    GST, अनुच्छेद 370 से संबंधित संवैधानिक परिवर्तन, नई शिक्षा नीति और महिला आरक्षण जैसे निर्णयों ने राष्ट्रीय नीति-विमर्श को प्रभावित किया। इन पर समर्थन और आलोचना दोनों हुए, लेकिन कठिन विषयों पर निर्णय लेने की प्रवृत्ति मोदी की कार्यशैली की प्रमुख पहचान बनी।

    अब लक्ष्य विकसित भारत 2047 है—एक ऐसा भारत जो आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिला भागीदारी, कृषि, तकनीक और नवाचार में भी सक्षम हो।

    25 वर्ष पीछे देखने का अवसर हैं, लेकिन 2047 आगे देखने का संकल्प है। नेतृत्व दिशा दे सकता है, लेकिन विकसित भारत का निर्माण जनता की सामूहिक भागीदारी से ही होगा।

    संकल्प से सिद्धि तक की यात्रा जारी है।

  • जीपीएम के पर्यटन विकास मॉडल की सराहना, स्थानीय जनसहभागिता और प्राकृतिक धरोहरों को बताया पर्यटन संवर्धन की सशक्त आधारशिला

    जीपीएम के पर्यटन विकास मॉडल की सराहना, स्थानीय जनसहभागिता और प्राकृतिक धरोहरों को बताया पर्यटन संवर्धन की सशक्त आधारशिला

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक  विवेक आचार्य एवं अध्यक्ष  नीलू शर्मा ने  गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के प्रवास के दौरान जिले की पर्यटन संभावनाओं का अवलोकन किया। इस अवसर पर उनका आत्मीय स्वागत किया गया तथा जिले की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत को समेटे जीपीएम पर्यटन कॉफी टेबल बुक भेंट कर जिले की पर्यटन उपलब्धियों और संभावनाओं से अवगत कराया गया।
    भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने जिले में पर्यटन संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों के विकास, पर्यटकों के लिए विकसित की गई सुविधाओं तथा स्थानीय समुदाय की सहभागिता पर आधारित पर्यटन मॉडल की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। अधिकारियों ने बताया कि जिले के पर्यटन स्थलों को स्थानीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका से जोड़कर विकसित किया जा रहा है, जिससे पर्यटन को नई दिशा मिल रही है।

    प्रबंध संचालक  विवेक आचार्य एवं अध्यक्ष  नीलू शर्मा ने जीपीएम जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल राजमेरगढ़  का  भ्रमण किया।

     उन्होंने पर्यटन समितियों द्वारा संचालित गतिविधियों, पर्यटकों के लिए उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं, स्वच्छता व्यवस्था, प्राकृतिक सौंदर्य के संरक्षण तथा स्थानीय स्तर पर किए जा रहे नवाचारों का अवलोकन किया। इस दौरान स्थानीय पर्यटन समितियों के प्रतिनिधियों ने बताया कि जनसहभागिता के माध्यम से पर्यटन को रोजगार, स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक विकास का प्रभावी माध्यम बनाया जा रहा है।

    भ्रमण के दौरान पर्यटन समितियों ने स्थानीय युवाओं की भागीदारी, पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन स्थलों के सुव्यवस्थित प्रबंधन, आगंतुकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा स्थानीय संस्कृति के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी साझा की। अधिकारियों ने इन पहलों की सराहना करते हुए कहा कि पर्यटन के विकास में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है और ऐसे प्रयास अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायी हैं।

    प्रबंध संचालक  विवेक आचार्य ने कहा कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध है। यहां पर्यटन विकास की व्यापक संभावनाएं हैं, जिन्हें स्थानीय लोगों की सक्रिय सहभागिता के माध्यम से प्रभावी रूप से विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता आधारित पर्यटन मॉडल न केवल पर्यटकों को बेहतर अनुभव प्रदान करता है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित करता है।

    उन्होंने जिले में पर्यटन संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि पर्यटन समितियां जिस समर्पण और जिम्मेदारी के साथ कार्य कर रही हैं, वह सराहनीय है। उन्होंने समितियों से भविष्य में भी गुणवत्तापूर्ण, पर्यटक-अनुकूल, स्वच्छ, सुरक्षित एवं जनसहभागिता आधारित गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने का आह्वान किया, ताकि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही राज्य के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में अपनी अलग पहचान स्थापित कर सके।
    इस अवसर पर पर्यटन विभाग एवं जिला प्रशासन के अधिकारी, पर्यटन समितियों के प्रतिनिधि तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

  • जनजातीय गांवों तक पहुंचेगी योजनाओं की सुविधा 18 से 25 मई तक चलेगा “जन भागीदारी–सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान

    जनजातीय गांवों तक पहुंचेगी योजनाओं की सुविधा 18 से 25 मई तक चलेगा “जन भागीदारी–सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान

    रायपुर

     छत्तीसगढ़ शासन के आदिम जाति विकास विभाग द्वारा जनजातीय क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 18 से 25 मई 2026 तक “जन भागीदारी–सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (PM-JANMAN) के 1544 तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान  के 6691 गांवों में संचालित होगा।

    मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर से जारी आदेश के अनुसार रायपुर को छोड़कर प्रदेश के सभी जिलों में अभियान के तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, पोषण और पेयजल जैसी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया जाएगा। अधिकारी गांवों में पहुंचकर जन सुनवाई करेंगे तथा “आदि सेवा केन्द्रों” में शिकायतों का निराकरण किया जाएगा।

    अभियान में सिकल सेल और टीबी जांच के लिए स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। डिजिटल मॉनिटरिंग के तहत प्रतिदिन फोटो, वीडियो और लाभार्थियों के बयान “आदि प्रसारण” पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे।

    शासन ने जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों, एनएसएस, एनसीसी और स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अभियान का समन्वय “सुशासन तिहार” और “जनजातीय गरिमा उत्सव” से भी किया जाएगा।