फतेहपुर में मकबरे पर बवाल, हिंदू संगठनों ने की पूजा और तोड़फोड़

फतेहपुर 

 मकबरा मंदिर विवाद सोमवार को गहरा गया है। मठ मंदिर संघर्ष समिति के बैनर तले भाजपा जिला अध्यक्ष मुखलाल पाल और पूर्व विधायक विक्रम सिंह की अगुआई में भाजपाइयों ने डाक बंगले से मकबरा स्थल तक जुलूस निकाला।

हनुमान चालीसा का पाठ किया। वहीं हिंदू महासभा के प्रांत उपाध्यक्ष मनोज त्रिवेदी ने 300 भक्तों की टुकड़ी लेकर मकबरा के अंदर प्रवेश कर आरती पूजन किया। इस दौरान हिंदू पक्ष के लोगों ने मकबरा के अंदर बनी दो मजारों को डंडा मार कर तोड़ दिया है।

वर्तमान में डीएम−एसपी मौके पर हैं। एक तरफ से 2000 की संख्या में हिंदू पक्ष व दूसरी तरफ से लगभग डेढ़ हजार की संख्या में मुस्लिम पक्ष मकबरा के दाहिने और बाएं और जुटे हुए हैं।

मुस्लिम पक्ष की ओर से पथराव भी किया गया है हालांकि इस पथराव में कोई हताहत नहीं हुआ है। प्रशासन ने यहां पर सुरक्षा के इंतजाम और बढ़ा दिए हैं। भाजपाइयों का तर्क है, कि वह मकबरे के अंदर पूजा−अर्चना करेंगे तभी वापस जाएंगे। 

मकबरे की जगह था शिव मंदिर?

यह पूरा विवाद शिव मंदिर और मकबरे को लेकर है. हिंदू संगठनों ने मकबरे के शिव और श्रीकृष्ण मंदिर होने का दावा किया है. मौके पर फिलहाल हिंदू संगठन के लोगों की भारी भीड़ जमा हो चुकी है. हिंदू संगठन के लोग मकबरे में पूजा-पाठ करने के लिए यहां जुटे हैं. प्रशासन इन लोगों को रोकने की कोशिश में लगा हुआ है, लेकिन भीड़ ज्यादा होने की वजह से सफलता नहीं मिली है. 

मकबरे में बनी मजार पर तोड़फोड़

सदर तहसील क्षेत्र स्थित नवाब अब्दुल समद मकबरे को बीजेपी जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल ने मंदिर बताया था और इसी दावे के बाद से विवाद की शुरुआत हो गई. उन्होंने इस मकबरे को एक हज़ार साल पुराना ठाकुर जी और शिवजी का मंदिर बताया था. मंदिर के स्वरूप को बदलकर मकबरा बनाने का आरोप लगाया गया है. 

हिंदू संगठनों ने मकबरे में कमल का फूल और त्रिशूल के निशान को मंदिर होने का सबूत बताया है. उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि मंदिर में पूजा करने दें क्योंकि यह  हिंदुओं की आस्था का केंद्र है. उसे मकबरे में बदलकर आस्था को ठेस पहुंचाई गई है. जिलाध्यक्ष ने कहा कि सनातन हिंदू ऐसा बर्दाश्त नहीं करेंगे और वहां कुछ भी होता है तो प्रशासन की जिम्मेदारी होगी.

जिला प्रशासन मामले को गंभीरता से लिया है और फिलहाल मौके पर कई थानों की पुलिस फोर्स मौजूद है. मकबरा परिसर में हिंदू संगठन के लोग घुस चुके हैं और वहां बनी मजार पर तोड़फोड़ की गई है. इस दौरान पुलिस से उनकी झड़प भी हुई है.

मुस्लिम पक्ष की तरफ से पथराव

मकबरा परिसर में बनी मजार को हिंदू संगठनों ने क्षतिग्रस्त कर दिया है, जिसके बाद से इलाके में तनाव बढ़ गया है. मुस्लिम समुदाय के लोग भी मौके पर जमा हो चुके हैं और दूसरी तरफ से पथराव भी हुआ है. इसके बाद डीएम और पुलिस के आला अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच चुके हैं और कानून व्यवस्था बनाने की कोशिश में जुटे हैं.

