सड़कों की गुणवत्ता पर सरकार सख्त, ठोस प्रयास जारी : लोक निर्माण मंत्री सिंह

सड़कों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए ठोस प्रयास : लोक निर्माण मंत्री सिंह

भोपाल 

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने विभागीय कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु उठाए जा रहे प्रभावी कदमों की जानकारी देते हुए कहा कि “लोक निर्माण से लोक कल्याण” की अवधारणा को मूर्त रूप देने के लिए विभाग तकनीकी नवाचार, पारदर्शी निरीक्षण प्रणाली और सख्त गुणवत्ता मानकों को अपनाते हुए कार्य कर रहा है।

मंत्री सिंह ने कहा कि इंदौर के पोलोग्राउंड क्षेत्र में निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) का कार्य पूर्णतः स्वीकृत तकनीकी डिज़ाइन और मानकों के अनुरूप प्रगति पर है। यह ओवरब्रिज रेलवे और लोक निर्माण विभाग द्वारा संयुक्त सर्वेक्षण और डिज़ाइन प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया गया है। वर्तमान में निर्माणाधीन इस आरओबी की लंबाई 1027.60 मीटर और चौड़ाई 12.00 मीटर निर्धारित की गई है। इसका डिज़ाइन तीन दिशाओं में यातायात सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। पोलोग्राउंड, लक्ष्मीबाई स्टेशन और भागीरथपुरा की ओर जाने वाली तीन भुजाएँ इसमें सम्मिलित हैं।

मंत्री सिंह ने बताया कि ओवरब्रिज में कुल पाँच टर्न (वक्र) हैं, जिनका निर्माण भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जा रहा है। आईआरसी मानकों के अनुसार कर्व का न्यूनतम रेडियस 15 मीटर होता है, जबकि इस आरओबी के सभी टर्न का रेडियस लगभग 20 मीटर है, जिससे यह डिज़ाइन और संरचनात्मक दृष्टि से पूरी तरह संतुलित और सुरक्षित है। निर्माण कार्य के सभी आयाम — जैसे कि रेडियस ऑफ कर्वेचर, डिज़ाइन स्पीड और सुपर एलीवेशन — को मानकों के अनुरूप सुनिश्चित किया गया है। यह आरओबी इंदौर शहर के तीन प्रमुख क्षेत्रों को यातायात की निर्बाधता और सुविधा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। निर्माण स्थल की स्थिति और डिज़ाइन ड्रॉइंग का तुलनात्मक अवलोकन इस बात की पुष्टि करता है कि कार्य स्वीकृत तकनीकी योजनाओं के अनुसार ही किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्यों को पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ पूरा कर रहा है।

मंत्री सिंह ने कहा कि गड्ढे रहित सड़कें संधारण विभाग की प्राथमिकता हैं, परंतु अत्यधिक वर्षा और ट्रैफिक लोड के कारण कभी-कभी सड़कों की क्षति होती है। इनके सुधार कार्य के लिये विभाग तकनीकी प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार कर रहा है, जिससे अभियंता नवाचारों और आधुनिक तकनीकों से अपडेट रह सकें। लोकपथ मोबाईल ऐप पर प्राप्त होने वाली शिकायतों के निराकरण हेतु 7 दिवस की समय-सीमा को कम करने पर भी विचार किया जा रहा है। मानसून के दौरान सड्कों की मरम्मत के लिये आधुनिक मशीनों से पेच रिपेयर की व्यवस्था प्रारंभ की गई है। उन्होने बताया कि अभी हाल ही मे 8 से 10 जून के बीच विभाग के 1500 से अधिक इंजीनियरों को एक अभियान के रूप में सड्कों के निरीक्षण के लिये भेजा गया था और 20 जून तक सभी मरम्मत कार्य पूर्ण करने के लिये निर्देशित किया गया था।

मंत्री सिंह ने यह कहा कि सड़कों की एक उम्र होती है, यदि इससे पहले सड़क खराब होती है तो यह जाँच का विषय है और दोषियों पर कार्यवाही होगी। कई मामलों में सडकों पर यातायात दवाब और वाहनों के बोझ पर भी क्षति का होना निर्भर करता है।

