सोनी सब के कलाकारों ने गुरुओं के प्रति दिल से कृतज्ञता व्यक्त की

मुंबई,

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सोनी सब के कलाकारों ने जीवन के अनमोल सबक देने वाले अपने गुरुओं के प्रति दिल से कृतज्ञता व्यक्त की। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सोनी सब के कलाकार सुमित राघवन, आशी सिंह, कृष्णा भारद्वाज और आरव चौधरी ने अपने जीवन के गुरुओं के प्रति आभार व्यक्त किया है।

‘वागले की दुनिया: नई पीढ़ी, नए किस्से’ में राजेश वागले का किरदार निभा रहे सुमित राघवन ने कहा, “मेरे लिए ‘गुरु’ शब्द सुनते ही सबसे पहले मेरे पिताजी का चेहरा सामने आता है। वह मेरे पहले शिक्षक, सबसे बड़े आलोचक और सबसे मजबूत सहारा रहे हैं। उन्होंने कभी उपदेश नहीं दिए,बल्कि उन मूल्यों को जीकर दिखाया। जीवन को गरिमा, ईमानदारी और नैतिकता के साथ जीते हुए देखना मेरे लिए सबसे बड़ी सीख रही। उनका हमेशा मानना था कि चाहे आप कितनी भी दूर क्यों न चले जाएं, सबसे ज़्यादा मायने यह रखता है कि आप कितने ज़मीनी बने रहते हैं और दूसरों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। एक अभिनेता के तौर पर, मैंने अक्सर उनके शब्दों से ताकत पाई है- 'अपना सर्वश्रेष्ठ दो, और काम को बोलने दो।' गुरु पूर्णिमा उन लोगों को सम्मानित करने के बारे में है जो हमें आकार देते हैं, और मेरे लिए, यह उन्हीं से शुरू और खत्म होता है। जो कुछ भी आज मैं हूं, एक इंसान और कलाकार के रूप में, वह सब उन्हीं की वजह से है।”

‘उफ़्फ़… ये लव है मुश्किल’ में कैरी का किरदा निभा रहीं आशी सिंह ने कहा, “मेरे लिए मेरी माँ ही मेरी गुरु हैं। वह मेरी सबसे बड़ी समर्थक भी हैं और सबसे कड़ी आलोचक भी। उन्हीं की वजह से मैं बेखौफ़ सपने देखती हूं और हर स्थिति में आत्मविश्वास से आगे बढ़ती हूं। इस इंडस्ट्री में मुझे कुछ वरिष्ठ कलाकारों के साथ काम करने का सौभाग्य मिला है जिन्होंने सिखाया कि सफलता का कोई मूल्य नहीं अगर उसमें विनम्रता न हो। ऐसे ही एक व्यक्ति हैं शब्बीर सर, जिनका उफ्फ़…ये लव है मुश्किल के सेट पर अनुशासन और समर्पण बहुत प्रेरणादायक रहा है। उन्हें काम करते देखना अपने आप में एक सबक है। इस गुरु पूर्णिमा पर मैं उन सभी आत्माओं का धन्यवाद करना चाहती हूं जिन्होंने मुझे बेहतर बनने के लिए प्रेरित किया।”

‘वीर हनुमान’ में केसरी की भूमिका निभा रहे आरव चौधरी ने कहा, “मेरे पहले और सबसे अहम गुरु हमेशा मेरे माता-पिता रहे हैं। उन्होंने मुझे अनुशासन, ईमानदारी और जमीन से जुड़े रहने का मूल्य सिखाया—ऐसी बातें जो कोई किताब नहीं सिखा सकती। बचपन से ही मैंने बजरंग बली को अपना आध्यात्मिक गुरु माना है। 7वीं कक्षा से ही मेरे कुछ स्कूल टीचर्स ने मेरी बुनियादी सोच को आकार दिया। जब मैंने जयपुर में थिएटर करना शुरू किया, तो मेरे थिएटर गुरुओं ने मुझे एक अभिनेता के रूप में विकसित होने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई। मुंबई आने के बाद, मुझे इंडस्ट्री के अविश्वसनीय लोगों और प्रसिद्ध सिनेमैटोग्राफर, निर्माता, निर्देशकों से सीखने का सौभाग्य मिला। उनमें से प्रत्येक ने अपने तरीके से मेरी यात्रा में योगदान दिया है। आज भी, मेरा मानना है कि सीखना कभी बंद नहीं होता। इस गुरु पूर्णिमा पर, मैं अपने सभी गुरुओं को धन्यवाद देता हूँ जिन्होंने मुझे जीवन भर मार्गदर्शन और प्रेरणा दी है।”

‘तेनाली रामा’ में तेनाली रामा का किरदार निभा रहे कृष्णा भारद्वाज ने कहा, “मैं सच में मानता हूं कि हर व्यक्ति जिससे आप जीवन में मिलते हैं, वह किसी न किसी रूप में आपका गुरु होता है। चाहे वो कुछ पल के लिए मिले हों या जीवनभर साथ रहे।हर कोई कुछ न कुछ सिखा ही जाता है। एक अभिनेता के रूप में मैंने हर तबके के लोगों से कुछ सीखा है ।निर्देशक, सह-कलाकार, स्पॉट दादा, मेकअप आर्टिस्ट , हर एक से कुछ न कुछ मिला है। गुरु पूर्णिमा मेरे लिए सिर्फ बड़े गुरुओं का नहीं, बल्कि उन अनकहे, रोज़मर्रा के शिक्षकों का भी सम्मान है। मैं जीवन का विद्यार्थी बने रहना चाहता हूं, क्योंकि जिस दिन आप सीखना बंद कर देते हैं, उसी दिन आप आगे बढ़ना भी छोड़ देते हैं।”

 

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