इंडिगो विवाद: बीमारी से जूझ रहे कैप्टन पर गिरी गाज, कंपनी ने संकट का ठीकरा उन्हीं पर फोड़ा!

नई दिल्ली 
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो में जारी ऑपरेशनल संकट के बीच नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के एक बड़े फैसले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। विमानन विशेषज्ञों ने DGCA द्वारा चार वरिष्ठ फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर्स (FOIs) की सेवाएं समाप्त किए जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि इनमें से कुछ अधिकारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में विमानन विशेषज्ञ संजय लाजर ने कहा कि उन्हें एक चौंकाने वाली सच्चाई पता चली है। उन्होंने लिखा कि चार में से कुछ पायलट ऐसे हैं जिनका इंडिगो संकट से कोई लेना-देना नहीं था, फिर भी उन्हें जिम्मेदार ठहराया गया। लाजर ने विशेष रूप से कैप्टन अनिल कुमार पोखरियाल का जिक्र करते हुए कहा कि वह एडवांस स्टेज कैंसर से जूझ रहे हैं, अस्पताल में भर्ती हैं और काफी पहले ही इस्तीफा दे चुके थे। इसके बावजूद उन पर कार्रवाई की गई।

DGCA ने 11 दिसंबर को चार FOI को बर्खास्त करने का आदेश जारी किया। बर्खास्त किए गए अधिकारियों के नाम हैं:
    रिषि राज चटर्जी (कंसल्टेंट, डिप्टी चीफ FOI)
    सीमा झामनानी (सीनियर FOI)
    अनिल कुमार पोखरियाल (कंसल्टेंट, FOI)
    प्रियम कौशिक (कंसल्टेंट, FOI)

लाजर ने एक वाट्सऐप चैट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा- मुझे अभी एक चौंकाने वाली सच्चाई पता चली है कि इन 4 पायलटों में से कुछ को किसी और के अपराधों के लिए बलि का बकरा बनाया जा रहा है। कैप्टन पोखरियाल हॉस्पिटल में हैं और उन्हें एडवांस कैंसर है और उन्होंने बहुत पहले ही इस्तीफा दे दिया था। उनका FDTL से भी कोई लेना-देना नहीं था (बाकी 2 लोगों का भी यही हाल है) इन लोगों को फंसाया जा रहा है। कैप्टन, नोटिस के आधार पर आपको जज करने के लिए माफी चाहता हूं और जल्दी ठीक हो जाइए।

लाजर के अलावा, डॉ. नीलिमा श्रीवास्तव नाम की एक यूजर ने एक्स पर लिखा- इंडिगो संकट में DGCA द्वारा सस्पेंड किए गए चार FOI में से एक, अनिल कुमार पोखरियाल पिछले एक महीने से एडवांस कैंसर से जूझते हुए अस्पताल में हैं। उन्होंने पहले ही इस्तीफा दे दिया था और FDTL मामलों में शामिल नहीं थे, फिर भी उनका नाम लिया गया है। एक ऐसे व्यक्ति को बलि का बकरा बनाया जा रहा है जिसने 35 साल तक सेना में सेवा की, जबकि सिस्टम की कमियों पर कोई सवाल नहीं उठाया जा रहा है। कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों पर दोष लगाना सबसे आसान होता है। असली जवाबदेही अभी भी अछूती है।

हड़बड़ी में लिया गया फैसला या जिम्मेदारी से बचाव?
इन गंभीर आरोपों के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या DGCA ने बिना पूरी जांच के यह कार्रवाई कर दी या फिर ऊपरी स्तर पर हुई चूकों से ध्यान हटाने के लिए कुछ अधिकारियों को निशाना बनाया गया। खासतौर पर तब, जब इंडिगो में सामने आई अव्यवस्थाओं की जड़ नई पायलट ड्यूटी और रेस्ट नियमों के क्रियान्वयन में बताई जा रही है। बीते दिनों इंडिगो के घरेलू नेटवर्क में भारी संख्या में उड़ानें रद्द हुईं, क्रू शेड्यूलिंग फेल रही और यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। इन समस्याओं को नई ड्यूटी और रेस्ट नॉर्म्स से जुड़ी प्लानिंग की चूक से जोड़ा जा रहा है।

फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर्स का क्या काम होता है?
फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर्स यानी FOI, नागर विमानन महानिदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी होते हैं जो इसके नियामक एवं सुरक्षा निरीक्षण कार्यों को अंजाम देते हैं और अकसर विमानन कंपनी के परिचालन की निगरानी के लिए तैनात किए जाते हैं।

इस बीच इंडिगो में परिचालन संकट की जांच कर रही उच्चस्तरीय समिति के समक्ष एयरलाइन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पीटर एल्बर्स शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन पेश हुए। सूत्रों ने बताया कि नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) की तरफ से गठित चार-सदस्यीय समिति ने एयरलाइन के सीईओ के अलावा मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) इसिद्रो पोर्केरास से भी कई घंटों तक पूछताछ की।

सूत्रों ने पीटीआई-भाषा से कहा कि एयरलाइन के दोनों शीर्ष अधिकारियों को चार-सदस्यीय पैनल के सामने अलग-अलग बुलाया गया। एल्बर्स करीब सात घंटे और पोर्केरास लगभग पांच घंटे पैनल के समक्ष रहे। इस दौरान समिति ने इंडिगो के परिचालन में पैदा हुए व्यापक व्यवधान से जुड़े बिंदुओं पर कंपनी के शीर्ष अधिकारियों से सवाल पूछे।

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