मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा – ‘सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य सुशासन का अहम संदेश देता है

सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन का संदेश देता है महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री मोदी राज्यों में परस्पर सहयोग को बढ़ाने का कर रहे हैं महत्वपूर्ण कार्य
सुशासन से गढ़ा जा रहा है नया इतिहास
सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य प्रतिभाओं का मंच, युवा पीढ़ी को सार्थक संदेश
बाबा विश्वनाथ और बाबा महाकाल की धरा को जोड़ा है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने : उ.प्र. मुख्यमंत्री योगी
वाराणसी में मध्यप्रदेश सरकार का तीन दिवसीय अनूठा आयोजन

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सुशासन की उत्कृष्ट परंपरा के नायक सम्राट विक्रमादित्य के जीवन काल से हम सब परिचित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कर्मस्थली काशी में इस महानाट्य के मंचन के अवसर पर यह कहना प्रासंगिक होगा कि प्रधानमंत्री मोदी के सुशासन से राष्ट्र को दिए जा रहे योगदान के लिए अभिनंदन के पात्र हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी (काशी) में शुक्रवार को तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के मंचन पर संबोधित कर रहे थे। समारोह का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज बदलते दौर में 2 राज्यों के मध्य सांस्कृतिक संबंध को प्रगाढ़ करने के लिए यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण है। दोनों राज्य विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के आशीर्वाद से दोनों राज्यों को अंतर्राज्यीय केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की सौगात मिली है। यह दोनों राज्यों में सिंचाई, कृषि उत्पादन और पेयजल प्रदाय में सहयोग करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। यह प्रधानमंत्री मोदी का सुशासन भी है, जिसके अंतर्गत राज्यों के बीच परस्पर सहयोग को बढ़ाने की दिशा में कार्य हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सुशासन के इस काल में सम्राट विक्रमादित्य के शासन काल में स्थापित सुशासन का स्मरण आना स्वभाविक है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्र के स्वाभिमान के सम्राट विक्रमादित्य के राष्ट्र प्रेम, पराक्रम, न्यायप्रियता, प्रजा वात्सल्य और ज्ञान विज्ञान परम्परा की पुनर्स्थापना के गुणों की जानकारी युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए महानाट्य माध्यम बन रहा है। सम्राट विक्रमादित्य के युग का पुनर्स्मरण करने के लिए महानाट्य का मंचन किया जा रहा है। सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का पहले नई दिल्ली में भी मंचन हुआ है। इस नाटक में अनेक इंजीनियर, डॉक्टर, वकील और अन्य व्यवसायों से जुड़े प्रतिभाशाली व्यक्ति विभिन्न पात्रों के रूप में मंच पर भूमिका निभाते हैं। इससे प्रतिभाओं को तो मंच मिल ही रहा है, एक कुशल शासक के योगदान से देश के नागरिक भी परिचित हो रहे हैं। इस तरह यह महानाट्य लोकरंजन के साथ भारत के गौरवशाली इतिहास को भी आज जीवंत करने में माध्यम बना है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत में भाइयों की तीन जोड़ियां प्रसिद्ध हुई हैं। इनमें भगवान श्रीराम और लक्ष्मण, भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के साथ सम्राट विक्रमादित्य और राजा भतृहरि की जोडी शामिल है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने एक करोड़ एक लाख रुपए का सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्रारंभ किया है। एक राष्ट्रीय सम्मान 21 लाख रुपए राशि का और तीन राज्य स्तरीय सम्मान 5-5 लाख रुपए राशि के स्थापित किए गए हैं। वर्ष 2024 में हुए विक्रमोत्सव को सर्वाधिक अवधि वाली धार्मिक- आध्यात्मिक फैस्टिवल का महाद्वीप स्तरीय वॉव अवार्ड भी मिला है। यही नहीं प्रतिष्ठित ईमैक्स ग्लोबल अवार्ड भी विक्रमोत्सव को प्राप्त हुआ है।

