एपी सिंह कहा -जब विधानसभा की बैठकें नहीं होती, तब समितियां विधायिका का काम करती

भोपाल 

मप्र विधानसभा में सात राज्यों की समिति की पहली बैठक हुई। इस बैठक में मप्र के विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, यूपी के स्पीकर सतीश महाना, राजस्थान के स्पीकर वासुदेव देवनानी, हिमाचल प्रदेश के स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया।

पीएस बोले: जब विधानसभा नहीं चलती तब समितियां विधायिका का काम करती हैं मप्र विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ने बैठक के बारे में जानकारी देते हुए बताया- जब विधानसभा की बैठकें नहीं हो रही होती हैं तब विधानसभा की समितियां विधायिका का काम करती हैं। ये समितियां विधायी, वित्तीय और प्रशासनिक क्षेत्र में विधायिका के कार्यपालिका पर नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

पीएस एपी सिंह ने कहा- समिति प्रणाली को और प्रभावी बनाने के लिए हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में हुए अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के शताब्दी वर्ष सम्मेलन में एक संकल्प पारित कर विधायी एवं वित्तीय नियंत्रण की जिम्मेवारी में समितियों के महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए समिति प्रणाली तंत्र पर पुर्नविचार के लिए पीठीसीन अधिकारियों की समिति का गठन की अपेक्षा की गई थी। लोकसभा अध्यक्ष और हमारे प्रदेश के स्पीकर की अध्यक्षता में यह समिति बनाई गई है। इसकी पहली बैठक आज बुलाई गई है।

लोकसभा में समितियों के पास जाता है बजट बैठक में नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा- हमारे देश की लोकतांत्रिक प्रणाली में संसद और विधानसभाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। संसद का सत्र हो या विधानसभाओं के सत्र हों उन सत्रों में जितनी सूक्ष्म निगरानी की जरूरत होती है वह करना संभव नहीं होता। इसलिए हमारे पूर्वजों ने समितियों के गठन की प्रणाली को शुरु किया। लोकसभा की समितियों में तो बजट पर भी विचार-विमर्श होता है। जब बजट सत्र होता है तो बीच में छुट्‌टी करके सारा बजट समितियों के पास जाता है समितियां ही उस पर अध्ययन कर सुझाव देती हैं। उसके बाद वह बजट परिमार्जित होकर लोकसभा में आता है और फिर पारित किया जाता है। ठीक इसी प्रकार से विधानसभाओं में भी समितियों की प्रणाली है।

समितियां निरीक्षण और भ्रमण करतीं हैं नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा- हमारे मप्र में चार वित्तीय समितियां हैं जिनका निर्वाचन होता है। इसके अलावा अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के लिए दो समितियां हैं जिनका निर्वाचन होता है। बाकी 15-16 समितियां हैं जिनमें पक्ष-विपक्ष मिलकर अध्यक्ष की ओर से नाम निर्देशित किए जाते हैं। वो समितियां भ्रमण करतीं हैं अध्ययन, निरीक्षण करतीं हैं जरूरत पड़ने पर शासन को बुलाकर विमर्श करतीं हैं। जिसमें और काम करने की जरूरत है या विधानसभा के निर्देश या सदन में दिए गए आश्वासन, अपूर्ण उत्तर, या मंत्रालयों के जनोपयोगी विषयों पर काम करती हैं।

आबादी और तकनीक के उपयोग के साथ काम भी बढ़ रहा है तोमर ने कहा- समय समय पर जैसे-जैसे देश की आबादी बढ़ रही है टेक्नोलॉजी का उपयोग बढ़ रहा है उसी प्रकार संसद और विधानसभाओं में काम भी बढ़ रहा है। उस काम की समीक्षा हो सके, काम में दक्षता आ सके इसलिए समिति प्रणाली को और ज्यादा दक्ष और प्रभावी बनाने के लिए पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश में हुई पीठासीन अधिकारियों की बैठक में छोटे ग्रुप बनाने की बात आई थी। ये छोटे ग्रुप बने हैं और वो समय-समय पर अपने यहां की बेस्ट प्रेक्टिस एक दूसरे से साझा करें। सदस्य क्या महसूस करते हैं काम करते वक्त आने वाली कठनाईयों पर चर्चा करें तो आने वाले समय में उनका निराकरण हो सकेगा।

समितियों की अनुशंसाओं का पालन भी गंभीरता से होना चाहिए विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने कहा-एक बात चलती है समितियों को और काम करने की स्वायत्तता मिलनी चाहिए। कामकाज सबके सामने आना चाहिए। समितियों की अनुशंसाओं का समय सीमा में पालन होना चाहिए। ऐसे कई प्रकार के विषय आते हैं तो समिति काम करती है तो अनुशंसा का पालन भी उतनी गंभीरता से होना चाहिए। इसमें कहीं न कोई कमी होती है तो हमारी कोशिश होनी चाहिए कि इन बैठकों के माध्यम से हम राज्य और केन्द्र सरकार के ध्यान में ये बातें लाएं। आज की प्रारंभिक बैठक के बाद ये बैठकें निरंतर होती रहेंगी।

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