कामयाब बनने के लिए जरुरी है प्रोफेशनल नजरिया

नौकरी या खुद का काम करने वाले में से हर कोई प्रोफेशनल नजरिया नहीं डेवलप कर पाता। वास्तविक प्रोफेशनल वही है, जो बिना ईर्ष्या या द्वेष के अपने काम को एंज्वॉय करता है। दूसरों के काम पर ध्यान देने या उनसे चिढ़ने और उन पर टीका-टिप्पणी करने की बजाय वह खुद को इंप्रूव करने और आगे बढ़ाने पर ध्यान देता है। कैसे बनें एक कामयाब प्रोफेशनल, बता रहे हैं हम…

समित सिंह एक नामी संस्थान में पिछले करीब एक दशक से काम कर रहे हैं। इस दौरान उन्हें सिर्फ एक प्रमोशन मिला। समित को लगता है कि वह तो संस्थान के प्रति समर्पित होकर काम करते हैं, लेकिन उन्हें इसका कोई खास रिजल्ट नहीं मिला जितना मिलना चाहिए था। इस बीच उनके कुछ सहयोगियों को कई प्रमोशन मिल चुके थे। जिम्मेदार स्तर तक पहुंच चुके उन सहयोगियों की तरफ से उन्हें जब भी कोई निर्देश आता, तब उन्हें काफी अखरता। वह इसे जाहिर नहीं होने देते, लेकिन मौका देखकर उन सहयोगियों के कदमों पर सवालिया निशान लगाने से भी नहीं चूकते। हालांकि यह भी सच है कि उनके अनुभव को देखते हुए वरिष्ठ सहयोगी उनके साथ बेहद विनम्रता से पेश आते थे। दरअसल, पूर्वाग्रहयुक्त सोच के कारण ही उनका नजरिया अलग है।

दूसरा उदाहरण अंकिता का है। उन्हें एक बार लंबे अवकाश पर जाना पड़ा। उस समय उनके पास रूटीन के कार्यों के अलावा एक महत्वपूर्ण स्थायी काम भी था। जब वह अवकाश से लौटीं, तो पाया कि उनका वह काम किसी और सहयोगी को दे दिया गया है। उन्हें लगा कि शायद उस सहयोगी ने बॉस की चापलूसी और उनकी शिकायत करके वह काम हासिल किया है। पूर्वाग्रहयुक्त एकतरफा धारणा के कारण वह यह सोच ही नहीं सकीं कि हो सकता है कि इस निर्णय के पीछे विभाग के सभी सदस्यों को उस काम में कुशल बनाने का हो। कुछ दिन तो पीठ पीछे वह इस निर्णय को लेकर टीका-टिप्पणी करती रहीं, लेकिन धीरे-धीरे जब उनकी सोच पॉजिटिव हुई तब उन्हें लगा कि पहले उन्होंने गलत समझा था। और यह भी कि मन में किसी काम या किसी अन्य की बात को लेकर दुखी होने से बेहतर है अपने निर्धारित काम में अपना बेस्ट देना। आज वह खुश हैं और हर काम को प्रोफेशनल व परफेक्ट तरीके से पूरा करने के कारण सबकी प्रिय भी हैं।

न करें ना-नुकर
आप कहीं भी काम करते हों, हमेशा और सालों-साल एक ही तरीके से काम करते नहीं रह सकते। अगर आप इससे बाहर नहीं निकलते, तो इस कंफर्ट जोन में रहना आगे चलकर आपके लिए ही नुकसानदायक हो सकता है। बदलते वक्त के साथ काम-काज और उसे करने के तरीके में भी बदलाव आता है। ऐसे में आप भी बदलाव को स्वीकार करने में ना-नुकर न करें। अगर आप उसे नहीं करेंगे, तो संस्थान की जरूरत को देखते हुए उसे किसी और से पूरा कराया ही जाएगा। पर इससे आपकी छवि जरूर खराब होगी।

बचें रिएक्ट करने से
सालों तक एक ही तरह का काम करते रहने से अक्सर हम एक जैसी और सुविधापूर्ण स्थिति में आ जाते हैं। इस रूटीन में जब कभी कोई बाधा आती है या उससे हटकर कोई और जिम्मेदारी दी जाती है, हम असहज महसूस करने लगते हैं। रिएक्शनरी होकर हम यह तक सोचने लगते हैं कि बॉस या कोई अन्य सहयोगी हमारे खिलाफ साजिश कर रहा है या फिर जान-बूझकर आपको डिस्टर्ब करने की कोशिश की जा रही है। एक सच्चा प्रोफेशनल वही है, जो किसी भी बदलाव या नये काम को चुनौती के रूप में लेते हुए खुद को उसमें साबित करता है। इससे उसके कॉन्फिडेंस में भी इजाफा होता है।

स्वीकार करें चुनौतियां
किसी भी नये काम या बदलाव को चुनौती के रूप में लें। तरक्की की सीढ़ियां चढ़ना चाहते हैं, तो खुद भी रूटीन के रस्मी कामों से बाहर निकलते हुए बदलते वक्त के मुताबिक नये कामों की डिमांड करें। कभी भी घबराएं नहीं। मन-मस्तिष्क को हमेशा शांत रखने का प्रयास करें। किसी के कार्य, आचरण, शिकायत आदि पर न तो क्रोधित हों और न ही अप्रत्याशित प्रतिक्रिया व्यक्त करें। अपने काम और कौशल से सीनियर्स और मैनेजमेंट का दिल जीतें।

काम से रखें काम
एक कामयाब प्रोफेशनल बनना चाहते हैं, तो अपना ध्यान हमेशा काम पर फोकस करें। दूसरों के काम में ताक-झांक या उनके बारे में शिकायत करने से पूरी तरह से परहेज करें। आपसे कोई किसी की शिकायत कर रहा हो, तो उसे विनम्रतापूर्वक मना कर दें। इससे वह आगे कभी ऐसा नहीं करेगा।

समस्या नहीं, सॉल्यूशन
कुछ लोग हर काम में समस्या ही समस्या देखते हैं। काम पूरा न होने पर जब उनसे पूछा जाता है, तो वे कारण के रूप में कई समस्याएं गिना देते हैं। अगर आप दूरदर्शिता और सही दिशा में सोचने वाले स्किल्ड प्रोफेशनल हैं, तो आपको समस्या सामने आने पर उसका समाधान भी सोच लेना चाहिए। कोई भी बॉस समस्याएं सुनना पसंद नहीं करता। ऐसे में अगर आप यह कहेंगे कि इस काम में यह समस्या तो थी, लेकिन आपने इस तरीके से इसे सॉल्व करने के बारे सोच लिया है, तभी सीनियर्स आपसे खुश होंगे। दरअसल, वह उसी को पसंद करते हैं जो उनके पास सॉल्यूशन लेकर जाता है।

-ऑफिस में दूसरों के बारे में बात करने या उनके काम में ताक-झांक करने की बजाय एकाग्रता के साथ अपने काम पर फोकस करें।

-न तो किसी के बारे में शिकायतें करें और न ही खुद दूसरों की शिकायतें सुनें। ऐसा करने वालों को विनम्रता से मना कर दें।

-बदलते वक्त के साथ बदलाव और नये काम सीखने-करने लिए हमेशा खुद को तैयार रखें।

-चुनौतियों से घबराएं नहीं। दिल-दिमाग को शांत रखें। समस्याओं पर सिर खपाने की बजाय उनका सॉल्यूशन तलाशें।

 

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