उमरिया में 4.8 डिग्री तापमान, मध्य प्रदेश के 24 शहरों में 10 डिग्री से कम पारा, ठिठुरते लोग

भोपाल 

मध्य प्रदेश में दिसंबर की शुरुआत से ही ठंड ने जोर पकड़ा हुआ है, वहीं अब हाड़ कंपा देने वाली ठंड की एंट्री हो गई है. बर्फीली हवाओं ने प्रदेश पर ऐसा असर किया है कि शुक्रवार को पचमढ़ी हिल स्टेशन से ज्यादा ठंडा रीवा हो गया है. यहां रात का न्यूनतम तापमान 5.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि पचमढ़ी में तापमान 6.7 डिग्री सेल्सियस रहा.

पहाड़ों पर बर्फबारी से बढ़ी ठिठुरन

पहाड़ों पर भारी बर्फबारी और उत्तरी हवाओं ने मध्य प्रदेश में ठिठुरन बढ़ा दी है. गुरुवार-शुक्रवार रात राजधानी भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर समेत 19 से ज्यादा शहरों का तापमान गोता लगाते हुए 10 डिग्री सेल्सियस के नीचे पहुंच गया था. मौसम विभाग के मुताबिक हिमाचल में वेस्टर्रन डिस्टर्बेंस की वजह से भारी बर्फबारी के आसार हैं, इसी वजह से उत्तरी हवाएं एमपी में भी ज्यादा ठंड ला रही हैं.

मौसम विभाग के अनुसार, पहाड़ी राज्य- हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के चलते बर्फबारी और बारिश होने की संभावना है। यहां से सर्द हवाएं भी एमपी में आ रही है। 7-8 दिसंबर को ठंड का असर और बढ़ेगा।

शुक्रवार-शनिवार की रात में एमपी में पहली बार पारा 5 डिग्री से नीचे आ गया। उमरिया में सबसे कम 4.8 डिग्री दर्ज किया गया। राजगढ़ में 5 डिग्री, रीवा में 5.4 डिग्री, छतरपुर के नौगांव में 5.7 डिग्री और खजुराहो में 6.4 डिग्री, रायसेन में 7.4 डिग्री, दमोह-सतना में 7.5 डिग्री, मंडला में 8 डिग्री, मलाजखंड में 8.1 डिग्री, दतिया में 8.3 डिग्री, गुना में 8.4 डिग्री, बैतूल में 8.5 डिग्री, सीधी में 8.6 डिग्री, छिंदवाड़ा में 8.8 डिग्री, धार में 9.1 डिग्री, श्योपुर, सिवनी-नरसिंहपुर में 9.4 डिग्री, सागर में 9.9 डिग्री रहा।

बड़े शहरों की बात करें तो इंदौर में सबसे कम 6.2 डिग्री, भोपाल में 8.2 डिग्री, ग्वालियर में 7.6 डिग्री, उज्जैन में 10 डिग्री और जबलपुर में पारा 7.8 डिग्री दर्ज किया गया।

दिसंबर में टूटेंगे ठंड के कई रिकॉर्ड

मौसम विभाग के मुताबिक इसबार नवंबर में ही दिसंबर-जनवरी जैसे ठंड पड़ी, जिससे कई रिकॉर्ड टूटे हैं. 1941 के बाद पहली बार राजधानी भोपाल में नवंबर में इतनी तेज ठंड पड़ी. 1941 में जहां नवंबर में 6.1 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तामपान दर्ज किया गया था तो वहीं 17 नवंबर 2025 को यह 5.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. मौसम विभाग का मानना है कि अगर ठंड के ऐसे ही तेवर रहे, तो दिसंबर में भी कई रिकॉर्ड ध्वस्त हो सकते हैं.

कहां कितना रहा न्यूनतम तापमान?

मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर से आ रही हवाओं का सबसे ज्यादा असर ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग पर पड़ा है. वहीं पूरे प्रदेश में औसत तापमान 2 से 3 डिग्री तक नीचे गिर गया है. गुरुवार-शुक्रवार रात रीवा में न्यूनतम तापमान 5.8 डिग्री, राजगढ़ में 6 डिग्री, पचमढ़ी में 6.7 डिग्री, चित्रकूट में 6.8 डिग्री, शिवपुरी में 7 डिग्री, उमरिया में 7.1 डिग्री, ग्वालियर में 7.5 डिग्री, नौगांव में 8.2 डिग्री, भोपाल में 8.2 डिग्री, सतना में 8.6 डिग्री, दमोह-खजुराहो में 9 डिग्री, गुना में 9.5 डिग्री, सीधी में 9.6 डिग्री, मलाजखंड में 9.7 डिग्री और जबलपुर व धार में तापमान 9.9 डिग्री सेल्सियस रहा.

