22 दिन बाद मौत… गाय के पेट से निकली 40 किलो पन्नी, बिलासपुर में मचा हड़कंप

बिलासपुर

नगर निगम की कथित लापरवाही के चलते रुद्र विहार निवासी मनीष कुमार सिंह की एक गाय की मौत हो गई। गाय के शव का जब पोस्टमार्टम किया गया तो उसके पेट से 40 किलो पन्नी निकला, मवेशी मालिक का आरोप है कि नगर निगम के गोठान में मवेशियों को चारा नहीं दिया जा रहा, बल्कि कचरे में ही उन्हें छोड़ दिया जा रहा है। पीड़ित ने निश्पक्ष जांच की मांग की हैं।

रूद्ध विहार निवासी मनीष कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने एसबीआई व्यापार विहार शाखा से 1 लाख 40 हजार रुपए का लोन लेकर दो गायें खरीदी थीं। कुछ समय पहले रवि रेसिडेंसी स्थित उनके प्लांट में बने शेड में बंधी गाय को नगर निगम के कर्मचारी पड़ोसियों की शिकायत पर ले गए और शेड को तोड़ दिया।

उन्होंने बताया कि वे 22 दिनों तक गायों को छुड़ाने के लिए जोन-7 कार्यालय और मोपका चौकी के चक्कर लगाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार 22वें दिन उन्हें मोपका थाने से पाटले नामक एक अधिकारी का फोन आया और बताया गया कि उनकी एक गाय की मृत्यु हो चुकी है, पहचान के लिए गोठान पहुंचें।

मनीष जब वहां पहुंचे, तो उन्हें एक मृत गाय सौंपी गई, जबकि दूसरी गाय अब भी निगम के पास है। इस पूरे मामले में मनीष का आरोप है कि उन्हें गाय छोड़ने का झांसा देकर 22 दिन तक दौड़ाया गया और जब वे जवाब मांगने जोन कार्यालय पहुंचे तो वहां बैठे एक शास्त्री नामक व्यक्ति (जिनका पूरा नाम या पद ज्ञात नहीं) ने उन्हें रूपए और चेक में राशि देकर समझौता करने का प्रलोभन भी दिया। पीड़ित ने कलेक्टर संजय अग्रवाल से मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

कार्रवाई के नाम पर हो रही गायों की हत्या
पीड़ित मनीष कुमार सिंह ने नगर निगम व गौठान प्रबंधन पर आरोप लगाया कि उनकी गाय की मौत उचित भोजन न मिलने की वजह से हुई है। गोठान में निगम कार्रवाई के नाम पर मवेशियों को ले जाती है। उनके खाने व पीने की वहां पर कोई व्यवस्था नहीं है।

उन्होंने बताया कि नगर निगम के कर्मचारी गायों को कार्रवाई के नाम के लिए पकड़ते हैं। उचित भोजन न मिलने के आभाव में मवेशियों की मौत हो रही है। मनीष सिंह ने गाय की मौत के लिए जोन कमिश्नर सहित निगम के संबंधित अधिकारियों और गोठान कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया है।

गलती छुपाने के लिए किया एफआईआर
मनीष सिंह का कहना है कि उनकी गायों को निजी जमीन पर बांधा गया था, तो उन्हें जब्त करने का क्या अधिकार था। अगर वे मवेशी सड़क पर छोड़ते तो समझ में आता। उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम के कर्मचारी अपनी गलती छुपाने के लिए उन पर जबिरया एफआईआर की कार्रवाई करवा दी। पीड़ित ने थाने व निगम में कहा कि चलान कोर्ट में पेश कर दे वे कोर्ट में जवाब देकर मवेशी छुड़ा लेंगे। लेकिन जब तक उनकी एक मवेशी की मौत हो गई, वहीं दूसरा अब भी निगम के कब्जे में है।

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