CM मोहन ने पीड़ित परिवारों से की मुलाकात, बोले– इस दुख की घड़ी में हम साथ हैं

खंडवा
मुख्यमंत्री मोहन यादव खंडवा के पंधाना पहुंचे और यहां हादसे में हताहत हुए परिवारों को सांत्वना दी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक-एक कर सभी पीड़ित परिवारों से बात की और उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने सभी पीड़ित परिवारों को चार-चार लाख रुपए की आर्थिक सहायता के चेक भी दिए। इस पूरी घटना पर दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह हादसा बहुत ही हृदयविदारक है।

 “इस दुख की घड़ी में मैं सभी पीड़ित परिवारों के साथ हूं। मैं उनका दुख साझा करने के लिए स्वयं यहां आया हूं। हमने सरकार की ओर से सभी मृतकों के परिवारों की मदद करने की पूरी कोशिश की है।”

उन्होंने बताया कि घटना में मृतकों के परिवारों को चार लाख रुपए, गंभीर रूप से घायल लोगों को एक लाख रुपए और कम घायल हुए लोगों को 50-50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा, जिन्होंने इस घटना में लोगों को बचाने का काम किया, उन्हें 26 जनवरी को पुरस्कार दिया जाएगा और 51,000 रुपए के साथ उन्हें सम्मानित किया जाएगा। 

सीएम ने पीड़ित परिवारों से की मुलाकात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शाम 3.40 बजे खंडवा के पाडलफाटा गांव पहुंचे। यहां प्रशासन ने एक टेंट के नीचे सभी पीड़ित परिवारों को बुलवा लिया था। सीएम ने करीब 25 मिनट तक पीड़ित परिवारों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए की मुआवजा राशि दी गई हैं।

घायलों को 50 हजार रुपए और गंभीर घायलों को एक-एक लाख रुपए की राशि दी जाएगी। साथ ही जामली के जिन ग्रामीणों ने लोगों की जान बचाई हैं, उन युवाओं को भी पुरस्कृत किया जाएगा।

एक ही वक्त जली 11 चिताएं

खंडवा में विसर्जन के दौरान हुए हादसे में जान गंवाने वाले 11 लोगों का शुक्रवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। गुरुवार को जहां शोभायात्रा में सभी डीजे पर डांस कर रहे थे, आज वहीं परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे गांव में शोक का माहौल है।

जिस 8 साल की चंदा का शव सबसे आखिरी में पानी से निकाला गया था, उसकी दो छोटी बहनें हैं। दोनों बहनें चंदा के शव के आसपास खेलती रहीं। वे इस बात से अनजान हैं कि उनकी बड़ी बहन चंदा की मौत हो चुकी है।

बता दें, खंडवा में गुरुवार को दुर्गा विसर्जन के दौरान डैम के बैकवाटर में ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट जाने से 11 लोगों की जान चली गई थी। ट्रॉली में दुर्गा प्रतिमा के साथ करीब 30 लोग सवार थे। जान गंवाने वालों में 8 साल की बच्ची से लेकर 25 साल तक की महिला शामिल है।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने विजयादशमी के अवसर पर खंडवा और उज्जैन जिले में घटित अलग-अलग घटनाओं में नागरिकों की असामयिक मृत्यु पर गहरा दु:ख व्यक्त किया है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से दिवंगत नागरिकों की आत्मा की शांति और प्रभावित परिवारों को यह दु:ख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है. मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में विजयदशमी के दिन एक बड़ा हादसा हो गया था. माता की प्रतिमा विसर्जन से लौट रहे ग्रामीणों से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली नदी में गिर गई थी, यह हादसा पंधाना थाना क्षेत्र के जामली गांव के पास आबना में हुआ था.

