विकसित भारत के लक्ष्य में गुजरात की अहम भूमिका, निवेश-उद्योग को मिलेगी नई रफ्तार : पीयूष गोयल

अहमदाबाद
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को राजकोट में वाइब्रेंट रिजनल 2026 कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने वाइब्रेंट 2026 के तहत लगे ड्रोन तकनीक की समीक्षा की और देश की विकास यात्रा को लेकर केंद्र सरकार की उपलब्धियों के बारे में बताया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात में वाइब्रेंट जैसे वैश्विक मंचों का आयोजन किया जा रहा है, जिनका उद्देश्य देश और विदेश से निवेश आकर्षित करना है। इससे न केवल उद्योगों को मजबूती मिलेगी, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने बताया कि वाइब्रेंट गुजरात पहल ने बीते वर्षों में राज्य को निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया है।

राजकोट वाइब्रेंट 2026 समिट के दौरान आयोजित काइट फेस्टिवल का भी उल्लेख करते हुए मंत्री ने भारत-जर्मनी के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़ने की संभावनाओं पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि अहमदाबाद में चल रहे काइट फेस्टिवल में जर्मन चांसलर की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मौजूदगी भारत की वैश्विक साख को दर्शाती है। यह पहल देश के आर्थिक और कूटनीतिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

पीयूष गोयल ने अपने संबोधन में गुजरात के सौर ऊर्जा मॉडल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी लाभकारी है। एक बार पूंजी निवेश करने के बाद इसमें कोयला, गैस या पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधन पर कोई खर्च नहीं होता। सौर ऊर्जा प्राकृतिक रूप से उपलब्ध है और यह भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने गुजरात की ऐतिहासिक और औद्योगिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि धोलावीरा की पांच हजार वर्ष पुरानी कुम्हार परंपरा से लेकर मोरबी के आधुनिक सिरेमिक उद्योग तक, गुजरात की मिट्टी आज वैश्विक बाजार में भारत की पहचान बन चुकी है। नवाचार, तकनीक और निवेश के संगम से सिरेमिक सेक्टर इलेक्ट्रिक वाहन, हेल्थकेयर और ग्रीन टेक जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा कर रहा है। विकसित भारत 2047 की यात्रा में यह क्षेत्र निर्णायक भूमिका निभा रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 225 से अधिक एमएसएमई क्लस्टर, 12 हजार से ज्यादा स्टार्टअप, मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और उद्यमशीलता की संस्कृति के चलते सौराष्ट्र क्षेत्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। यह क्षेत्र न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश के औद्योगिक भविष्य की दिशा तय कर रहा है।

विकसित गुजरात के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से वीजीआरसी के दूसरे दिन आयोजित एमएसएमई कॉन्क्लेव का मुख्य लक्ष्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को सशक्त बनाना रहा। इस कॉन्क्लेव में स्थानीय उद्यमियों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने, तकनीकी उन्नयन और निवेश के नए अवसरों पर विशेष चर्चा की गई। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने एमएसएमई सेक्टर को और मजबूत करने के लिए अपने अनुभव साझा किए।

एमएसएमई कॉन्क्लेव के दौरान सौराष्ट्र और कच्छ के औद्योगिक विकास के लिए 300 करोड़ रुपए से अधिक के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। साथ ही गोयल ने कहा कि ये समझौते रोजगार सृजन, औद्योगिक विस्तार और आत्मनिर्भर गुजरात के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे। अपने संबोधन में पीयूष गोयल ने आगे कहा कि भारत का ‘अमृत काल’ वर्ष 2047 में आजादी के 100 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विकसित गुजरात का निर्माण जरूरी है। इसी दिशा में गुजरात सरकार ने लगभग 60 लाख करोड़ रुपए के बुनियादी ढांचा विकास की व्यापक योजना तैयार की है, जिसमें एमएसएमई की भूमिका सबसे अहम होगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सौराष्ट्र और कच्छ में आयोजित यह क्षेत्रीय सम्मेलन स्थानीय उद्योगों और व्यापार को मजबूती देगा। इससे जीआई टैग वाले उत्पादों, एक जिला एक उत्पाद योजना और किसानों की उपज को भी बढ़ावा मिलेगा। इस तरह के सम्मेलन भारत और विदेशों के निवेशकों को एक साथ लाकर नई तकनीकों और नए अवसरों से परिचित कराते हैं, जिससे देश के औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलती है।

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