क्षतिपूर्ति उपकर पर चर्चा होने की संभावना, GST काउंसिल की अगली बैठक में कर की दरों को तर्कसंगत बनाने

नई दिल्ली
जीएसटी परिषद अपनी अगली बैठक में कर की दरों को तर्कसंगत बनाने और क्षतिपूर्ति उपकर के भविष्य पर विचार कर सकती है। इसके साथ ही अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को सरल बनाने और मौजूदा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दर फ्रेमवर्क में विसंगतियों को दूर करने पर ध्यान दिया जा सकता है। नई दिल्ली में होने वाली बैठक जल्द ही बुलाए जाने की उम्मीद है, जिसमें राज्य भी अगले फिस्कल प्लानिंग साइकल से पहले अपने रेवेन्यू आउटलुक पर स्पष्टता के लिए दबाव डाल रहे हैं।
मिडिया सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों के राजस्व घाटे की भरपाई के लिए शुरू किए गए शुल्क, क्षतिपूर्ति उपकर का मुद्दा भी चर्चा में है, खासकर तब जब 2026 से आगे भी इसे जारी रखना बहस का विषय बन गया है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मार्च में कहा था कि जीएसटी दरों में और कमी की जाएगी क्योंकि कर स्लैब को तर्कसंगत बनाने की प्रक्रिया पूरी होने वाली है। जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के समय रेवेन्यू न्यूट्रल रेट (आरएनआर) 15.8 प्रतिशत थी, जो अब 2023 में घटकर 11.4 प्रतिशत हो गई है और इसमें और कमी आएगी। वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि जीएसटी स्लैब को सरल बनाने का काम लगभग पूरा हो चुका है और जीएसटी परिषद, जिसका नेतृत्व वित्त मंत्री करते हैं और जिसमें राज्य के वित्त मंत्री शामिल हैं, जल्द ही अंतिम निर्णय लेगी।

जीएसटी दरों और स्लैब में बदलाव का सुझाव देने के लिए सितंबर 2021 में मंत्री समूह (जीओएम) का गठन किया गया था। इस समिति में छह राज्यों के वित्त मंत्री शामिल हैं। यह समिति टैक्स सिस्टम को अधिक कुशल बनाने पर काम कर रही है।
रेशनलाइजेशन प्रक्रिया में कर स्लैब की संख्या कम करना, दरों को सुव्यवस्थित करना और विभिन्न उद्योगों की उठाई गई प्रमुख चिंताओं का समाधान करना शामिल है। केंद्रीय मंत्री ने आगे जोर दिया कि अगली जीएसटी परिषद की बैठक में प्रस्ताव पेश करने से पहले अंतिम समीक्षा चल रही है। अप्रैल में ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 2.36 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया, जो अप्रैल 2024 में 2.10 लाख करोड़ रुपए के ग्रॉस कलेक्शन से 12.6 प्रतिशत अधिक है। अप्रैल में रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और स्थिरता को दर्शाता है।

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