यूपी का लक्ष्य : 2030 तक फसल उत्पादकता में देश में नंबर एक, 2047 तक दुनिया में अग्रणी

  • ‘विकसित यूपी @2047’
  • योगी सरकार का संकल्प, 2047 तक यूपी बनेगा कृषि उत्पादकता में वैश्विक लीडर
  • यूपी का लक्ष्य : 2030 तक फसल उत्पादकता में देश में नंबर एक, 2047 तक दुनिया में अग्रणी
  •  कृषि निर्यात में भी यूपी दिखाएगा दम, 2030 तक भारत में नंबर 1 और 2047 तक वैश्विक स्तर पर शीर्ष देशों में
  • – भंडारण, प्रोसेसिंग, फूड पार्क और कोल्ड चेन इंफ्रा से किसानों को मिलेगा अधिक लाभ
  • – पीएसीएस, एफपीओ और मेगा फूड पार्क से बदलेगा यूपी का कृषि परिदृश्य
  • – नवाचार और वैज्ञानिक तकनीकों से योगी सरकार बना रही है ‘सस्टेनेबल एग्रीकल्चर’ का मॉडल
  • – फसल विविधीकरण और शोध पर जोर, यूपी कृषि शिक्षा और रिसर्च का हब बनने की ओर

लखनऊ
 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश को “विकसित यूपी @2047” बनाने का संकल्प लिया है, जिसके तहत आने वाले 22 वर्षों में कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की बड़ी रणनीति बनाई गई है। इस विजन का सबसे अहम हिस्सा है कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में नवाचार और तकनीक आधारित विकास। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि कृषि और औद्योगिक विकास मिलकर यूपी को विकसित भारत के ग्रोथ इंजन में बदलेंगे। आने वाले समय में प्रदेश न केवल भारत के किसानों के लिए, बल्कि वैश्विक कृषि जगत के लिए भी रोल मॉडल बनकर उभरेगा।

भविष्य का लक्ष्य (विजन 2047)
योगी सरकार ने 2030 तक यूपी को देश में फसल उत्पादकता में नंबर-1 बनाने का लक्ष्य तय किया है, जबकि 2047 तक प्रदेश दुनिया के अग्रणी देशों, मैक्सिको, चीन, फ्रांस और अमेरिका के बराबर खड़ा होगा। यही नहीं, कृषि निर्यात के क्षेत्र में भी यूपी 2030 तक भारत में प्रथम स्थान पर पहुँचेगा और 2047 तक रूस, ऑस्ट्रेलिया व कनाडा जैसे वैश्विक कृषि निर्यातकों की श्रेणी में शामिल होने का संकल्प ले चुका है। इसके लिए राज्य सरकार ने फोकस एरिया तय किए हैं, जिनमें भंडारण और मूल्य संवर्धन, प्रोसेसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर (PACS, FPOs, मेगा फूड पार्क, कोल्ड चेन), कृषि शिक्षा, नवाचार और रिसर्च, सस्टेनेबल एग्रीकल्चर, वैज्ञानिक तकनीकों का विस्तार और फसल विविधीकरण प्रमुख हैं।

बीते साढ़े आठ साल में हुए बड़े बदलाव
2017 से पहले प्रदेश की स्थिति बेहद पिछड़ी हुई थी। कृषि उत्पादन सीमित था, वैज्ञानिक तकनीक का प्रयोग नगण्य था और किसान अपनी उपज का सही मूल्य नहीं पा पाते थे। कोल्ड चेन और फूड प्रोसेसिंग जैसी सुविधाएं लगभग न के बराबर थीं। लेकिन पिछले साढ़े आठ साल में तस्वीर बदल चुकी है। योगी सरकार ने किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने, मंडी व्यवस्था को मजबूत करने, स्टोरेज और कोल्ड चेन सुविधाओं को बढ़ाने और एफपीओ मॉडल को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया। परिणामस्वरूप आज प्रदेश कृषि उत्पादकता और विविधता दोनों में नई ऊंचाइयां छू रहा है।

 

 

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