मध्य प्रदेश में शीतलहर का प्रकोप, इंदौर में 5.2 डिग्री, भोपाल और ग्वालियर में पारा गिरा; 5 जिलों में अलर्ट

भोपाल 

मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड का दौर जारी है। प्रदेश का तापमान 5 डिग्री से नीचे पहुंच गया है। अधिकांश शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। शहडोल का कल्याणपुर एक बार फिर सबसे सर्द रहा। यहां न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री रहा। वहीं इंदौर में बीते 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया। दरअसल, पचमढ़ी से भी ठंडी इंदौर की रात रही है। यहां रात का तापमान 4.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

मौसम विभाग के अनुसार, बीती रात अधिकांश शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे ही रहा। राजगढ़ में 5.2 डिग्री, नौगांव में 6.4 डिग्री, उमरिया में 6.6 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री, मलाजखंड में 7.2 डिग्री, मंडला में 7.6 डिग्री, रायसेन, शिवपुरी-नरसिंहपुर में 8 डिग्री, बैतूल में 8.5 डिग्री, छिंदवाड़ा-खजुराहो में 9 डिग्री, सतना में 9.1 डिग्री, टीकमगढ़-रतलाम में 9.5 डिग्री, दमोह में 9.8 डिग्री और दतिया में 9.9 डिग्री सेल्सियस रहा।

मौसम विभाग के मुताबिक, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हुई बर्फबारी से मध्य प्रदेश में कड़ाके की सर्दी देखने को मिल रही है। प्रदेश में आ रही उत्तरी हवाओं के चलते शीतलहर की स्थिति बनी है। आज शुक्रवार को पांच जिलों भोपाल, इंदौर, राजगढ़, शाजापुर और सीहोर में कोल्ड वेव का अलर्ट है। इससे पहले गुरुवार को भोपाल, इंदौर, राजगढ़, सीहोर और रायसेन में शीतलहर चली। वहीं शहडोल में कोल्ड डे यानी, शीतल दिन रहा।

प्रदेश में पारा 5 डिग्री से नीचे पहुंच गया है। अधिकांश शहरों में 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। शहडोल का कल्याणपुर सबसे ठंडा रहा, यहां न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री रिकॉर्ड हुआ। इंदौर में 4.5 डिग्री, पचमढ़ी में 4.8 डिग्री, राजगढ़ में 5 डिग्री और शाजापुर के गिरवर में 5.2 डिग्री तापमान रहा।

204 किमी की रफ्तार से बह रही जेट स्ट्रीम मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जेट स्ट्रीम का असर भी है। यह जमीन से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 204 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बह रही है। जिसका असर एमपी में भी है। इस कारण शुक्रवार को भी शीतलहर का अलर्ट है।

क्या होती है जेट स्ट्रीम? मौसम एक्सपर्ट की माने तो प्रदेश में ठंड बढ़ने की वजह खास वजह जेट स्ट्रीम भी है। यह जमीन से लगभग 12 किमी ऊंचाई पर चलने वाली तेज हवा है। इसकी रफ्तार 222 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई है। यह देश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय है।

पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवा के अलावा ये ऊंची हवा इस बार सर्दी बढ़ाएगी। उत्तर के मैदानी इलाकों से जब ठंडी हवा और पहाड़ी इलाकों से बर्फीली हवा हमारे यहां आती है, तब तेज ठंड पड़ती है। यह सब उत्तर भारत में पहुंचने वाले मौसमी सिस्टम वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण होता है। ऐसे में यदि जेट स्ट्रीम भी बन जाए तो सर्दी दोगुनी हो जाती है। इस बार यही होना है।

उत्तर से बर्फीली हवाएं आ रही देश के उत्तरी हिस्से यानी, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में बर्फबारी हुई है। इस वजह से हवा की रफ्तार उत्तरी हो गई हैं। बर्फीली हवा की वजह से ही प्रदेश में शीतलहर की स्थिति है।

दिसंबर में भी रिकॉर्ड तोड़ रही सर्दी मौसम विभाग की माने तो इस बार सर्दी का असर तेज है। भोपाल में नवंबर की सर्दी का 84 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है, जबकि इंदौर में 25 साल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी है। ऐसी ही सर्दी दिसंबर में भी है। इंदौर में दिसंबर की सर्दी का 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया है।

