बांग्लादेश में हसीना और युनूस समर्थकों में हिंसा , 4 की मौत, सेना ने सड़क पर उतारे टैंक

ढाका 

लंबे वक्त से अशांत चल रहे बांग्लादेश में एक बार फिर हिंसा और झड़प की घटनाएं हुई हैं। बुधवार को गोपालगंज में National Citizen Party (NCP) नेशनल सिटीजन पार्टी की एक रैली में हिंसा भड़क उठी। इसमें चार लोगों की मौत हो गई। गोपालगंज बांग्लादेश की निर्वासित प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान का होमटाउन भी है।

ढाका ट्रिब्यून के मुताबिक, मृतकों की पहचान गोपालगंज शहर के उदयन रोड के संतोष साहा के 25 वर्षीय पुत्र दीप्तो साहा, रमज़ान काज़ी, 18, 30 साल के सोहेल राणा और 24 साल के इमोन हैं।

 ये हिंसा गोपालगंज में शेख हसीना को सत्ता से हटाने वाली छात्रों की पार्टी एनसीपी के आंदोलन से पहले हुई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बुधवार को गोपालगंज वर्चुअल रणक्षेत्र में तब्दील रहा. यहां दिन भर आगजनी, हिंसा और फायरिंग होती रही.

डॉक्टरों ने बताया कि मृतकों को गोली लगने के बाद घायल अवस्था में गोपालगंज जनरल अस्पताल लाया गया था. उन्होंने बताया कि गोली लगने से घायल नौ और लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. 

गोपालगंज में बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) की चार अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं. यहां सड़कों पर टैंक गश्त लगा रही हैं. अधिकारियों ने उपद्रवियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का भरोसा दिया है. 

बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने कहा है कि गोपालगंज में बुधवार रात 8 बजे से 22 घंटे का कर्फ्यू लगाने का आदेश दिया गया है. उन्होंने कहा है कि एनसीपी पर हमले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.

मीडिया रिपोर्टों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बांस के डंडों और ईंट-पत्थरों से लैस प्रदर्शनकारियों की पुलिस और सेना और अर्धसैनिक बल बीजीबी सहित सुरक्षा बलों के साथ झड़प हुई.

ढाका ट्रिब्यून के अनुसार एनसीपी गोपालगंज में म्यूनिसिपल पार्क में एक जनसभा कर रही थी, तभी कथित तौर पर अवामी लीग और उसकी प्रतिबंधित छात्र शाखा के कार्यकर्ताओं ने भीड़ पर हमला कर दिया. 

बता दें कि बाग्लादेश में नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) एक नई राजनीतिक पार्टी है, जिसका गठन 28 फरवरी 2025 को हुआ. यह पार्टी अगस्त 2024 में अवामी लीग सरकार के पतन के बाद शुरू हुए छात्र-नेतृत्व वाले "मॉनसून क्रांति" और एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट (ADSM) से उभरी. NCP का नेतृत्व नाहिद इस्लाम नाम का छात्र नेता कर रहा है. नाहिद इस्लाम और उसकी पार्टी बांग्लादेश को मुजीबवाद से मुक्ति का नारा देते हैं. 

एनसीपी नेता ने दावा किया कि उन्हें बताया गया था कि गोपालंगज में सब कुछ नियंत्रण में है, हालांकि कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर उन्हें एहसास हुआ कि ऐसा नहीं था.

इससे पहले दोपहर करीब 1:45 बजे लगभग 200-300 स्थानीय अवामी लीग समर्थक लाठी-डंडों के साथ सीएनपी रैली स्थल पर पहुंचे. जब हमला शुरू हुआ तो ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी पास के अदालत परिसर में शरण लेते देखे गए. कार्यक्रम स्थल पर मौजूद एनसीपी नेता और कार्यकर्ता भी तुरंत वहां से चले गए. एनसीपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि हमला करने वाले अवामी लीग के समर्थक हैं.

हिंसा पर अवामी लीग ने क्या कहा?