विक्रमादित्य महानाट्य मंचन यादगार क्षण : उ.प्र. मुख्यमंत्री योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विक्रमादित्य महानाट्य मंचन को यादगार क्षण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के "एक भारत-श्रेष्ठ भारत'' के भाव को साकार करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा विश्वनाथ की इस धरा को बाबा महाकाल की धरा से नाट्य मंचन के माध्यम से जोड़ने का विशिष्ट कार्य किया है। योगी ने भाइयों की जोड़ी का जिक्र करते हुए कहा कि सम्राट विक्रमादित्य और राजा भरथरी की जोड़ी का उल्लेख है। महाराजा ने नाथ संप्रदाय में दीक्षा लेकर काशी की भूमि और चुनार के किले में साधना की थी। सम्राट विक्रमादित्य ने ही आज से दो हजार साल पहले अयोध्या नगरी की खोज की थी और महाराज लव के बाद सबसे पहले भगवान राम के मंदिर का निर्माण करवाया था। सम्राट विक्रमादित्य नीति शास्त्र और न्याय के पर्याय थे।

उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उज्जैन महाकाल की नगरी है और काशी पंचांग की नगरी है दोनों मिलकर नया इतिहास बनाते हुए प्रेम और सहयोग किया परंपरा मजबूती से आगे बढ़ायेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ज्ञान परंपरा को उचित स्थान देकर पूरे विश्व में प्रतिष्ठित किया है। आज योग और आयुर्वेद की पूरी दुनिया में स्वीकार्यता बढ़ी है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2024 में प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन किया गया। इसमें 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने मां गंगा में स्नान किया।

भेंट की गई वैदिक घड़ी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ को वैदिक घड़ी भेंट की। यह घड़ी बाबा विश्वनाथ के मंदिर में वैदिक काल को वर्तमान में जनता के बीच पुनर्स्थापित करने में सहायक होगी। इस घड़ी में प्राचीन वैदिक परंपरा तथा आधुनिक ज्ञान विज्ञान का मिश्रण करके कल की अचूक गणना का समावेश किया गया है।

समारोह में उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल, एमएसएमई मंत्री राजेश सचान, पंजीयन मंत्री रविंद्र जायसवाल ,महापौर अशोक तिवारी जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, राज्यसभा सदस्य बाल योगी उमेश नाथ जी, विधायक, स्थानीय जन-प्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।

वाराणसी की पावन धरा पर महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का हुआ ऐतिहासिक मंचन

महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ के भव्य मंचन और ओजस्वी प्रस्तुति से दर्शकों को हजारों वर्ष पुराने स्वर्णिम युग की यात्रा कराई। महानाट्य का आरंभ सम्राट विक्रमादित्य के उस संकल्प से हुआ, जब वे विदेशी आक्रांताओं के चंगुल से मातृ भूमि को मुक्त कराने का प्रण लेते हैं। रंगमंच पर कलाकारों के सजीव अभिनय ने उस कालखंड को जीवंत कर दिया, जब शकों के आतंक से त्रस्त प्रजा की रक्षा के लिए एक महानायक का उदय हुआ था। विशाल और भव्य सेट, ऊंचे दुर्ग और उस दौर के राजसी वैभव को दर्शाते दृश्यों ने दर्शकों को से बांधे रखा। प्रकाश संयोजन और संगीत की स्वर लहरियों ने हर दृश्य को इतना प्रभावशाली बना दिया कि युद्ध के दृश्यों में जहाँ वीरता का सजीव आभास हुआ, वहीं सम्राट की न्यायप्रियता के प्रसंगों ने दर्शकों को गौरव की भावना से भर दिया।

महानाट्य की सबसे बड़ी विशेषता इसका यथार्थवादी चित्रण था, जिसमें मदमस्त हाथियों, सरपट दौड़ते घोड़ों और ऊंटों के काफिलों के प्रयोग ने युद्ध के दृश्यों और राजसी वैभव को अभूतपूर्व भव्यता प्रदान की। हाथियों की चिंघाड़ और घोड़ो की टापों ने मंच पर रणभूमि का साक्षात दृश्य उपस्थित कर दिया, जिससे दर्शक रोमांचित हो उठे। लगभग 400 से अधिक कलाकारों ने आधुनिक लाइट-एंड-साउंड तकनीक के साथ सम्राट की न्यायप्रियता, अदम्य शौर्य और विक्रम संवत की स्थापना के प्रसंगों को बड़े प्रभावशाली रूप प्रस्तुत किया। मंच पर निर्मित ऊंचे दुर्ग और राजप्रासाद के सेट ने इतिहास को जीवंत कर दिया।