मंत्री सिंह ने बताया कि प्रदेश की सभी 13 मण्डल स्तरीय प्रयोगशालाओं को अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित कर दिया गया है, जिससे निर्माण सामग्री की जांच अब और अधिक सटीक और प्रभावी हो सकेगी। प्रत्येक जिले में मोबाइल प्रयोगशालाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रथम चरण में 13 मण्डलों के लिए निविदा जारी कर दी गई है, जिससे निर्माण स्थलों पर त्वरित जांच और सुधार की प्रक्रिया सुनिश्चित हो सकेगी। उन्होंने बताया कि गुणवत्ता नियंत्रण को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए तेलंगाना और गुजरात की तर्ज पर एक स्वतंत्र गुणवत्ता नियंत्रण इकाई की स्थापना कर दी गई है, जो केवल गुणवत्ता निगरानी के लिए समर्पित होगी। सड़क निर्माण में प्रयुक्त डामर की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भी एक नई व्यवस्था लागू की है, जिसके अंतर्गत डामर केवल सार्वजनिक उपक्रम रिफाइनरियों – इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम से ही खरीदा जाएगा। इसके परिवहन हेतु जीपीएस आधारित ई-लॉकिंग सिस्टम से युक्त टैंकरों का उपयोग किया जाएगा, जिन्हें निर्माण स्थल पर केवल विभागीय अभियंता ओटीपी के माध्यम से खोल सकेंगे।

औचक निरीक्षण की पारदर्शी और तकनीकी प्रणाली के बारे में जानकारी देते हुए मंत्री सिंह ने बताया कि विभाग ने एक सॉफ्टवेयर आधारित प्रणाली विकसित की है, जिसमें निरीक्षण स्थल, दल और सैंपल का चयन पूरी तरह रैंडम तरीके से होता है। संग्रहीत सैंपल को गोपनीय कोड के साथ प्रयोगशालाओं में भेजा जाता है और रिपोर्ट सीधे सॉफ्टवेयर पर अपलोड की जाती है। इसके बाद अगले ही दिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा कर आवश्यक होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक माह की 5 और 20 तारीख को नियमित रूप से यह औचक निरीक्षण किया जा रहा है। विगत 5 माह में 70 चरणों में 348 निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया गया है, जिनमें गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर 21 ठेकेदारों, 14 अधिकारियों और 4 कंसल्टेंट्स पर कार्यवाही की गई है।

मंत्री सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा विकसित ‘लोकपथ ऐप’ की सफलता इसकी जनभागीदारी और पारदर्शी शिकायत निवारण प्रणाली का प्रमाण है। ऐप पर प्राप्त शिकायतों की मॉनिटरिंग और श्रेणीकरण प्रणाली को और अधिक सटीक और जिम्मेदार बनाया जा रहा है, जिससे वास्तविक शिकायतों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर गुणवत्ता में कमी पर सख्त कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर उत्कृष्ट कार्य करने वाले ठेकेदारों और अभियंताओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया जा रहा है, जिससे विभाग में गुणवत्तापूर्ण कार्य हेतु सकारात्मक प्रतिस्पर्धा का वातावरण तैयार हो रहा है।

मंत्री सिंह ने कहा कि पर्यावरण-संरक्षण की दिशा में विभाग द्वारा ‘लोक कल्याण सरोवर’ और रिचार्ज बोर जैसी योजनाएं प्रारंभ की गई हैं। सड़क निर्माण से निकलने वाली मिट्टी से 500 स्थायी जल स्रोतों का निर्माण अंतिम चरण में है, जिन्हें जियो टैग और सूचना पटल के माध्यम से चिन्हित किया जाएगा। इनकी निगरानी भी रैंडम निरीक्षण प्रणाली से की जाएगी। मंत्री सिंह ने कहा, “लोक निर्माण विभाग केवल सड़क और भवन नहीं बनाता, बल्कि प्रदेश की प्रगति और जन-कल्याण की नींव रखता है। गुणवत्ता नियंत्रण के यह ठोस प्रयास मध्यप्रदेश के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे।”

 

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