नवंबर में रिकॉर्ड तोड़ चुकी है सर्दी इस बार नवंबर में सर्दी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली। रिकॉर्ड के अनुसार, साल 1931 के बाद शीतलहर के यह सबसे ज्यादा दिन है। दूसरी ओर, 17 नवंबर की रात में पारा 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी रहा। इससे पहले 30 नवंबर 1941 में तापमान 6.1 डिग्री रहा था। इंदौर में भी पारा 6.4 डिग्री ही रहा। यहां भी सीजन की सबसे सर्द रात रही। 25 साल में पहली बार पारा इतना लुढ़का।

ठंड के लिए दिसंबर-जनवरी खास मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं। इसलिए टेम्परेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से दिसंबर में मावठा भी गिरता है। इससे दिन में भी सर्दी का असर बढ़ जाता है।

अब जानिए दिसंबर में कैसी रहेगी ठंड?

मौसम का ट्रेंड देखें तो दिसंबर में स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आते हैं। वहीं, उत्तरी हवाएं आने से दिन-रात के तापमान में गिरावट होती है। इस बार भी यही अनुमान है।

इन जिलों में सबसे ज्यादा सर्दी रहेगी

  •     ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के सभी जिलों में कड़ाके की ठंड पड़ेगी। यहां बर्फीली हवाएं सीधे आएंगी।
  •     भोपाल संभाग के सीहोर-विदिशा में ठंड का जोर रहेगा।
  •     सागर संभाग के निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़-पन्ना, रीवा संभाग के मऊगंज, सीधी-सिंगरौली में तेज ठंड पड़ेगी।
  •     जबलपुर संभाग के मंडला-डिंडौरी, इंदौर संभाग के इंदौर, धार और झाबुआ में कड़ाके की ठंड रहेगी।

20-22 दिन चल सकती है कोल्ड वेव मौसम एक्सपर्ट की मानें तो दिसंबर में प्रदेश के कई शहरों में कोल्ड वेव यानी सर्द हवाएं चलेंगी। जनवरी में यह 20 से 22 दिन तक चल सकती है।

इसलिए रहेगा कड़ाके की ठंड का दौर

ला नीना ने दिया ठंड को लंबा धक्का

    मौसम केंद्र भोपाल के रिटायर्ड डायरेक्टर डीपी दुबे के अनुसार वैश्विक मौसम मॉडल (विश्व मौसम संगठन, भारत मौसम विज्ञान विभाग आदि) संकेत दे रहे थे कि इस बार ला नीना सक्रिय रहेगा। ला नीना का मतलब, प्रशांत महासागर का ठंडा होना। जैसे ही समुद्र ठंडा होता है, हवा और ज्यादा ठंडी होकर एशिया-भारत की ओर दबाव से धकेली जाती है। यह वही ठंड है जिसने नवंबर से ही मध्य भारत को जकड़ लिया।

पहाड़ों पर जल्दी बर्फबारी, ठिठुरन बढ़ाई

    इस बार उत्तर भारत में हिमाचल, उत्तराखंड और कश्मीर में बर्फबारी सामान्य से काफी पहले शुरू हो गई। ऊंचे पर्वतीय इलाकों की जल्दी बर्फबारी मध्य भारत की ठिठुरन को 20 से 30% तक बढ़ा देती है।

ठंडी हवाएं 25% ज्यादा अंदर तक घुसीं

    ठंड का असर सिर्फ सतह तक नहीं रहा। इस साल ग्वालियर-चंबल, भोपाल-विदिशा, रतलाम-मंदसौर, सागर-दमोह इन चार बड़े मौसम जोन में ठंडी हवाएं 20 से 25% ज्यादा गहराई तक घुस आईं।

पश्चिमी विक्षोभ का लगातार सक्रिय रहना

    पश्चिमी विक्षोभ जब सक्रिय होता है, तो हल्की सर्दी की बारिश (मावठा) होती है। तापमान 4 से 6 डिग्री तक गिर जाता है। इसीलिए भोपाल, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम में बारिश ठंड को तेज करेगी। इंदौर-देवास, भोपाल-सीहोर, ग्वालियर-मुरैना में दिन का पारा कई बार 4 से 6 डिग्री तक गिरकर कोल्ड-डे ला सकता।

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