गांव में भारी पुलिस बल तैनात पंधाना सिविल अस्पताल से शवों को एक-एक कर एम्बुलेंस से गांव लाया गया। संवेदनशील हालात को देखते हुए प्रशासन ने पाडला फाटा में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। एडिशनल एसपी महेंद्र तारणेकर और डीएसपी हेडक्वार्टर अनिल सिंह चौहान मौके पर मौजूद रहे।

मंत्री विजय शाह और पटवारी गांव पहुंचे मंत्री विजय शाह ने पाडलफाटा में मृतकों के परिजन से घर-घर जाकर मुलाकात की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पीड़ित परिवारों के साथ है। हर संभव मदद की जाएगी। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी भी गांव पहुंचे और मृतकों के परिजनों से मुलाकात की।

इन मृतकों की हुई पहचान 

इस हादसे में अब तक 11 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. मृतकों में शर्मिला (16 वर्ष), आरती (18 वर्ष), दिनेश (16 वर्ष), उर्मिला (16 वर्ष), गणेश (16 वर्ष), किरण (14 वर्ष), पातलीबाई (22 वर्ष), रेव सिंह (12 वर्ष), आयुष (10 वर्ष), संगीता (16 वर्ष), और चंदा (8 वर्ष) शामिल हैं.
सीएम मोहन ने मदद का किया ऐलान

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने नई दिल्ली प्रवास में दोनों जिले की घटनाओं की जानकारी प्राप्त होते ही उज्जैन और खंडवा कलेक्टर को इन घटनाओं में दिवंगत नागरिकों के परिजन को 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि देने के निर्देश दिए. इसके साथ ही इन घटनाओं में घायल हुए व्यक्तियों का समुचित उपचार सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं.

उन्‍होंने पोस्‍ट में आगे लिखा, "मृतकों के निकटतम परिजनों को 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि और घायलों को नजदीकी अस्पताल में समुचित उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. देवी मां दुर्गा से सभी घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और शोक संतप्त परिजनों को संबल हेतु प्रार्थना है."

यह दर्दनाक हादसा उस समय हुई जब ट्रैक्टर-ट्रॉली पुलिया पार कर रही थी. अचानक संतुलन बिगड़ने से ट्रैक्टर-ट्रॉली नदी में जा गिरी. ट्रॉली में महिलाओं और बच्चों सहित करीब 14 से ज्यादा लोग सवार थे. हादसे के तुरंत बाद अफरा-तफरी मच गई. ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को बचाने का प्रयास किया.

ट्रैक्टर-ट्रॉली तालाब तक ले जाने को लेकर दो अलग-अलग बातें

1. कोटवार ने रोका, ट्रैक्टर ड्राइवर नहीं माना… जामली गांव के लोगों ने बताया कि तालाब तक जाने वाली पुरानी सड़क पर एक पुलिया है। तालाब में ज्यादा पानी होने पर यह पुलिया डूब जाती है। इन दिनाें तालाब में पानी कम है, तो पुराने रोड पर तालाब के पास एक कोटवार लोकेंद्र बारे की ड्यूटी भी लगी थी।

कोटवार ने ट्रैक्टर ड्राइवर को तालाब के अंदर जाने से रोका भी था, लेकिन वो नहीं माना। पुलिया पर हल्का पानी था। पुलिया पार करते समय ट्रैक्टर का पहिया नीचे उतर गया। ट्राली में ही ग्रामीणों के साथ दुर्गा प्रतिमा भी रखी हुई थी। लोग मूर्ति और ट्रॉली के नीचे दब गए। लोकेंद्र बारे ने बताया कि ड्राइवर नशे में लग रहा था।

2. तैरना जानते थे फिर भी जान नहीं बची… प्रत्यक्षदर्शी जालम सिंह ने बताया कि ड्राइवर दीपक किराड़े ट्रैक्टर को तालाब की पाल के ऊपर ले गया था। ट्रॉली में बैठे लोगों ने उससे पानी में नीचे उतरने को कहा। ड्राइवर तालाब किनारे ट्रैक्टर ले गया। कुछ लोग तालाब किनारे ही उतर गए। ट्रॉली में बैठे कुछ युवाओं ने ट्रैक्टर पानी में और आगे ले जाने को कहा।

ड्राइवर ने मना किया तो उस पर दबाव बनाया। ट्रैक्टर आगे बढ़ाते ही पानी में पलट गया। कुछ लोग तैरकर बाहर आ गए, लेकिन जो ट्रॉली के नीचे फंस गए, उनकी मौत हो गई, जबकि वे भी तैरना जानते थे। फंसते नहीं तो जान बच जाती।

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