महानाट्य में सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व के उन अनछुए पहलुओं को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया, जो उन्हें एक साधारण राजा से ‘चक्रवर्ती सम्राट’ बनाते हैं। वह दृश्य अत्यंत ह्रदय स्पर्शी था जब सम्राट अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए रात्रि के अंधकार में वेश बदलकर निकलते हैं। उनके द्वारा स्थापित 'विक्रम संवत' की प्रासंगिकता और भारतीय काल-गणना के महत्व को जिस सरल और साहित्यिक भाषा में संवादों के माध्यम से पिरोया गया, वह सराहनीय था। कलाकारों के संवादों में वह ओज और स्पष्टता थी, जिसने इतिहास को मंच पर साक्षात कर दिया। सम्राट का न्याय और 'सिंहासन बत्तीसी' के प्रसंगों ने यह संदेश दिया कि नेतृत्व केवल सत्ता का भोग नहीं, बल्कि त्याग और न्याय की वेदी पर खुद को समर्पित करना है।

तीन दिवसीय महानाट्य की पहली गरिमामयी शाम में जनता और पर्यटक इस कदर उमड़े कि कार्यक्रम स्थल छोटा प्रतीत होने लगा नाटक के चरमोत्कर्ष पर पहुंचतें ही "जय महाकाल" और "सम्राट विक्रमादित्य" के जयकारों से आकाश गुंजायमान हो गया। यह महानाट्य केवल मंचन नहीं, बल्कि अपनी जड़ों की ओर लौटने का एक सशक्त माध्यम सिद्ध हुआ। अंतिम दृश्य में जब सम्राट का राज्याभिषेक हुआ और पुष्प वर्षा हुई, तो हर नागरिक का मस्तक गर्व से ऊंचा हो गया।

कार्यक्रम की समाप्ति के बाद भी देर तक दर्शक उस जादुई वातावरण के प्रभाव में रहे। महानाट्य के सफल आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य में भव्यता के साथ प्रस्तुत किया जाए, तो वह आज भी जनमानस को गौरवान्वित करता है। यह महानाट्य आने वाले समय में एक सांस्कृतिक मील का पत्थर साबित होगा।

वाराणसी में तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के विशेष आकर्षण

  •     समारोह स्थल पर म.प्र. संस्कृति और पर्यटन विभाग द्वारा भव्य चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। प्रदर्शनी में ऋषियों वैदिक ज्ञान तथा सांस्कृतिक गौरव को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
  •     महानाट्य में 200 से अधिक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्य मंच से दर्शकों के बीच जाकर सम्राट विक्रमादित्य के जीवन का सजीव मंचन अत्यंत आकर्षक बना हुआ है।
  •     महानाट्य में तीन भव्य मंच बनाए गए हैं, जिनमें से एक मंच पर उज्जैन के महाकाल मंदिर की प्रतिकृति प्रदर्शित की गई, जो विशेष आकर्षण का केन्द्र बनी।
  •     महानाट्य में 18 घोड़े, दो रथ, चार ऊंट एक पालकी और एक हाथी के साथ जीवंत दृश्य से विक्रमादित्य का गौरव साकार हो रहा है।
  •     महानाट्य में आधुनिक सूचना संचार तकनीक का उपयोग कर युद्ध के दृश्य आतिशबाजी और प्राचीन परंपरा को अद्भुत ढंग से संजीव किया गया है।
  •     महानाट्य में सम्राट विक्रमादित्य के जन्म से लेकर राजतिलक तक की गाथा विक्रम बेताल की कथा और सनातन धर्म के उत्थान की महाकाव्य कथा को प्रदर्शित किया जा रहा है।

 

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