इस बार समय से पहले इतनी ठंड क्यों?

मध्य प्रदेश में समय से पहले इतनी तेज ठंड के पीछे की वजह पहाड़ों पर बर्फबारी को बताया जा रहा है. भोपाल में सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने कहा, '' इस वर्ष उत्तरी राज्यों के पहाड़ी इलाकों में नवंबर की शुरुआत से ही बर्फबारी होने लगी थी. यही वजह है कि मध्य प्रदेश में जैसी ठंड दिसंबर के अंत और जनवरी में पड़ती थी, वैसी नवंबर से पड़ने लगी. दरअसल, उत्तर से आने वाली बर्फीली हवाओं से ही प्रदेश में ज्यादा ठंड पड़ती है. नवंबर की शुरुआत में तेज ठंड के बाद आखिरी सप्ताह में हवा की दिशा बदलते ही तापमान बढ़ गया था, लेकिन दिसंबर में फिर ठंड ने जोर पकड़ा है.''

दिन में भी बढ़ा सर्दी का असर

मध्य प्रदेश के ज्यादातर शहरों में रात के वक्त जहां हाड़ कंपा देने वाली ठंड पड़ रही है, तो वहीं दिन में भी सर्दी का असर बरकरार है. शुक्रवार को नरसिंहपुर में दिन का अधिकतम तापमान 23.2 डिग्री सेल्सियस, बैतूल में 23.7 डिग्री, शिवपुरी में 24 डिग्री, धार में 24.4 डिग्री, नौगांव में 24.5 डिग्री, श्योपुर में 24.6 डिग्री और रीवा में 24.8 डिग्री रहा. वहीं बड़े शहर भोपाल, इंदौर, जबलपुर व ग्वालियर में भी दिन का अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस का आसपास रहा.

पचमढ़ी से भी ठंडी रही रीवा की रात
बीती रात रीवा प्रदेश में सबसे ठंडा इलाका रहा। यहां न्यूनतम तापमान 5.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो राज्य के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी से भी कम रहा। भोपाल में पारा 8.2 डिग्री, ग्वालियर में 7.5 डिग्री, जबलपुर में 9.9 डिग्री, इंदौर में 11 डिग्री और उज्जैन में 11.7 डिग्री दर्ज हुआ। राजगढ़-कल्याणपुर में 6 डिग्री, पचमढ़ी 6.7, चित्रकूट 6.8, शिवपुरी 7, उमरिया 7.1, नौगांव 8.2, सतना 8.6, दमोह और खजुराहो में 9 डिग्री, गुना 9.5, सीधी 9.6, मलाजखंड 9.7 और धार में 9.9 डिग्री न्यूनतम तापमान रहा।

दिन के तापमान में भी गिरावट
सर्द हवाओं का असर दिन में भी देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को पचमढ़ी और नरसिंहपुर में अधिकतम तापमान 23.2 डिग्री दर्ज किया गया। बैतूल 23.7, शिवपुरी 24, धार-सिवनी 24.4, नौगांव 24.5, श्योपुर 24.6, रीवा 24.8 और टीकमगढ़ में तापमान 25 डिग्री के आसपास रहा। पांच प्रमुख शहरों में भोपाल का अधिकतम तापमान 25 डिग्री, इंदौर 24.8, ग्वालियर 25.6, जबलपुर 25.3 और उज्जैन में 26.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

दिसंबर में भी पड़ेगी कड़ी ठंड
मौसम विभाग का अनुमान है कि इस बार ठंड का दौर लंबा और अधिक प्रभावी रहेगा। भोपाल में नवंबर महीने की ठंड ने 84 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया, जबकि इंदौर में 25 वर्षों में सबसे ज्यादा ठंड दर्ज की गई। इसी तरह दिसंबर में भी ठंड नए रिकॉर्ड बना सकती है।

