AIIMS ने किया शोध- बुध-गुरु को अचानक हो रहीं सबसे ज्यादा मौतें

नई दिल्ली.

नाचते हुए मौत, खेलते हुए दम तोड़ा, बैठे-बैठे अचानक चली गई जान… पिछले कुछ सालों में आपने ऐसी कई खबरें पढ़ी होंगी, सीसीटीवी वीडियो देखे होंगे और कई तरह की चर्चाएं भी सुनी होंगी। कई बार इसे कोविड वैक्सीन से भी जोड़ने की कोशिश हुई। अब इस तरह की मौतों पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की स्टडी सामने आई है जिसमें अचानक होने वाली मौतों के पैटर्न को समझने की कोशिश की गई है।

आयु, लिंग, स्थान, दिन आदि के आधार पर समझने की कोशिश की गई है कि कौन और कब लोग इसकी जद में आ रहे हैं। एक साल तक चली स्टडी को हाल ही में इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित किया गया है। मेडिकल टर्म में 'सडन डेथ' (अचानक मौत) ऐसे मामलों को माना गया है जिसमें लक्षण दिखने के एक घंटे भीतर मौत हो गई या जिन्हें मरते हुए किसी ने नहीं देखा पर 24 घंटे पहले एकदम स्वस्थ दिखे थे। मई 2023 से अप्रैल 2024 के बीच डॉक्टरों ने कुल 2214 पोस्टमॉर्टम में 180 केसों (8.1 फीसदी) को अचानक मौतों की श्रेणी में पाया। इनमें से 103 ( 57.2 फीसदी) की उम्र 18 से 45 के बीच की थी, जबकि 77 की उम्र 46 से 65 के बीच की थी।

सडन डेथ वाले अधिकांश पुरुष
एक और चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि अचानक हुई मौतों के मामले में पुरुषों और महिलाओं के बीच बहुत बड़ा अंतर है। पुरुष महिला का अनुपात 4.5:1 का है। कम आयु वाले समूह में मरने वाले 77 पुरुष थे तो 17 महिलाएं। वहीं, अधिक उम्र वालों में यह अनुपात 64:4 का है।

दिल ने दिया धोखा
एक निष्कर्ष यह निकला कि अचानक हुई मौतों के मामले में दिल का धोखा अहम कारण है। 42.6 प्रतिशत मामले हृदय संबंधी कारणों से जुड़े पाए गए। उम्र के तीसरे दशक में प्रवेश करने वाले युवाओं में भी हृदय से जुड़ी समस्याएं पाईं गईं। अधिकांश मौतें कोरोनरी आर्टरी डिजीज से संबंधित थीं- यानी हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में गंभीर संकुचन। 70 प्रतिशत से अधिक ब्लॉकेज को गंभीर माना जाता है। जांच में यह पाया गया कि जिन युवा वयस्कों की मौत हुई, उनमें से कई में धमनियों की रुकावट इस स्तर तक या उससे भी अधिक थी। फेफड़ों या सांस से जुड़ी समस्याएं मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण सामने आया। 21.3 फीसदी मृतक इन समस्याओं से ग्रसित थे।

ध्रूम्रपान और शराब कितना बड़ा फैक्टर
अचानक मृत्यु का शिकार हुए आधेक से अधिक (57.4 फीसदी) युवा धूम्रपान की आदत रखते थे, जबकि 52 फीसदी कभी-कभी या नियमित शराब का सेवन करते थे।

हर मौसम में ऐसी मौतें, सप्ताह के बीच ज्यादा कहर
अचानक होने वाली मौतें सभी मौसम के दौरान करीब समान रूप से पाईं गईं। 20.9 फीसदी मौतें (मई से जुलाई), 31 फीसदी अगस्त से अक्टूबर के बीच और 27.8 फीसदी सर्दियों में नवंबर से जनवरी के बीच और 19.1 फीसदी फरवरी से अप्रैल के बीच बसंत के दौरान हुईं। 40.1 फीसदी की मौत रात या सुबह जल्दी हुई, जबकि 30.2 फीसदी सुबह और अन्य दोपहर में हुई। दिनों के लिहाज से देखें तो अधिकतर मौतें गुरुवार और बुधवार को हुईं। 55 फीसदी की मौत घर पर, 30.2 की यात्रा के दौरान और 14.8 फीसदी की कार्यस्थल या या बाहर हुईं।

अचानक मौतों से पहले कैसे लक्षण दिखे
जांच में सामने आया है कि अचानक हुई मौतों के ज्यादातर मामलों में लोगों को पहले अचानक बेहोशी आ गई थी। कुछ लोगों ने मौत से पहले सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, घबराहट, पेट दर्द, उल्टी या बुखार की शिकायत की थी। चिंता की बात यह है कि युवाओं में भी दिल की बीमारी बड़ी वजह बनकर सामने आई है, जबकि उनमें से अधिकतर को पहले से कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। वहीं बुजुर्गों में मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य बीमारियां ज्यादा देखने को मिलीं। यह रिपोर्ट बताती है कि दिल से जुड़ी बीमारियां अब कम उम्र के लोगों के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही हैं।

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