ऑपरेशन सिंदूर का कहर: पाकिस्तानी सेना फुल-स्केल वॉर के डर से कांपी, जरदारी को मिली बंकर में जाने की सलाह

इस्लामाबाद 

 पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत के ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान अब तक उबर नहीं पा रहा है। समय-समय पर उसे ऑपरेशन सिंदूर में भारत द्वारा किए गए हमलों की याद आ जाती है। पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने माना है कि 10 मई की सुबह भारत ने उसके नूर खान एयरबेस पर हमला किया था। भारत ने पाकिस्तान पर कितने करारे हमले किए थे, इसकी भी डार ने खुद जानकारी दी। डार ने बताया कि 36 घंटे में भारत ने 80 ड्रोन से हमले किए थे।

डार ने यह भी कहा कि मई के संघर्ष के दौरान इस्लामाबाद ने पाकिस्तान और भारत के बीच मीडिएशन के लिए रिक्वेस्ट नहीं की थी, लेकिन दावा किया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने नई दिल्ली से बात करने की इच्छा जताई थी। भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया, जिसमें पहलगाम हमले के बदले में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। 

पाक‍िस्‍तान के राष्‍ट्रपत‍ि आस‍िफ अली जरदारी ने एक द‍िन पहले कहा क‍ि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमें बंकर में जाने की सलाह दी गई थी. वे अपनी शेखी बघार रहे थे क‍ि इतने विकट हालात के बावजूद वे बंकर में नहीं गए. लेकिन इसी बीच उन्‍होंने पाक‍िस्‍तान के डर का भी खुलासा कर द‍िया. तो आख‍िर ऐसा हुआ क्‍या?. इससे साफ पता चलता है क‍ि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तानी सेना को भारत की ओर से एक बड़े और चौतरफा (Full-scale) हमले का डर सता रहा था. इस खौफ के चलते रावलपिंडी स्थित पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय (GHQ) में हड़कंप मच गया था.

पाकिस्तानी सेना को आशंका थी कि पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा शुरू किया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ सिर्फ आतंकी कैंपों तक सीमित नहीं रहेगा. उन्हें डर था कि यह हवाई ताकत, साइबर ऑपरेशन, गुप्त कार्रवाई और जमीनी हमलों के साथ एक बड़े युद्ध में बदल सकता है. यह घबराहट पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व तक में महसूस की गई थी. राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने खुद खुलासा किया है कि मई में तनाव बढ़ने पर उन्हें बंकर में जाने की सलाह दी गई थी. शनिवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए, जरदारी ने बताया कि उनके मिलिट्री सेक्रेटरी ने उन्हें स्थिति की गंभीरता के बारे में बताया था और चेतावनी दी थी कि “जंग शुरू हो चुकी है” क्योंकि भारतीय बलों ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत सटीक हमले शुरू कर दिए थे.

    जरदारी ने कहा, मेरे मिलिट्री सेक्रेटरी ने मुझसे कहा कि युद्ध शुरू हो गया है और सुझाव दिया कि हम बंकरों में चले जाएं. मैंने मना कर दिया. अगर शहादत लिखी है, तो यहीं होगी. नेता बंकरों में नहीं मरते. मुझे कई दिन पहले ही इस संघर्ष का आभास हो गया था.

सेना का सरकार पर अविश्वास

राष्ट्रपति को किसी सुरक्षित ठिकाने पर भेजने की सलाह पाकिस्तान के सत्ता ढांचे के उस जाने-पहचाने पैटर्न को दिखाती है, जहां सरकार को छिपा द‍िया जाता है और सारे फैसले आर्मी करती है. जरदारी का बंकर में जाने से मना करना केवल व्यक्तिगत साहस नहीं, बल्कि नागरिक सत्ता की धमक के तौर पर देखा गया. राष्ट्रपति को कभी-कभी सेना की सलाह के खिलाफ फैसले लेने के लिए जाना जाता है, जो पाकिस्तान के इतिहास में बहुत कम देखने को मिलता है.

एटॉमिक ‘रेड-लाइन’ और आर्थिक तबाही का डर

    सिर्फ जवाबी हमले का ही डर नहीं था, पाकिस्तानी सेना आंतरिक अस्थिरता को लेकर भी चिंतित थी. उन्हें डर था कि देश की इकॉनमी बर्बाद हो सकती है. जनता विद्रोह कर सकती है और राज्‍यों में फूट पड़ सकती है. इस सैन्य कार्रवाई ने रावलपिंडी को अपनी न्‍यूक्‍ल‍ियर रेड लाइन की समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया, क्योंकि उन्हें डर था कि भारत पाकिस्तान की परमाणु सीमा से ठीक नीचे रहकर भी बड़ी कार्रवाई कर सकता है.

    पाकिस्तानी आर्मी लीडरश‍िप इस बात से सबसे ज्‍यादा डरा हुआ था क‍ि कहीं भारत अटैक के साथ साथ इंफॉर्मेशन वॉरफेयर न करने लगे. क्‍योंक‍ि इससे निपटने के ल‍िए उसके पास कोई इंतजाम नहीं थे.

    बंकर वाली घटना ने यह साबित कर दिया है कि ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल पाक सेना के अंदर रणनीतिक डर पैदा किया, बल्कि दबाव के समय देश की राजनीतिक व्यवस्था में उनके भरोसे की कमी को भी उजागर कर दिया.

क्या था ऑपरेशन सिंदूर?

7 मई की सुबह, इंडियन आर्मी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में 9 आतंकी शिविरों पर सटीक हमले किए थे. यह कार्रवाई पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी.

पहला चरण: अपने शुरुआती चरण में, भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान और पीओके में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े आतंकी शिविरों को ध्वस्त किया. इन हमलों में जैश प्रमुख मसूद अजहर के 10 परिवार वालों और चार करीबी सहयोगियों सहित 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए.

दूसरा चरण: लेकिन जब पाकिस्तान ने भारतीय शहरों और प्रमुख प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की योजना सहित जवाबी सैन्य कार्रवाई का प्रयास किया, तो भारत ने हमले तेज कर दिए. 9-10 मई की रात को अंजाम दिए गए दूसरे निर्णायक चरण में, भारतीय बलों ने नूर खान, सरगोधा, जैकोबाबाद, मुरीद और रफीकी सहित कई प्रमुख पाकिस्तानी एयरबेस पर हमला बोल दिया. इसमें पाकिस्तान को इतना नुकसान हुआ कि इस्लामाबाद आज भी सार्वजनिक रूप से उसका हिसाब देने में संघर्ष कर रहा है. यह संघर्ष चार दिनों तक चला था, जिसमें फाइटर जेट, मिसाइल और तोपखाने का जमकर इस्तेमाल हुआ था.

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