नवंबर पहले ही बना चुका है रिकॉर्ड
भोपाल में इस बार नवंबर में लगातार 15 दिन तक शीतलहर का असर रहा, जो साल 1931 के बाद सबसे लंबा दौर माना जा रहा है। 17 नवंबर की रात न्यूनतम तापमान 5.2 डिग्री तक लुढ़क गया था, जो अब तक का सबसे कम स्तर रहा। इससे पहले 1941 में पारा 6.1 डिग्री तक गिरा था। वहीं इंदौर में भी तापमान 6.4 डिग्री तक पहुंचा, जो पिछले 25 साल में सबसे ठंडी रात रही। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार, उत्तर भारत में नवंबर की शुरुआत से ही बर्फबारी शुरू हो गई थी, जिसकी वजह से ठंडी हवाओं का असर मध्यप्रदेश में तेजी से देखने को मिला। हालांकि नवंबर के अंतिम दिनों में हवाओं की दिशा बदलने से कुछ राहत भी मिली।

दिसंबर-जनवरी सबसे ज्यादा सर्द
मौसम विभाग का कहना है कि जैसे मानसून के दौरान जुलाई और अगस्त अहम होते हैं, वैसे ही शीत ऋतु में दिसंबर और जनवरी सबसे ज्यादा ठंडे रहते हैं। इन्हीं महीनों में उत्तर भारत से सबसे अधिक ठंडी हवाएं प्रदेश में प्रवेश करती हैं। पिछले 10 वर्षों के आंकड़े भी इसी रुझान की पुष्टि करते हैं। पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने पर दिसंबर में मावठा गिरने से दिन की ठंड भी बढ़ जाती है।

दिन भी सर्द हुए…पचमढ़ी-नरसिंहपुर में पारा 23.2 डिग्री रात के समय दिन भी सर्द हो गए हैं। शुक्रवार को पचमढ़ी-नरसिंहपुर में 23.2 डिग्री, बैतूल में 23.7 डिग्री, शिवपुरी में 24 डिग्री, धार-सिवनी में 24.4 डिग्री, नौगांव में 24.5 डिग्री, श्योपुर में 24.6 डिग्री, रीवा में 24.8 डिग्री, टीकमगढ़ में 25 डिग्री, दतिया-खजुराहो में 25.1 डिग्री, उमरिया, दमोह-सीधी में 25.2 डिग्री, गुना में 25.4 डिग्री, छिंदवाड़ा में 25.6 डिग्री रहा।

5 बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 25 डिग्री, उज्जैन में 26.5 डिग्री, इंदौर में 24.8 डिग्री, ग्वालियर में 25.6 डिग्री और जबलपुर में पारा 25.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

दिसंबर में भी रिकॉर्ड तोड़ेगी सर्दी मौसम विभाग की माने तो इस बार सर्दी का असर तेज रहा है। भोपाल में नवंबर की सर्दी का 84 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है, जबकि इंदौर में 25 साल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी है। ऐसी ही सर्दी दिसंबर में भी रहेगी।

नवंबर में रिकॉर्ड तोड़ चुकी है सर्दी इस बार नवंबर में सर्दी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली। रिकॉर्ड के अनुसार, साल 1931 के बाद शीतलहर के यह सबसे ज्यादा दिन है। दूसरी ओर, 17 नवंबर की रात में पारा 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी रहा। इससे पहले 30 नवंबर 1941 में तापमान 6.1 डिग्री रहा था। इंदौर में भी पारा 6.4 डिग्री ही रहा। यहां भी सीजन की सबसे सर्द रात रही। 25 साल में पहली बार पारा इतना लुढ़का।

सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन बताती हैं, इस बार उत्तरी राज्यों में नवंबर के पहले ही सप्ताह में बर्फबारी होने लगी। इस वजह से ठंडी हवाएं प्रदेश में पहुंची। आखिरी सप्ताह में हवा की दिशा बदल गई। जिससे ठंड का असर कम रहा है।

ठंड के लिए दिसंबर-जनवरी खास मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं। इसलिए टेम्परेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं।

  • पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से दिसंबर में मावठा भी गिरता है। इससे दिन में भी सर्दी का असर बढ़ जाता है।
  • सुबह कोहरा…इसलिए गाड़ी संभलकर चलाने की सलाह प्रदेश में ठंड का असर भले ही कम हुआ हो, लेकिन सुबह व रात में कोहरा छा रहा है। इसलिए एक्सपर्ट ने लोगों को सुरक्षित ड्राइविंग करने की सलाह दी है। मौसम विभाग ने हेल्थ और फसलों को लेकर एडवाइजरी भी जारी की है।
  •     ट्रैफिक – कोहरा होने पर गाड़ी चलाते समय या किसी ट्रांसपोर्ट के जरिए ट्रैवल करते समय सावधान रखें। ड्राइविंग धीरे करें और फॉग लाइट का इस्तेमाल करें।
  •     हेल्थ- तेज ठंड होने पर शरीर की गर्माहट बनाए रखने के लिए सिर, गर्दन, हाथ-पैर की उंगलियों को अच्छे से ढंके। फ्लू, सर्दी, खांसी-जुकाम होने पर डॉक्टर को दिखाए। विटामिन सी से भरपूर फल और सब्जियां खाएं।
  •     कृषि- जहां मिट्‌टी में पर्याप्त नमी हो, वहां गेहूं, चना, सरसों-मटर की बुआई करें। जहां बुआई हो चुकी है, वहां जरूरत पड़ने पर कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लें। पिछली फसलों के अवशेष यानी, ठूंठ को कभी न जलाएं।

अब जानिए दिसंबर में कैसा रहेगी ठंड?

मौसम का ट्रेंड देखें तो दिसंबर में स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आते हैं। वहीं, उत्तरी हवाएं आने से दिन-रात के तापमान में गिरावट होती है। इस बार भी यही अनुमान है।

इन जिलों में सबसे ज्यादा सर्दी रहेगी

  •     ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के सभी जिलों में कड़ाके की ठंड पड़ेगी। यहां बर्फीली हवाएं सीधे आएंगी।
  •     भोपाल संभाग के सीहोर-विदिशा में ठंड का जोर रहेगा।
  •     सागर संभाग के निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़-पन्ना, रीवा संभाग के मऊगंज, सीधी-सिंगरौली में तेज ठंड पड़ेगी।
  •     जबलपुर संभाग के मंडला-डिंडौरी, इंदौर संभाग के इंदौर, धार और झाबुआ में कड़ाके की ठंड रहेगी।

20-22 दिन चल सकती है कोल्ड वेव मौसम एक्सपर्ट की माने तो दिसंबर में प्रदेश के कई शहरों में कोल्ड वेव यानी सर्द हवाएं चलेंगी। जनवरी में यह 20 से 22 दिन तक चल सकती है।

इसलिए रहेगा कड़ाके की ठंड का दौर

ला नीना ने दिया ठंड को लंबा धक्का

    मौसम केंद्र भोपाल के रिटायर्ड डायरेक्टर डीपी दुबे के अनुसार, वैश्विक मौसम मॉडल (विश्व मौसम संगठन, भारत मौसम विज्ञान विभाग आदि) संकेत दे रहे थे कि इस बार ला नीना सक्रिय रहेगा। ला नीना का मतलब, प्रशांत महासागर का ठंडा होना। जैसे ही समुद्र ठंडा होता है, हवा और ज्यादा ठंडी होकर एशिया-भारत की ओर दबाव से धकेली जाती है। यह वही ठंड है जिसने नवंबर से ही मध्य भारत को जकड़ लिया।

पहाड़ों पर जल्दी बर्फबारी, ठिठुरन बढ़ाई

    इस बार उत्तर भारत में हिमाचल, उत्तराखंड और कश्मीर में बर्फबारी सामान्य से काफी पहले शुरू हो गई। ऊंचे पर्वतीय इलाकों की जल्दी बर्फबारी मध्य भारत की ठिठुरन को 20 से 30% तक बढ़ा देती है।

ठंडी हवाएं 25% ज्यादा अंदर तक घुसीं

    ठंड का असर सिर्फ सतह तक नहीं रहा। इस साल ग्वालियर-चंबल, भोपाल-विदिशा, रतलाम-मंदसौर, सागर-दमोह इन चार बड़े मौसम जोन में ठंडी हवाएं 20 से 25% ज्यादा गहराई तक घुस आईं।

पश्चिमी विक्षोभ का लगातार सक्रिय रहना

    पश्चिमी विक्षोभ जब सक्रिय होता है, तो हल्की सर्दी की बारिश (मावठा) होती है। तापमान 4 से 6 डिग्री तक गिर जाता है। इसीलिए भोपाल, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम में बारिश ठंड को तेज करेगी। इंदौर-देवास, भोपाल-सीहोर, ग्वालियर-मुरैना में दिन का पारा कई बार 4 से 6 डिग्री तक गिरकर कोल्ड-डे ला सकता।

 

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