साकेत गोखले लक्ष्मी पुरी से मांगेंगे माफी, लेकिन 50 लाख चुकाने के आदेश को देंगे चुनौती, 8 जुलाई को होगी सुनवाई

नई दिल्ली
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता और राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें पूर्व राजनयिक लक्ष्मी पुरी को कथित मानहानि के लिए 50 लाख रुपये का हर्जाना अदा करने और माफीनामा प्रकाशित करने का निर्देश दिया गया था। यह आदेश हाईकोर्ट की सिंगल जज की बेंच ने दिया था।

साकेत गोखले ने हाल ही में आए उस आदेश को भी चुनौती दी है, जिसमें उन्हें लक्ष्मी पुरी से दो सप्ताह के भीतर अखबार में सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा गया है। हालांकि, शुक्रवार को हुई सुनवाई में गोखले ने अदालत को सूचित किया कि वह सिंगल-जज के निर्देशानुसार माफी प्रकाशित करेंगे। इसके बाद, न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रेनू भटनागर की पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 जुलाई की तारीख तय की है।

गोखले की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित सिब्बल ने दलील दी कि ट्विटर पर की गई टिप्पणियां ‘न्यायसंगत’ और ‘लोकतांत्रिक आलोचना’ के तहत आती हैं। उन्होंने कहा, "मैंने ट्वीट्स में प्रतिवादी का नाम तक नहीं लिया और न ही किसी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। बिना साक्ष्य के डिक्री पारित कर दी गई।" सिब्बल ने कोर्ट से अनुरोध किया कि वह बिना पूर्वाग्रह के और अपील के नतीजों के अधीन माफी प्रकाशित करने को तैयार हैं। हालांकि अदालत ने इसे आदेश में रिकॉर्ड करने से इंकार कर दिया। न्यायमूर्ति चावला ने कहा, "यह आदेश 2 मई का है, आपने अवकाश के ठीक पहले अदालत का रुख किया है।"

जब अदालत ने हर्जाने के आदेश पर रोक लगाने का संकेत दिया, तब लक्ष्मी पुरी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने मौखिक रूप से कहा कि वह इस समय हर्जाने पर जोर नहीं देंगे, लेकिन माफी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि "उन्हें माफी मांगनी ही होगी।" इस पर गोखले ने कहा कि वह न्यायालय के निर्देशानुसार बिना शर्त माफी प्रकाशित करेंगे। सिब्बल ने कहा, "मीलार्ड्स हर्जाने पर रोक लगा सकते हैं, मैं बिना शर्त माफी प्रकाशित करूंगा।" अदालत ने इसके बाद कहा, "मिस्टर मनिंदर सिंह, माफी तो हो ही जाए। जहां तक हर्जाने की बात है, आप उस पर जोर न दें।"

क्या है मामला?
पिछले साल दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि साकेत गोखले के ट्वीट्स मानहानिपूर्ण थे और उन्हें लक्ष्मी पुरी को 50 लाख रुपये का हर्जाना देने तथा मिडिया और अपने X अकाउंट पर माफी प्रकाशित करने का आदेश दिया गया था। लक्ष्मी पुरी, जो कि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की पत्नी हैं, उन्होंने गोखले पर स्विट्जरलैंड में उनके द्वारा कथित तौर पर आय से अधिक संपत्ति खरीदने का आरोप लगाने पर मानहानि का केस दायर किया था। पुरी का कहना था कि गोखले ने जानबूझकर और झूठे तथ्यों के आधार पर यह दावा किया कि उनकी आय सिर्फ 10-12 लाख रुपये हो सकती थी, क्योंकि वह संयुक्त राष्ट्र (UNCTAD) में भारत सरकार से प्रतिनियुक्ति पर थीं। 1 जुलाई 2024 को न्यायमूर्ति अनूप जयराम भांभानी ने दिए अपने विस्तृत आदेश में कहा था कि गोखले के आरोप "गलत, झूठे और असत्य" हैं। अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि सोशल मीडिया संदेशों से "सोशल मीडिया चैन रिएक्शन" शुरू हो जाती है, जो कि आज के दौर में एक अनियंत्रित परमाणु प्रतिक्रिया जितनी ही खतरनाक हो सकती है। कोर्ट ने यह भी माना कि गोखले का लक्ष्य लक्ष्मी पुरी की वित्तीय स्थिति नहीं बल्कि उनके पति हरदीप पुरी के केंद्रीय मंत्री होने के कारण राजनीतिक हित साधना था।

अदालत की अवमानना और कार्यवाही
लक्ष्मी पुरी ने बाद में दो अलग-अलग याचिकाओं के जरिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया- एक हर्जाना आदेश को लागू कराने के लिए और दूसरी गोखले द्वारा माफी न मांगने पर अवमानना याचिका दायर की। पुरी की अवमानना याचिका की सुनवाई में एक पीठ ने हाल ही में गोखले का वह प्रस्ताव खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने माफी को सीलबंद लिफाफे में देने की बात की थी। अदालत ने उन्हें दो सप्ताह के भीतर अखबार में सार्वजनिक माफी प्रकाशित करने का निर्देश दिया।
गोखले को ‘सिविल हिरासत’ में भेजने की धमकी दी

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को साकेत गोखले को उस न्यायिक आदेशों का ‘जानबूझकर’ पालन नहीं करने के लिए ‘सिविल हिरासत’ में रखने की धमकी दी, जिसमें उन्हें मानहानि के एक मामले में पूर्व राजनयिक लक्ष्मी मुर्देश्वर पुरी से माफी मांगने का निर्देश दिया गया था। उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि गोखले ‘‘अदालत और उसकी विचार प्रक्रिया का मजाक उड़ा रहे हैं।’’ न्यायमूर्ति मनमीत पीएस अरोड़ा ने मौखिक रूप से कहा, ‘‘मैं आपको नोटिस दे रहा हूं। यदि आप माफीनामा प्रकाशित नहीं करते हैं, तो हम आपको ‘सिविल हिरासत’ में रखेंगे।’’ न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मेरे अनुसार, उन्हें जेल जाना होगा।’’ ‘सिविल हिरासत’ से दंडित व्यक्तियों को जेल में रखा जाता है, लेकिन विचाराधीन कैदियों से अलग। वर्ष 2024 के फैसले का पालन नहीं करने पर पुरी ने गोखले के खिलाफ मानहानि ​​याचिका दायर की।

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