दूसरी तरफ राष्ट्रीय ओलमा काउंसिल के सचिव मोहम्मद नसीम ने कहा कि यह घटना बहुत निंदनीय है. उन्होंने कहा कि अब्दुल समद मकबरा सदियों पुराना है, जो सरकारी दस्तावेज में भी 753 नंबर खतौनी में दर्ज है. नसीम ने कहा कि फतेहपुर का माहौल खराब किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि क्या अब हर मस्जिद और मकबरे के नीचे मंदिर ढूंढा जाएगा, यह लोकतंत्र नहीं है राजतंत्र है.

फतेहपुर के आबूनगर रेड़इया मोहल्ले में अतिप्राचीन इमारत में मंदिर-मकबरा को लेकर मंदिर-मठ कमेटी जहां सोमवार को यहां पूजा-अर्चना और साफ-सफाई के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर अडिग थी तो वहीं दूसरे पक्ष से भी इंटरनेट मीडिया में इसे मकबरा बताया जा रहा है। तनातनी के इस माहौल में प्रशासन ने रविवार को विवादित स्थल पर बैरिकेड्स लगवा दी है और पुलिस का सख्त पहरा लगा दिया है, ताकि किसी भी तरह से माहौल खराब न हो।

‘विवादित स्थल के लिए जब तक कोई कोर्ट आर्डर या फिर पुरातत्व विभाग का पत्र नहीं आ जाता है तब तक उसे जिस स्थिति में उसी स्थिति में रखा जाएगा। सुरक्षा की दृष्टि से सारे बंदोबस्त किए गए हैं, ड्रोन कैमरे से हर गतिविधि पर नजर भी रखी जाएगी।’–तारकेश्वर राय, शहर कोतवाल

दरअसल, फतेहपुर के सदर तहसील क्षेत्र स्थित नवाब अब्दुल समद मकबरे को बीजेपी जिलाध्यक्ष ने मंदिर होने का किया दावा किया है. उन्होंने इसे लगभग एक हजार वर्ष पुराना बताया है. इस मकबरे में ठाकुर जी/शिव मंदिर संरक्षण संघर्ष समिति और बीजेपी समेत कई हिंदू संगठनों ने 11 अगस्त को पूजा-पाठ करने का किया ऐलान किया था. उन्होंने मंदिर के स्वरूप को बदलकर इसे मकबरा बनाने का आरोप लगाया है. हिंदू संगठनों का कहना है कि मकबरे में कमल के फूल व त्रिशूल बने हैं, इससे पुष्टि होती है ये एक प्राचीन मंदिर था, जिसे बाद में मकबरे में बदल दिया गया. 

बीजेपी जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल ने कहा कि प्रशासन को मामले की पूरी जानकारी है. दूसरे समुदाय ने मंदिर को मस्जिद के स्वरूप में करने का काम किया है. ये हमारी आस्था का केंद्र है, इसलिए हम लोग हर कीमत में मंदिर में पूजा-पाठ करेंगे. अवैध कब्जा सनातनी कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे. कुछ भी होगा वो प्रशासन की जिम्मेदारी होगी. 

उलेमा काउंसिल ने कही ये बात 

वहीं, राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के मोहम्मद नसीम ने कहा कि फतेहपुर की घटना बहुत निंदनीय है. सैकड़ों साल पुराना हमारा मकबरा है. सरकारी दस्तावेज में 753 नंबर खतौनी में ये जमीन दर्ज है. लेकिन मठ संघर्ष समिति और कुछ संगठनों ने अब उसकी भी खुदाई का ऐलान कर दिया है. उसे ठाकुर जी का मंदिर कहकर तमाशा किया जा रहा है. जिले का माहौल खराब किया जा रहा है. मेरी प्रशासन और सरकार से अपील है कि क्या हर मस्जिद और मकबरे के नीचे मंदिर ढूंढा जाएगा. ये लोकतंत्र नहीं, राजतंत्र है. हम लोग इसको लेकर आंदोलन करेंगे. 

