संजय पाठक पर जमीन घोटाले की आंच, बैगा आदिवासी जमीन सौदे में चार मोहरे आए सामने

कटनी

सहारा समूह की 310 एकड़ बेशकीमती जमीनों की खरीद में फंसी भाजपा विधायक संजय पाठक (bjp mla sanjay pathak) की पारिवारिक फर्म के बाद अब नया खुलासा हुआ है। इस बार विजयराघवगढ़ के विधायक पाठक पर डिंडोरी, उमरिया, जबलपुर और सिवनी में आदिवासियों के नाम ही आदिवासियों की 1111 एकड़ जमीन खरीदने के आरोप लगे हैं। दिव्यांशु मिश्रा ने कटनी एसपी को शिकायत की है। कहा है, आदिवासियों की जमीन बचाने के लिए सरकार ने जो नियम बनाए, उसी नियम में सेंध लगाकर भू-माफिया आदिवासियों की जमीन खरीद रहे हैं।

इन जगहों में खरीदी गई जमीनें

डिंडोरी, उमरिया, कटनी, जबलपुर और सिवनी में आदिवासियों को मोहरा बनाकर बैगा आदिवासियों की 1111 एकड़ जमीन खरीदी गई। खास यह है कि इन जमीनों को खरीदने वाले कोई और नहीं, विधायक के वे 4 आदिवासी कर्मचारी नत्थू कोल, प्रहलाद कोल, राकेश सिंह गौड़, और रघुराज सिंह गौड़ हैं, जो गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने को विवश हैं। किसी का पूरा परिवार मनरेगा में मजदूरी कर रहा है तो किसी के नाम पुश्तैनी महज 2 एकड़ जमीन है। दिव्यांशु की शिकायत के बाद कटनी एसपी अभिनय विश्वकर्मा ने एएसपी को जांच सौंपी है।

भ्रष्टाचार के चार मोहरे

सरकार से 30 किलो गेहूं लेने वाले के पास 410 एकड़ जमीन

डिंडोरी जिले में रघुराज गौड़ के नाम 410 एकड़ जमीन है। बजाग तहसील के पिपरिया माल 365.88 एकड़ जमीन दर्ज है। बघरेलीसानी में 44.12 एकड़ है। जबलपुर के सरौली गांव में भी 4.78 एकड़, कटनी के बरमानी गांव में 9.60 एकड़ और बिरुहली में 8.25 एकड़ जमीन है। खास यह कि जिस दौरान रघुराज ने जमीन खरीदी, उसी बीच 17 जनवरी 2022 को बीपीएल राशन कार्ड से ३० किलो गेहूं, दो किलो नमक भी लिया।

श्यामलाल गौड़ के 4 बच्चों में रघुराज, रतन, दो बहन उमा व रेणुका है। कटनी के सुतरी गांव में खसरा-174/3, 290/3, 290/6 और 342/9 में 3.3300 हेक्टेयर यानी, 8.225 एकड़ जमीन चारों भाई-बहन के नाम है। रघुराज के नाम पैतृक जमीन 2.05 एकड़ ही है। यह भी पैक्स में दृष्टिबंधक है।

सरकार से 1 किलो नमक लेने वाले के नाम 369.70 एकड़ ज़मीन

नत्थू कोल के पास डिंडोरी, उमरिया, जबलपुर, कटनी और सिवनी में 369.70 एकड़ ज़मीन है। डिंडोरी की बजाग तहसील में उनके पास 184.3 एकड़ ज़मीन है। उन्होंने पिपरिया माल में 175.67 एकड़ ज़मीन खरीदी। उमरिया के ताला में 44.22 एकड़, मरदरी परासी में 9.44 एकड़ और गोहरी परासी में 7 एकड़ ज़मीन है। 28 एकड़ ज़मीन खरीदी। जबलपुर के कुम्ही सरोली में 25.30 एकड़ और मौथर में 90.50 एकड़ ज़मीन है। कटनी के जगुवा में 5.60 एकड़ और सिवनी में 2.20 एकड़ ज़मीन है।

नत्थू बीपीएल कार्डधारक हैं और उनके परिवार में 6 सदस्य हैं। 22 अप्रैल 2024 को परिवार ने सरकारी राशन की दुकान से 12 किलो गेहूं, 18 किलो चावल और 1 किलो नमक लिया। उन्हें इस सरकारी योजना का लाभ तब मिला जब डिंडोरी में उनके नाम पर सैकड़ों एकड़ ज़मीन खरीदी जा रही थी।

199.40 एकड़ ज़मीन के मालिक का जीवन सरकारी राशन पर निर्भर!

