अब नहीं उड़ेंगे दाने! मुंबई में 51 कबूतरखाने सील, 100 को चालान

मुंबई
महाराष्ट्र सरकार के निर्देश और बॉम्बे उच्च न्यायालय के आदेश के बाद बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने दादर कबूतरखाना में कबूतरों को दाना डालने पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया है. बीएमसी ने 2 अगस्त को दादर कबूतरखाना के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इसे प्लास्टिक की बड़ी तिरपालों से ढक दिया.

यह प्रतिबंध गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों के कारण लागू किया गया है, क्योंकि कबूतरों की बीट (मल) से सांस संबंधी बीमारियां और संक्रमण होने की संभावना होती है, विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले शहरी क्षेत्रों में. बीएमसी ने बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को लागू करते हुए दादर कबूतरखाना में बने अवैध ढांचों को ध्वस्त कर दिया और कबूतरों को खिलाने के लिए रखे गए अनाज को जब्त कर लिया गया.

कबूतरों को दाना डालने पर प्रतिबंध लागू होने के बाद से बीएमसी ने दादर कबूतरखाना में 100 से अधिक लोगों पर जुर्माना लगाया है. बॉम्बे उच्च न्यायालय ने बीएमसी को प्रतिबंध का उल्लंघन कर कबूतरों को दाना डालने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और आपराधिक शिकायत दर्ज करने का अधिकार दिया है, जिसमें किसी व्यक्ति द्वारा बार-बार आदेश का उल्लंघन पर संभावित गिरफ्तारी भी शामिल है.

बीएमसी को इस कार्रवाई में मुंबई पुलिस का भी सहयोग मिला है और उन जगहों पर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जहां लोग कबूतरों को दाना डालते हैं. कबूतरों को दाना डालने के पीछे सांस्कृतिक और धार्मिक आधारों का हवाला देकर स्थानीय लोग बीएमसी के एक्शन का विरोध कर रहे हैं. हालांकि, बीएमसी का कहना है कि वह हाई कोर्ट के आदेश पर जन स्वास्थ्य और स्वच्छता को प्राथमिकता दे रही है. 

दादर निवासी नीलेश त्रेवाडिया ने कहा कि बीएमसी को इस तरह के प्रतिबंध के परिणामों पर भी ध्यान देना चाहिए. यह प्रतिबंध दादर सहित मुंबई के सभी प्रमुख कबूतरखानों पर लागू है और हाई कोर्ट ने बीएमसी से इसे सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है. प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले लोगों पर कानूनी कार्रवाई हो रही है. मुंबई में 51 कबूतरखाने हैं, जिनमें दादर कबूतरखाना जैसे प्रतिष्ठित स्थल भी शामिल हैं.

मुंबई में कबूतरों को दाना खिलाने पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद उत्पन्न स्थिति को ध्यान में रखते हुए, महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने मुंबई के म्युनिसिपल कमिश्नर को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि पक्षी प्रेमियों, जैन साधुओं और नागरिकों द्वारा व्यक्त की गई भावनाओं को ध्यान में रखा जाए. बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्णय का सम्मान करते हुए उन्होंने बीएमसी से कोई बीच का रास्ता निकालने का आग्रह किया है.

मुंबई में पिजन फीडिंग की सदियों पुरानी प्रथा

मुंबई में लोगों द्वारा कबूतरों को दाना डालना सदियों से चली आ रही एक प्रथा है, जो कई बार विवादों का कारण भी बना है. भारतीय संस्कृति में कबूतरों को दाना डालना पुण्य का कार्य माना जाता है और ऐसा माना जाता है कि इससे पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है. कहा जाता है कि कबूतरों को भोजन कराने से मृत पूर्वजों की आत्मा को तृप्ति मिलती है और पितृ-पीड़ा से मुक्ति मिलती है. विशेष रूप से अमावस्या के दिन कबूतरों को दाना डालना शुभ माना जाता है.

कुछ संस्कृतियों में यह भी मान्यता है कि कबूतरों को सांसारिकता और आध्यात्म के बीच संदेशवाहक के रूप में देखा जाता है, उन्हें भोजन कराने से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है और ईश्वर के साथ बेहतर संबंध बनता है. जैन धर्म में, कबूतरों को दाना डालना जीव दया या जीवों के प्रति करुणा का एक रूप है, जो जैन परंपरा के प्रमुख सिद्धांतों में से एक है. जैन मंदिर और ट्रस्ट कबूतरखाना संचालित करते हैं. जैन धर्म के अनुयायी इन स्थानों पर नियमित रूप से कबूतरों को दाना डालने जाते हैं. दादर कबूतरखाना को भी एक जैन मंदिर द्वारा स्थापित किया गया था.

मुंबई में कबूतरों को दाना खिलाने का इतिहास

मुंबई में गुजराती और जैन व्यापारियों की बड़ी संख्या के कारण शहरभर में कबूतरखाने मिल जाते हैं. इस कारण मुंबई में कड़ी संख्या में कबूतर देखे जा सकते हैं. एडवर्ड हैमिल्टन ऐटकेन ने 1909 में अपनी किताब 'द कॉमन बर्ड्स ऑफ बॉम्बे' में शहर में कबूतरों की बड़ी आबादी के कारणों पर विस्तार से बताते हुए लिखा, 'वे दो चीजों से बंबई की ओर आकर्षित होते हैं: उनके रहने के लिए यहां इमारतों की कोई कमी नहीं है और हिंदू अनाज व्यापारियों की उदारता के कारण उन्हें भोजन की कमी नहीं होती.'

