दस्तावेजों में हेरफेर: तालाब को बताया कृषि भूमि, सरकार को लगा 58 लाख का चूना

 

महासमुंद

बिरकोनी के ग्रामीणों के सार्वजनिक निस्तारी और सिंचाई के लिए 100 साल पुराने 4 एकड़ से ज्यादा में फैला चुहरी तालाब को कृषि भूमि बताकर फर्जी तरीके से मनोरमा इंडस्ट्री को बेचने का मामला सामने आया है. मनोरमा इंडस्ट्री ने तालाब को कृषि भूमि दर्शाकर एक झूठ के सहारे शासन से करीब 58 लाख रुपये स्टांप ड्यूटी में छूट भी हासिल की है. मनोरमा इंडस्ट्री ने जिन 6 खसरे की जमीन को उद्योग के उपयोग के लिए रजिस्ट्री कराया है उनमें से एक खसरा नंबर तालाब का है. और इस पूरे फर्जीवाड़ा में तहसीलदार, पटवारी, जमीन दलाल और जमीन बेचने वालों पर अहम भूमिका निभाने का आरोप है. अब इस तालाब को इंडस्ट्री द्वारा पाटा जा रहा है.

ग्राम पंचायत बिरकोनी के इंडस्ट्रियल एरिया में संचालित मनोरमा इंडस्ट्री लिमिटेड के ओमनगर खमतराई रायपुर निवासी डायरेक्टर गौतम कुमार पाल ने प्लांट के ठीक पीछे पटवारी हल्का नंबर 33 में स्थित खसरा नंबर 2613, 2615, 2617, 2623 और 2626 रकबा 7. 86 हेक्टेयर, 19 एकड़ 65 डिसमिल जमीन 30 जून 2025 को बिरकोनी निवासी दिनबंधु पिता मनराखन चंद्राकर, तुकाराम पिता बाबूलाल चंद्राकर और अशोक पिता छबिराम चंद्राकर से 8 करोड़ 80 लाख 51 हजार 911 रुपये में कृषि भूमि बताकर खरीदा है. इस रजिस्ट्री में 100 साल पुरानी चुहरी तालाब का कही भी उल्लेख नही किया गया है.

मनोरमा इंडस्ट्री के डायरेक्टर ने बिक्रय -विलेख के साथ 6 कृषि भूमि की तस्वीर को लगाकर उप पंजीयक के समक्ष पेश किया है लेकिन उन 6 तस्वीरों में से चुहरी तालाब की तस्वीर नही थी. इसके अलावा 1955-56 के अधिकार अभिलेख पंजी में दर्ज खसरा नंबर 1220 है, जो रि – नंबरिंग के बाद वर्तमान में खसरा नंबर 2613 है, जिसका रकबा 1.90 हेक्टेयर यानी 4 एकड़ 75 डिसमिल है. अधिकार अभिलेख पंजी में पानी के नीचे भूमि को निस्तारी के लिए चुहरी तालाब उल्लेख किया गया है. मनोरमा इंडस्ट्री ने इन जमीनों को खरीदने के लिए छत्तीसगढ़ शासन के उद्योग संचालनालय से 25 जून 2025 को बकायदा स्टांप शुल्क छूट प्रमाण पत्र भी लिया है. जिसके आधार पर मनोरमा इंडस्ट्री को स्टांप शुल्क में करीब 58 लाख 11 हजार 426 रुपये की छूट दिया गया है.

एक झूठ के सहारे 58 लाख की ली छूट
मनोरमा इंडस्ट्री लिमिटेड प्रबंधन ने झूठी जानकारी देकर बिरकोनी के खसरा नंबर 2013 रकबा 1.90 हेक्टेयर पर सौ साल पुरानी चुहरी तालाब की अस्तित्व को मिटाने के लिए शासन से ही स्टांप ड्यूटी में छूट लिया है. शासन द्वारा उद्योग के विकास के लिए रजिस्ट्री में छूट देने का प्रबंधन किया गया है. लेकिन सवाल है कि क्या अब शासन ही उद्योग को पुरानी सरोवर को पाटने के लिए छूट प्रदान कर रहे हैं? एक तरफ शासन -प्रशासन गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए लोगों के घरों, ऑफिस और भवनों में रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने के लिए जागरूक कर रहा है. तो दूसरी ओर मनोरमा इंडस्ट्री जैसे उद्योग शासन से छूट का फायदा उठाकर 100 साल पुराने तालाब का नामोनिशान मिटा रहे हैं.

तालाब की धार्मिक महत्व सदियों पुरानी
बिरकोन के चुहरी तालाब से धार्मिक आस्था भी जुड़ी हुई है. बिरकोनी की चंडी माता मंदिर में होने वाले धार्मिक अनुष्ठान में चुहरी तालाब की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. यहां के बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि, नवरात्रि में दूर दराज से श्रद्धालु यहां आते हैं. उनके लिए तालाब निस्तारी में उपयोग किया जाता है और नवरात्रि पर्व के बाद जवारा विसर्जन इसी तालाब में किया जाता है. हालांकि, गांव के अंदरूनी हिस्से में तालाब बन चुका है लेकिन चुहरी तालाब की धार्मिक महत्व सदियों से चली आ रही है.

इस संबंध में मनोरमा इंडस्ट्री के मनसूर अली अहमद से संपर्क किया गया. उन्होंने जमीन क्रेता और मनोरमा इंडस्ट्री के डायरेक्टर गौतम कुमार पाल का नंबर देने से इंकार करते हुए सभी दस्तावेज सही होना बताया.

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