प्रहलाद कोल के पास डिंडोरी, जबलपुर, कटनी ज़िले में 199.40 एकड़ ज़मीन है। डिंडोरी की बजाग तहसील में 199.98 एकड़ ज़मीन खरीदी। प्रहलाद के पास पिपरिया माल में 80.85 एकड़, हर्राटोला माल में 29.90 एकड़ और सरायटोला में 1.23 एकड़ ज़मीन है। जबलपुर के झीटी में 17.58 एकड़, प्रतापपुर में 1.01 एकड़, अगरिया में 0.86, मोठार में 8.85 एकड़ ज़मीन खरीदी गई। कटनी के बरमानी में 24 एकड़, बिरुहली में 15.17 एकड़ और बरमानी में 13.45 एकड़ ज़मीन दर्ज है।

प्रहलाद कोल बीपीएल कार्डधारक हैं। उन्होंने 12 मई 2025 को कटनी के ओमश्री सिंहवाहनी महिला उपभोक्ता सहकारी भंडार से अपने परिवार के तीन सदस्यों के लिए 6 किलो गेहूँ, 9 किलो चावल और 1 किलो नमक लिया था।

बेटी और पत्नी मनरेगा मज़दूर, लेकिन कागज़ों में 132.88 एकड़ ज़मीन

राकेश सिंह गोंड के नाम डिंडोरी, उमरिया, कटनी और सिवनी में 132.88 एकड़ ज़मीन दर्ज है। राकेश के पास डिंडोरी की बजाग तहसील के पिपरिया माल में 83.52 एकड़, बघरेलिसानी में 4.52 एकड़, उमरिया की मानपुर तहसील के ताला गाँव में 1.96 एकड़ और चिल्हारी में 4.64 एकड़ ज़मीन है। सिवनी के अवारगनी राय में 28.88 एकड़ ज़मीन, कटनी के जुगवा में 0.79 एकड़ और बिरुहली में 8.50 एकड़ ज़मीन दर्ज है।

राकेश बीपीएल कार्डधारक हैं। कटनी के बरमानी गांव में उनकी 3.65 एकड़ पैतृक ज़मीन है। परिवार मनरेगा में मज़दूरी करता है। जॉब कार्ड के अनुसार, राकेश ने 27 मई 2023 तक मनरेगा में काम किया। बेटी ने 25 दिसंबर 2024 तक काम किया। पत्नी भी मज़दूर है। पत्नी भी मनरेगा में मस्टर वर्कर थी। उसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1.20 लाख रुपये भी स्वीकृत हुए थे।

बॉक्साइट खदान

बताया जा रहा है कि डिंडोरी जिले में गरीब बैगा आदिवासियों को धोखा देकर 2009 से 795 एकड़ जमीन खरीदी गई है और बॉक्साइट खदान स्वीकृत कराकर खनन की तैयारी की जा रही है। नियमानुसार, आदिवासी की ज़मीन आदिवासी ही खरीद सकते हैं, इसलिए ये हथकंडे अपनाए गए।

शिकायत की हो रही जांच

कटनी एसपी डॉ. संतोष डेहरिया ने बताया कि विधायक संजय पाठक के खिलाफ आदिवासियों की जमीन कम दाम में धोखाधड़ी कर खरीदने की शिकायत हुई है। शिकायकर्ता के बयान लिए हैं। जांच चत्र रही है। रिपोर्ट सीनियर अफसरों को सौंपेंगे।

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