चलते-फिरते फोन? इन 4 कामों के दौरान भूलकर भी न करें इस्तेमाल, चेतावनी देते हैं प्रेमानंद जी महाराज

मोबाइल फोन का आविष्कार तो हमारी सहूलियत के लिए हुआ था लेकिन यह हमारे जीवन का इतना जरूरी हिस्सा बन जाएगा, यह तो शायद ही किसी ने सोचा हो। आज अधिकतर लोग जितना टाइम अपने फोन के साथ बिताते हैं, उतना तो शायद ही अपने दोस्तों या परिवार के साथ बिताते हों। कुछ मामलों में तो यह हमारी जरूरत भी है लेकिन हर समय सिर्फ फोन में लगे रहना, ना सिर्फ हमारी फिजिकल, मेंटल हेल्थ पर बुरा असर डालता है बल्कि हमारी सोशल लाइफ को भी इंपैक्ट करता है। आध्यात्मिक गुरु श्री प्रेमानंद जी महाराज ने अपने एक सत्संग में इसी समस्या पर बात की है। उन्होंने बताया है कि कुछ ऐसे समय और जगह हैं, जब तो कम से कम हमें फोन चलाने से परहेज करना ही चाहिए। तो चलिए जानते हैं प्रेमानंद जी महाराज ने क्या कुछ कहा है।

खाना खाते हुए नहीं चलाना चाहिए फोन

प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि खाना खाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से परहेज करना चाहिए। ऐसा करना ना सिर्फ हेल्थ के लिए नुकसानदायक होता है बल्कि इसे भोजन का अपमान भी माना जाता है। यह बात तो मॉडर्न साइंस भी मानती है कि खाना खाते हुए हमेशा सिर्फ उसी पर ध्यान देना चाहिए। इससे खाने के पोषक तत्व शरीर में बेहतर ढंग से एब्जॉर्ब हो पाते हैं। खाने को हमेशा शांति से बैठकर ग्रेटीट्यूड की भावना के साथ खाना चाहिए।

सोने से पहले ना चलाएं फोन

प्रेमानंद जी महराज कहते हैं कि सोने से पहले भी मोबाइल फोन नहीं देखना चाहिए। इससे नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसकी जगह भगवान का नाम लें और शांति से समय पर सोने की कोशिश करें। डॉक्टर्स भी सोने से पहले फोन चलाने को मना करते हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि जब आप फोन चलाते हैं तो अपना दिमाग एक्टिव रहता है। ऐसे में जल्दी नींद भी नहीं आती और आपकी स्लीप साइकिल डिस्टर्ब होती है।

पूजा-पाठ करते हुए ना चलाएं फोन

पूजा-पाठ करते समय भी फोन से दूर रहना चाहिए। अगर आप पूजा के समय भी फोन का इस्तेमाल करते हैं, तो इससे पूजा में मन नहीं रम पाता। इस तरह भगवान की भक्ति में भी बाधा पड़ती है और पूजा-पाठ भी ठीक से नहीं हो पाता। इसलिए जब भी पूजा करने जाएं तो फोन को अपने से दूर रखें और कुछ देर शान्ति के साथ पूजा-पाठ में बिताएं।

सत्संग सुनने बैठें तो ना चलाएं फोन

कुछ लोग सत्संग सुनते समय भी फोन में लगे रहते हैं। ऐसा करने से ना तो उनका ध्यान संतों की कही गई बातों पर जाता है, ना ही ऐसे सत्संग का कोई फायदा होता है। प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि सत्संग सुनते समय मोबाइल फोन को दूर रखना चाहिए और एकाग्र हो कर सत्संग सुनना चाहिए। जबतक संतो की कही बातें अच्छी तरह समझकर जीवन में ना उतारी जाएं, तब तक सत्संग सुनने का कोई फायदा नहीं।

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