मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शीतलदास की बगिया में घाटों की सफाई की सफाई मित्रों को किया सम्मानित

जल बचायें, क्योंकि जल की हर बूंद में समाया है जीवन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शीतलदास की बगिया में घाटों की सफाई की
सफाई मित्रों को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान को जन आंदोलन बनाने का आह्वान

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार की सुबह भोपाल शहर स्थित शीतलदास की बगिया पहुंचे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत बड़े तालाब के घाटों की सफाई में सेवा कार्य (श्रमदान) किया और सफाई मित्रों का सम्मान किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां घाटों की सफाई की। मुख्यमंत्री ने सफाई नौका में बैठकर सफाई कर्मियों से चर्चा की और उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने नागरिकों से जल संरक्षण की दिशा में सक्रिय भागीदारी निभाने की आत्मीय अपील भी की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी नागरिकों से आव्हान किया कि हर संभव तरीके से जल बचाईये, क्योंकि जल की हर बूंद में जीवन है, अमृत है। इसकी हर बूंद में हमारा सुनहरा भविष्य समाया है। जल बचाना हमारी आज की जरूरत भी है और बेहतर कल के लिए जिम्मेदारी भी। आज जल बचेगा, तभी हमारा कल सुरक्षित होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संरक्षण के लिए सभी संभव उपाय किये जायें। जल बचाना सिर्फ सरकार की ही क्यूं, पूरे समाज, हर वर्ग, हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। आज जल सहजेंगे, तभी तो हमारा आने वाला कल संवरेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी जल स्रोतों के संरक्षण, पुनर्जीवन और सतत उपयोग के लिए लगातार योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है। जल गंगा संवर्धन अभियान इसी दिशा में एक ठोस कदम है, जिसके तहत पुरानी बावड़ियों, कुंओं, तालाबों, सरोवरों और अन्य परम्परागत जल स्रोतों का जीर्णोद्धार एवं पुनर्विकास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी अपने-अपने स्तर पर पानी बचाने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि जल है तो कल है, यह पुण्य भावना प्रदेश के हर नागरिक के मन में होनी ही चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सफाई मित्रों को "सफाई दूत" निरुपित करते हुए कहा कि स्वच्छता केवल एक औपचारिक अभियान नहीं, बल्कि हमारे जीवन की शैली का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। जहां स्वच्छता होती है, वहीं लक्ष्मी का वास होता है।

उन्होंने नागरिकों से कहा कि अपने घर, आस-पड़ोस और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे जल गंगा संवर्धन अभियान में सक्रिय सहभागिता दें और जल स्रोतों की स्वच्छता व संरक्षण को प्राथमिकता दें।

बड़ा बाग की पुरानी बावड़ी के जीर्णोद्धार कार्य का अवलोकन भी किया

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शीतलदास की बगिया से बड़ा बाग स्थित ऐतिहासिक पुरानी बावड़ी पहुंचें और वहां जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत नगर निगम भोपाल द्वारा कराए जा चल रहे जीर्णोद्धार कार्यों का अवलोकन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार "विरासत से विकास" की सोच के साथ आगे बढ़ रही है और पुरानी विरासतों के संरक्षण को प्राथमिकता दे रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने जल संरक्षण के लिए अद्भुत व्यवस्थाएं बनाई थीं। आज जरूरत है कि हम उन ऐतिहासिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन करें और उन्हें अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी संजोकर रखें। उन्होंने सभी नागरिकों से जल संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 'जल गंगा संवर्धन अभियान' में सबकी सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि बावड़ी का जीर्णोद्धार कार्य पूरी गुणवत्ता और समय-सीमा के साथ पूर्ण किए जाएं।

इस दौरान लोकसभा सांसद आलोक शर्मा, विधायक रामेश्वर शर्मा, विधायक भगवान दास सबनानी, महापौर श्रीमती मालती राय, नगर निगम सभापति किशन सूर्यवंशी, कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, नगर निगम आयुक्त, अन्य अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।

बड़े बाग की पुरानी बावड़ी

नगर निगम भोपाल के जोन क्रमांक 05 वार्ड क्रमांक 09 में स्थित जल संरचनाओं में बड़े बाग की बावड़ी का महत्वपूर्ण स्थान है। बावड़ी का निर्माण लगभग 200 वर्ष पूर्व किया गया था। बावड़ी तीन मंजिला है, इसकी दीवार सीढियों और मुंडेर से लेकर मेहराब तक बेल पत्तियां बनी है। नगर निगम आयुक्त ने बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत नगर निगम भोपाल द्वारा इस बावड़ी से प्लास्टिक वेस्ट, फ्लोटिंग पदार्थ एवं लगभग 40 क्यूबिक मीटर सिल्ट निकाली गयी। बावड़ी की दीवारों से नुकसानदेह खरपतवार को अलग किया गया, जिससे बावड़ी की आवक क्षमता 2000 लीटर प्रति घंटा हो गयी है। वर्तमान में इसके जल का उपयोग निस्तार कार्यों में हो रहा है। बावड़ी में दीवारों एवं सीढ़ियों की मरम्मत कर इनकी रंगाई-पुताई, पलेग स्टोन बिछाने एवं लोहे की जाली (फेब्रीकेशन) लगाने का कार्य भी किया गया है।

 

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