वहीं अवामी लीग का आरोप है कि इस हिंसा को बांग्लादेश की सेना और एनसीपी के कार्यकर्ताओं ने अंजाम दिया है. अवामी लीग ने एक्स पर लिखा है, "बिना किसी डर के बांग्लादेशी सेना ने गोपालगंज में एक नागरिक को प्रताड़ित किया. तस्वीर में उसे घसीटते हुए लेते जाया देखा जा सकता है, ताकि पूरे देश में भय का माहौल पैदा किया जा सके. 

अवामी लीग का कहना है यह बदकिस्मत नागरिक उन हजारों लोगों में शामिल था जो यूनुस शासन द्वारा राज्य प्रायोजित दमन के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे, जिसमें हत्या, मनमानी गिरफ़्तारियां, नजरबंदी, अपराध की बढ़ती लहर और देश के संस्थापक पिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान से जुड़े प्रतीकों को उनके जन्मस्थान गोपालगंज से मिटाने की नवीनतम साजिश शामिल थी. 

शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने कहा कि यूनुस और इस्लामिक उपद्रवियों द्वारा समर्थित भीड़ द्वारा फैलाई गई अपराध की लहर के सामने सशस्त्र बलों की पूर्ण निष्क्रियता की वे कड़े शब्दों में निंदा करते हैं. हम जोर देकर कहते हैं कि इस क्रूर कार्रवाई के साथ बांग्लादेशी सेना ने दिखा दिया है कि उसने अपनी तटस्थता त्याग दी है.

अवामी लीग ने कहा कि सरकारी एजेंसियों और सेना द्वारा निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी करने और बंगबंधु की विरासत की रक्षा के लिए खड़े हुए नागरिकों की हत्या करने के बाद एनसीपी नेताओं ने एक कदम और आगे बढ़कर "अवामी लीग" कहे जाने वाले किसी भी व्यक्ति का सफाया करने का आह्वान किया.

अवामी लीग ने सेना द्वारा फायरिंग और हमले का वीडियो भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है.

'मुजीबवाद से मुक्ति दिलाएंगे'

इस हमले के बाद एनसीपी नेता नाहिद इस्लाम और एनसीपी के दूसरे नेता हसनत अब्दुल्ला ने "मुजीब की विरासत" के अवशेषों को मिटाने का वादा किया.

एनसीपी संयोजक नाहिद इस्लाम ने घोषणा की कि अगर उनके रैली स्थल पर हुए हमले के लिए तुरंत न्याय नहीं मिला, तो उनकी पार्टी अपने हाथों से "गोपालगंज को मुजीबवाद से मुक्त" कराने के लिए वापस आएगी.

इस्लाम ने कहा, "अगर पुलिस बल विफल रहे तो हम न्याय ज़रूर दिलाएंगे"

एनसीपी के एक दूसरे नेता ने कहा एक फेसबुक पोस्ट में कहा, "गोपालगंज में हत्यारी हसीना के एजेंटों ने हम पर हमला किया है. पुलिस बस खड़ी है, तमाशा देख रही है और पीछे हट रही है."

बेशक कोई नहीं बख्शे जाएंगे

बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने कहा है कि गोपालगंज में की हिंसा पूरी तरह से अक्षम्य है. युवा नागरिकों को उनके क्रांतिकारी आंदोलन की पहली वर्षगांठ मनाने के लिए शांतिपूर्ण रैली आयोजित करने से रोकना उनके मौलिक अधिकारों का शर्मनाक उल्लंघन है.

मोहम्मद यूनुस के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि, "यह जघन्य कृत्य जिसे कथित तौर पर प्रतिबंधित अवामी लीग के छात्र लीग के सदस्यों और एएल कार्यकर्ताओं ने अंजाम दिया है, बेशक बख्शे नहीं जाएंगे. अपराधियों की शीघ्र पहचान की जानी चाहिए और उन्हें पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. बांग्लादेश के किसी भी नागरिक के खिलाफ इस तरह की हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है."

बता दें कि बांग्लादेश में शेख हसीना को सत्ता से अपदस्थ किए जाने के एक साल पूरे होने को हैं. इस मौके पर छात्र संगठन लगातार रैलियां निकाल रहे हैं.
 

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