रिश्ते में दरार, कारण हैं हजार

कोई रिश्ता परफेक्ट नहीं होता। दोस्तों की बात अलग है। निकट के रिश्तों में दूरियां आते देर नहीं लगती। कैसे संभाले और ताउम्र बचा कर रखें ये रिश्ते।

आपके साथ भी ऐसा हुआ होगा, पहली मुलाकात में आपको अपनी सास, ननद या जेठानी बेहद खुले विचारों की और दोस्ताना लगी होंगी। पर जब आपने साथ रहना शुरू किया, तो छवि बदलते देर नहीं लगी। आपको लगता है कि रिश्ते में दूसरों का पलड़ा हमेशा भारी रहता है और आप हमेशा देने वाली मुद्रा में रहती हैं। अगर आप अपने अंदर झांकें और खुद से कुछ सवाल करें तो पाएंगी कि आप जिस रिश्ते में जितना देती हैं, बदले में आप उतना ही पाती हैं। कैसे संवारें अपने रिश्तों कोः

कहते हैं, प्यार में कोई शर्त नहीं होती। इसका मतलब है, जो जैसा है, उसे उसी रूप में प्यार करना। लेकिन यही बात समय बीतने के साथ उसी रिश्ते में दरार का कारण बनती है। प्यार, देखभाल, विश्वास और सम्मान रिश्ते की जरूरत है। साथ ही साथ कुछ रिश्तों में समय भी देना पड़ता है। आप किसी के बारे में भी राय बनाने से पहले अपने आप को भी तौल लें। कई बार आप अपने जरूरत के हिसाब से भी रिश्ते बनाती हैं। नाजुक रिश्ते तभी मजबूत बनते हैं, जब आप दिल से उन्हें अपनाएंगी और उन्हें खुद को अपनाने देंगी।

जब एक रिश्ते में सोच, विचार, आकांक्षा, मूल्यों तथा रहन-सहन में कोई सामंजस्य नहीं होता तो देर-सबेर परेशानी आनी तय है। आपको कुछ समय बाद पता चल जाएगा कि आप इस रिश्ते को जितना प्यार दे रही हैं, क्या आपको मिल रहा है? अपनी बात स्पष्ट रूप से रखना भी सीखें। अपनी किसी सहेली या घर वालों की राय लेने से पहले यह भी देख लें कि कहीं आप रिश्ते बनाने या तोड़ने में जल्दबाजी तो नहीं कर रहीं?

विवाह सलाहकार डॉक्टर कुसुम शर्मा कहती हैं, ‘आज की तारीख में लगभग पचास प्रतिशत शादियों में टकराव की वजह परिवार होता है। कभी लड़के के परिवार वाले हावी हो जाते हैं, तो कभी लड़की के। पति-पत्नी के लिए जरूरी है कि वे दोनों परिवारों को अपने रिश्ते पर हावी होने ना दें। यह समझना जरूरी है कि कुछ रिश्तों को बनाने में वक्त लगता है।‘

दूसरे को सम्मान न देना

कुछ महिलाओं और पुरुषों की यह सोच होती है कि यदि कोई हमसे प्यार करता है या हमारा जीवनसाथी है तो उसे हमारी हर बात माननी ही होगी। ऐसे लोग सारे निर्णय स्वयं लेना चाहते हैं और अपने साथी की बात व विचार को सम्मान नहीं देते हैं। इस स्थिति को भले ही कुछ समय के लिए नजरंदाज कर दिया जाए, पर ऐसे रिश्ते ताउम्र नहीं टिक पाते। कुछ समय बात बिखर जाते हैं।

दूसरों पर यकीन करें:

मां के घर में भी आपने अपने बहन-भाई, दादा-दादी और दूसरे रिश्तेदारों के साथ सामंजस्य बनाया ही होगा। बहनों की भी आपस में लड़ाइयां होती हैं और मनमुटाव भी। ऐसा ही मनमुटाव अगर सास या ननद से हो जाए, तो आप दिल पर क्यों ले लेती हैं? आप अपने किसी भी रिश्ते की तुलना एक-दूसरे से ना करें। सभी रिश्तों पर यकीन करें। आपका यकीन आपको धोखा नहीं देगा। रिश्तों की मजबूती के लिए वक्त चाहिए। आप अगर अपने आपको नहीं खोलेंगी, तो रिश्ते कभी आपके दिल को नहीं छू पाएंगे।

खुलकर विचारों का आदान-प्रदान न करनाः

किसी भी रिश्ते में विचारों का आदान-प्रदान व दूसरे के विचारों को सम्मान देना बेहद जरूरी होता है। जिन रिश्तों में संवाद की कमी होती है, उनमें अक्सर मतभेद, मनभेद में बदल जाते हैं, परिणामस्वरूप रिश्ता धीरे-धीरे टूटने की कगार पर पहुंच जाता है।

व्यवहार से जुड़ी परेशानी

कोई भी इंसान ऐसे व्यक्ति के साथ वक्त बिताना नहीं पसंद करता जो जरूरत से ज्यादा गुस्से वाला हो या अत्यधिक शांत रहने वाला हो। ऐसे रिश्ते में विचारों, खुशियों व दुखों का आदान-प्रदान नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप साथी कुंठित महसूस करने लगता है। यह कुंठा कुछ समय बाद असहनीय हो जाती है और रिश्ता टूटने का कारण बन जाता है। खुशनुमा रिश्ते के लिए अपने साथी के साथ अपनी भावनाएं, अपने अनुभव, अपनी सोच जरूर साझा करें।

रिश्ते में उदासीनता आना

अक्सर शादी के कुछ सालों बाद हर रिश्ते में उदासीनता आने लगती है। प्पैसा, घर और गाड़ी पाने की दौड़ में आप रिश्तों की गर्माहट को भूलने लगती हैं। रिश्तों में एक किस्म की प्रतिद्वंद्विता घर करने लगती है। यह वक्त है रिश्तों की ओवर हॉलिंग का। उम्र के इस दौर में आपको भी अपनों का साथ चाहिए। देर नहीं हुई है। आप एक मैसेज करिए, फोन घुमाइए और उन सबको इकट्ठा कीजिए। पहले की तरह मनपसंद खाना और गप्पबाजी के साथ अपने आपको तरोताजा कीजिए। ये वो लोग हैं, जो आपके साथ चलते आए हैं और हमेशा चलेंगे।

 

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