जन्मदिन पर खास: आनंद जैसे दिग्गज को हराने वाले कृष्णन शशिकिरण की सफलता की कहानी

नई दिल्ली
कृष्णन शशिकिरण का नाम शतरंज की दुनिया में प्रतिष्ठा के साथ लिया जाता है। 2002 में कृष्णन शशिकिरण ने भारतीय शतरंज के सबसे बड़े नाम विश्वनाथन आनंद को हराकर तहलका मचा दिया था। कृष्णन शशिकिरण का जन्म 7 जनवरी 1981 को चेन्नई में हुआ था। उनके पिता भी बहुत अच्छे शतरंज खिलाड़ी थे। शशिकिरण ने 9 साल की उम्र में शतरंज खेलना शुरू किया। अपने पिता के मार्गदर्शन में घरेलू सर्किट में शशिकिरण ने लगातार सफलता हासिल की। उन्होंने अंडर-18 नेशनल शतरंज चैंपियनशिप जीती। कृष्णन ने साल 1999 में अपनी पहली इंडियन नेशनल 'ए' चेस चैंपियनशिप जीती।

अंतरराष्ट्रीय शतरंज में कृष्णन शशिकिरण ने 1995 में डेब्यू किया था। कृष्णन को अपने पहले मैच में चेक रिपब्लिक के टॉमस ओरल के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। कृष्णन ने कॉमनवेल्थ गेम्स में अंडर-18 का टाइटल जीता। उन्होंने दो बार ब्रिटिश अंडर 21 चेस चैंपियनशिप जीती, और 1998 के एलिस्टा चेस ओलंपियाड में इंडियन नेशनल चेस टीम को रिप्रेजेंट किया। इस इवेंट में, कृष्णन ने चौथे बोर्ड पर 8.5/11 पॉइंट्स स्कोर किए। उसी साल उन्हें अपना पहला ग्रैंड मास्टर नॉर्म मिला जब वे टोरक्वे में हुए ब्रिटिश ओपन टूर्नामेंट में छठे स्थान पर रहे। इसके बाद, उन्होंने एंडोरा ओपन चेस टूर्नामेंट और स्पेन में हुए बालगुएर ओपन चेस टूर्नामेंट जीते। वह 1998 में बेनास्क ओपन चेस टूर्नामेंट में तीसरे स्थान पर रहे। साल 1999 में उन्होंने एशियन जूनियर चेस चैंपियनशिप जीती।

साल 2000 में, उन्होंने चेन्नई में हुए पेंटामीडिया कैटेगरी इलेवन ग्रैंड मास्टर टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीता। उसी साल, उन्होंने उदयपुर में हुई एशियन चेस चैंपियनशिप में ग्रैंड मास्टर टाइटल के लिए अपना दूसरा नॉर्म हासिल किया, और कोलकाता में हुए गुडरिक इंटरनेशनल ओपन चेस टूर्नामेंट में इस प्रतिष्ठित टाइटल के लिए तीसरा नॉर्म भी हासिल किया। 19 साल की उम्र में उन्होंने इंटरनेशनल ग्रैंड मास्टर का खिताब जीता। साल 2001 में उन्होंने प्रतिष्ठित हेस्टिंग्स चेस टूर्नामेंट जीता और 2002 में भी टूर्नामेंट में जीत दोहराई। कृष्णन ने उसी साल एशियन चेस चैंपियनशिप भी जीती।

2002 कृष्णन के करियर के लिए सबसे यादगार साल के रूप में आया। इस साल उन्होंने विश्व कप शतरंज टूर्नामेंट के दौरान भारतीय शतरंज के सबसे बड़े खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद को हराया था। कृष्णन की जीत ने दुनियाभर के शतरंज प्रेमियों को हैरान कर दिया था। इसके अलावा, उन्होंने डेनमार्क के कोपेनहेगन में हुए पोलिटिकेन कप में गोल्ड मेडल जीता। साल 2005 में उन्होंने कोपेनहेगन में हुए सिगमैन टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक के लिए जान टिम्मन की बराबरी की।

जनवरी 2007 में, कृष्णन शशिकिरन 2700 की फिडे रेटिंग तक पहुंचे, और विश्वनाथन आनंद के बाद 2700 का आंकड़ा पार करने वाले दूसरे भारतीय शतरंज खिलाड़ी बने। उन्होंने साल 2008 में 6.5/9 के कुल स्कोर के साथ नजडॉर्फ मेमोरियल शतरंज टूर्नामेंट जीता। उसी साल, वह 18वें पैम्प्लोना इंटरनेशनल शतरंज टूर्नामेंट में 5/7 पॉइंट्स के कुल स्कोर के साथ विजेता बने। जनवरी 2009 तक फिडे रैंकिंग के अनुसार, वे दुनिया के टॉप 20 चेस प्लेयर्स में शामिल थे। कृष्णन शशिकिरन ने आधिकारिक रूप से शतरंज को अलविदा नहीं कहा है। उन्हें 2002 में भारत सरकार ने प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया था।

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