बॉम्बे नगरपालिका ने 1944 में दादर स्थित जैन मंदिर को एक पत्र लिखकर पक्षियों के भोजन के लिए एक ट्रैफिक आइलैंड के निर्माण की अनुमति दी. यह पत्र जैन मंदिर द्वारा भेजे गए उस पत्र के जवाब में जारी किया गया था जिसमें मंदिर के पास झुंड में रहने वाले और कारों से कुचले जाने के खतरे में रहने वाले कबूतरों की सुरक्षा के लिए एक बाड़ा बनाने की अनुमति मांगी गई थी.

ट्रैफिक आइलैंड सड़क पर एक उठा हुआ या चिह्नित क्षेत्र होता है जिसका उपयोग यातायात को नियंत्रित करने, पैदल यात्रियों को सुरक्षित स्थान प्रदान करने और दुर्घटनाओं को कम करने के लिए किया जाता है. ऐसे स्ट्रक्चर चौराहों पर या सड़कों के बीच में बनाए जाते हैं, ताकि वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित किया जा सके और पैदल चलने वालों को सड़क पार करने के लिए सुरक्षित स्थान मिल सके. 

मुंबई में कबूतरों की बीट से स्वास्थ्य जोखिम

तत्कालीन बॉम्बे में कबूतरों को दाना डालना व्यापक रूप से स्वीकार्य था. लेकिन 90 के दशक के मध्य में इस पर चिंताएं उभरने लगीं, जब मेडिकल स्टडीज में कबूतरों की बीट को सांस संबंधी बीमारियों से जोड़ा गया. इसके बाद, मुंबई में कबूतरों को दाना खिलाने से संबंधित शिकायतें बढ़ने लगीं, नागरिकों ने कबूतरों की अधिक संख्या के कारण श्वसन संबंधी समस्याओं की शिकायत की.

2013 में, 30 जून को ग्रांट रोड पर कबूतरखाना के पास एक कबूतर के अचानक सामने आने से बीएमसी के एक इंजीनियर की मोटरसाइकिल से गिरकर मौत हो गई थी. घटना के बाद स्थानीय पार्षद ने दाना बेचने वालों को सड़क से हटा दिया. दो दिन बाद, तत्कालीन बीएमसी लॉ कमिटी के चेयरमैन मकरंद नार्वेकर ने कबूतरखानों को कम भीड़-भाड़ वाले इलाकों में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा. हालांकि, इस प्रस्ताव पर कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. 2014 से, शहर में कई कबूतरखाने हटा दिए गए हैं और कबूतरों को दाना डालते हुए पकड़े गए लोगों पर बीएमसी द्वारा जुर्माना लगाया गया है.

मुंबई में कबूतरखानों का क्यों किया गया बंद?

3 जुलाई, 2025 को महाराष्ट्र विधान परिषद सत्र के दौरान, मंत्री उदय सामंत (शिवसेना नेता) ने कबूतरों की बीट और पंखों से सांस संबंधी बीमारी के खतरे का हवाला देते हुए मुंबई में 51 कबूतरखानों को तत्काल बंद करने की घोषणा की. इस घोषणा के बाद बीएमसी ने पूरे शहर में कबूतरखानों के खिलाफ अभियान शुरू किया, जिसके तहत कबूतरों को दाना डालने वालों पर जुर्माना लगाया गया और कबूतरखानों को बंद कर दिया गया.

बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस साल 15 जुलाई को, यह कहते हुए कि इंसानों और जानवरों के अधिकारों में संतुलन होना चाहिए, कबूतरों को दिन में दो बार दाना खिलाने की अनुमति देने वाला अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया. हालांकि, हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगले आदेश तक किसी भी पुराने कबूतरखाने को नहीं तोड़ा जाएगा. न्यायमूर्ति गिरीश एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरिफ एस. डॉक्टर की खंडपीठ पशु अधिकार कार्यकर्ता पल्लवी सचिन पाटिल, स्नेहा दीपक विसारिया और सविता महाजन द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बीएमसी को कबूतरखाने ध्वस्त करने से रोकने और यह सुनिश्चित करने की मांग की गई थी कि नागरिकों को कबूतरों को दाना डालने से न रोका जाए.

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने गत 31 जुलाई को, बीएमसी को निर्देश दिया कि वह दादर (पश्चिम) और अन्य कबूतरखानों में प्रतिबंध के बावजूद, अवैध रूप से और नियमों का उल्लंघन करके कबूतरों को दाना डालने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करे. इस आदेश का पालन करते हुए बीएमसी ने आखिरकार मुंबई के सबसे प्रतिष्ठित पिजन ​फीडिंग स्टॉप (कबूतरों को दाना डालने वाली जगह) को अंततः बंद कर दिया गया और ग्रे कलर की तिरपाल की मोटी चादरों से ढक दिया.

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