बलूचिस्तान में हमलों से CPEC प्रोजेक्ट फंसा, चीन ने कर रखे हैं अरबों के निवेश

बीजिंग/इस्लामाबाद
 बलूचों की आजादी की जंग ने पाकिस्तान में हड़कंप मचा दिया है। पाकिस्तान को समझ नहीं आ रहा है कि बलूचिस्तान को कैसे कंट्रोल में रखा जाए। अगर हालात बिगड़ते हैं तो ना सिर्फ पाकिस्तान टूट जाएगा, बल्कि चीन ने अरबों डॉलर का जो निवेश कर रखे हैं, वो भी डूब जाएंगे। दूसरी तरफ पिछले हफ्ते जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक करने के बाद बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने बलूचिस्तान में एक बार फिर से पाकिस्तान की सेना पर भीषण हमला किया है। BLA ने पाकिस्तान जवानों को ले जा रही एक बस को उड़ा दिया और दावा किया कि उसके हमले में कम से कम 90 जवान मारे गये हैं। यानि बलूचों ने पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ आजादी की जंग को काफी तेज कर दिया है, जिससे घबराए चीन ने पाकिस्तान को फौरन सैन्य सहायता देने की पेशकश की है।

रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने पाकिस्तान को आतंकवाद विरोधी अभियान में मदद करने के लिए सैन्य सहायता देने की पेशकश की है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने जाफर एक्सप्रेस हाईजैक को लेकर पूछे गये सवाल पर कह है कि "हमने रिपोर्टों पर गौर किया है और इस आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की है।" चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि "चीन पाकिस्तान के साथ आतंकवाद विरोधी और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने और संयुक्त रूप से क्षेत्र को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और स्थिर रखने के लिए तैयार है।"

बलूचों के आंदोलन से क्यों घबराया चीन?
आपको बता दें कि पिछले हफ्ते BLA के फ्रीडम फाइटर्स ने जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर लिया था, जिसमें 440 यात्री सवार थे। BLA ने 200 से ज्यादा पाकिस्तानी सेना के जवानों को मारने का दावा किया है। जबकि पाकिस्तान की सेना ने करीब 50 मौतों की बात कबूली है। जाफर एक्सप्रेस हाईजैक ने बीजिंग में तहलका मचा दिया है। वो अपने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की सुरक्षा को लेकर डर गया है। चीन को लग रहा है कि अरबों डॉलर के इस प्रोजेक्ट को बलूच फूंक देंगे। चीन ने 3,000 किलोमीटर लंबे CPEC में करोड़ों डॉलर का निवेश किया है। अनुमान है कि चीन ने बलूचिस्तान में अलग अलग प्रोजेक्ट्स के जरिए करीब 65 अरब डॉलर का निवेश किया है, जो बीजिंग के लिए मध्य पूर्व के बाजारों तक सस्ते और तेज मार्ग और दक्षिण एशिया में प्रभाव बनाने का रास्ता बनाता है। लेकिन अब चीन का ये प्रोजेक्ट फंस गया है और भारत को घेरने का प्लान फेल होता नजर आ रहा है।

बलूच विद्रोहियों की मांग ना सिर्फ पाकिस्तान से आजादी है, बल्कि वो चीनी प्रोजेक्ट का भी विरोध कर रहा हैं। बलूचों का कहना है की चीन उनकी संसाधनों को लूट रहा है। लिहाजा बलूच विद्रोही, बलूचिस्तान को चीन के शिनजियांग प्रांत से जोड़ने वाली सीपीईसी परियोजनाओं पर काम कर रहे चीनी कर्मियों पर भी कई हमले किए हैं। बलूचिस्तान संसाधन संपन्न इलाका है, जहां प्राकृतिक गैस, कोयला, तांबा और अन्य मूल्यवान खनिजों का भंडार है। पाकिस्तान और चीन मिलकर इन खनिजों को लूट रहे हैं और बलूचों को कुछ भी नहीं मिल रहा है। लिहाजा बलूचों ने अब बंदूक उठा लिए हैं।

बलूच नेशनल मूवमेंट के अध्यक्ष नसीम बलूच ने कहा है कि इस प्रोजेक्ट की वजह से बलूचों को काफी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि ग्वादर पोर्ट बनाने के लिए हजारों बलूचों को उनके घरों से विस्थापित कर दिया गया और उन्हें कहीं और बसाने के भी कोई इंतजाम नहीं किए गये। लिहाजा चीनी कर्मचारियों पर हमले हो रहे हैं। जिससे घबराए चीन ने पाकिस्तान पर अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जवानों को तैनात करने के लिए पाकिस्तान पर भारी दबाव बना रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान, चीन के प्रस्ताव को स्वीकार करने में हिचकिचा रहा है, क्योंकि उसे अपनी धरती पर चीनी सुरक्षाकर्मियों को अनुमति देने पर घरेलू राजनीतिक प्रतिक्रिया का डर है। लेकिन अब जबकि बलूचों के हमले खतरनाक स्तर तक पहुंच चुके हैं तो ऐसी आशंका है कि चीन अपने जवानों को बलूचिस्तान में तैनात कर सकता है।

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