उधर, नगर पालिका परिषद के जेई अविनाश पांडेय ने बीते दिन कहा था कि जिला अधिकारी के आदेश पर हम लोग यहां पर बैरिकेडिंग कर रहे हैं, ताकि कोई भी भीड़ या कोई भी आदमी इसको क्रॉस ना कर सके. बाकी प्रशासन को भी हम लोगों को पूरा सहयोग है और पुलिस की भी काफी अच्छी व्यवस्था है. फोर्स के द्वारा हम इस परिसर को सुरक्षित कर रहे हैं. मालूम चला है कि हिंदू संगठन द्वारा मकबरे में पूजा करने का ऐलान किया गया है. लेकिन इसकी इजाजत नहीं है. मगर आज प्रशासन के सारे इंतजाम नाकाफी साबित हुए और भारी संख्या में हिंदू संगठन के लोग यहां पहुंच गए, साथ में तोड़फोड़ भी की. देखें वीडियो- 

वीएचपी का बयान 

वीएचपी के प्रदेश उपाध्यक्ष वीरेंद्र पांडे ने बताया फतेहपुर जनपद के सदर कोतवाली के अंतर्गत अबू नगर रेडइया में एक अति प्राचीन भगवान भोलेनाथ का मंदिर था. श्री कृष्ण जी का मंदिर था. लेकिन कुछ अराजक तत्वों के द्वारा उसके स्वरूप बदलने की कोशिश की गई है. आने वाले जन्माष्टमी की तैयारी के लिए 11 अगस्त को डाक बंगले में बड़ी संख्या में हिंदू सनातन धर्मावलंबियों को एकत्रित करके कथित मकबरे में पूजा-पाठ शुरू की जाएगी. इसकी साफ सफाई कर इसको अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा. हमारी मांग है कि जो अराजकतत्वों द्वारा मंदिर का स्वरूप बदलने की कुचेष्टा की गई है उसको दंडित किया जाए और पुनः उसे हिंदुओं को सौंपा जाए. अपनी मांग के लिए हम किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं. हम अपने धर्म और धार्मिक स्थानों की रक्षा करने का संकल्प ले चुके हैं और इसको पूरा करके ही मानेंगे. 

फिलहाल, जिला प्रशासन से वार्ता हो रही है, बराबर बात हो रही है. जिला प्रशासन को हमने 10 दिन पहले ही कहा था कि आप अपने राजस्व विभाग के द्वारा इसको दिखवा लीजिए लेकिन प्रशासन तो मस्ती में रहता है. कोई सुनवाई नहीं हुई. उनके कान में जू नहीं रेंगी. जो व्यक्ति कहता है कि यह मंदिर नहीं है, कोई दूसरा है, तो इसका साक्ष्य प्रमाणिकता के साथ दिखाए. प्रशासन बीच में आए और मध्यस्थता कराए. हमारे पास बहुत सारे साक्ष्य हैं. जैसे- मंदिर में परिक्रमा मार्ग है, धार्मिक कुआं है, कमल-त्रिशूल के निशान हैं. छत्र की जंजीर आज भी मौजूद है. ये सब किसी मस्जिद या मकबरे में नहीं होती. 

फतेहपुर में अब कैसे हैं हालात?

डीएम रवींद्र सिंह ने कहा कि अभी कानून व्यवस्था सामान्य है. लोग अपने-अपने घर चले गए हैं. फिलहाल, अभी हमारी प्राथमिकता है कि लोगों में विश्वास बहाल हो. वहीं, एसपी अनूप कुमार सिंह ने कहा कि कानून व्यवस्था की स्थिति सामान्य है. हालात कंट्रोल में हैं. दोनों पक्षों को समझाकर भेज दिया गया है. 

हालात को देखते हुए दंगा नियंत्रण स्कीम लागू की गई है. डीजीपी मुख्यालय लगातार पूरे मामले पर नजर रखे है. बांदा से एक ASP, एक DSP, 6 इंस्पेक्टर, 5 थानों की फोर्स फतेहपुर रवाना हो गई है. पहले से भी मौके पर कई थानों की पुलिस पहुंची हुई है. 

 

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