समंदर में तनाव: भारतीय पोत पर हमला, 18 लोगों को जबरन हिरासत में लेने का आरोप

नई दिल्ली
8 दिसंबर 2025 की दोपहर भारतीय नाविकों के परिजनों के लिए एक भयावह कहानी की शुरुआत हुई। उस दिन कैप्टन विनोद परमार को अपने भाई- टैंकर वेलियंट रोर के कमांडिंग कैप्टन विजय कुमार- का घबराया हुआ फोन आया। आवाज कांप रही थी। उन्होंने बताया कि उनके जहाज का अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में होने के बावजूद ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा पीछा किया जा रहा है। इसके बाद लाइन कट गई।
 
परिजनों के बयानों के मुताबिक, इसके बाद जो हुआ वह किसी बुरे सपने से कम नहीं था- ईरानी नौसेना की ओर से कथित तौर पर बिना उकसावे की फायरिंग, टैंकर को जब्त करना और 10 भारतीय नाविकों का रहस्यमय ढंग से गायब हो जाना। डेढ़ महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन ये नाविक न तो अपने परिवारों से संपर्क कर पा रहे हैं और न ही बाहरी दुनिया से।
अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में घटना, VLSFO होने के बावजूद ‘डीजल तस्करी’ का आरोप

यह टैंकर दुबई स्थित ग्लोरी इंटरनेशनल FZ LLC द्वारा संचालित है। 16 भारतीय, एक श्रीलंकाई और एक बांग्लादेशी सदस्य- कुल 18 क्रू सवार थे। तकनीकी खराबी के चलते सिस्टर वेसल MT Coral Wave के साथ खड़े रहने के बाद यह पहली यात्रा पर निकला था और यूएई के खोर फकान की ओर तकनीकी सहायता लेने जा रहा था। घटना यूएई के दिब्बा पोर्ट के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बताई जा रही है।

कैप्टन परमार के अनुसार, ईरान ने जहाज पर छह मिलियन लीटर डीज़ल की तस्करी का आरोप लगाया, जबकि टैंकर में बहुत कम सल्फर वाला ईंधन तेल (वीएलएसएफओ) था। ईरानी पक्ष ने सैंपल एनालिसिस रिपोर्ट को खारिज कर दिया और जहाज पर कब्जा कर उसे Bandar-e-Jask ले जाया गया।

मारपीट, बंधक बनाना, उपकरण जब्त
रिपोर्ट क मुताबिक,परिजनों का आरोप है कि फायरिंग से जहाज को नुकसान पहुंचा और कुछ क्रू घायल हुए। बाद में ईरानी कर्मियों ने जहाज पर चढ़कर क्रू के साथ मारपीट की, उन्हें बंधक बनाया गया और सभी मोबाइल, लैपटॉप व अन्य उपकरण जब्त कर लिए गए। सभी 18 नाविकों को एक ही मेस रूम में ठूंस दिया गया और बाथरूम तक जाने के लिए भी सशस्त्र पहरे में ले जाया गया। केवल कैप्टन को प्रतिदिन कुछ मिनट कॉल की अनुमति दी गई।

न हिरासत आदेश, न कारण- MLC 2006 का हवाला
परिवारों का कहना है कि अब तक ईरानी अधिकारियों ने न तो औपचारिक हिरासत आदेश जारी किए हैं और न ही जब्ती के ठोस आधार बताए हैं। भारत और ईरान दोनों समुद्री श्रम कन्वेंशन, 2006 के पक्षकार हैं, जो नाविकों के अधिकारों की सुरक्षा करता है।

10 भारतीय जेल भेजे गए, संपर्क टूटा
6 जनवरी को हालात और बिगड़े। बयान दर्ज करने के बहाने 18 में से 10 नाविकों को जहाज से बाहर ले जाया गया और बाद में Bandar Abbas की जेल भेज दिया गया। इनमें चीफ ऑफिसर अनिल सिंह, सेकेंड इंजीनियर और कई जूनियर इंजीनियर शामिल हैं। उसी शाम अनिल सिंह की पत्नी गायत्री को एक मिनट का कॉल आया- उन्होंने झूठे स्मगलिंग आरोपों में जेल भेजे जाने की बात कही। इसके बाद कोई संपर्क नहीं।

परिवारों की पीड़ा, मां की तबीयत बिगड़ी
तीसरे इंजीनियर केतन मेहता के परिवार का कहना है कि जब से जहाज जब्त हुआ है, उनसे कोई बात नहीं हो पाई। केतन परिवार का एकमात्र कमाने वाला है। तनाव के चलते उनकी हृदय-रोगी मां को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। गायत्री कहती हैं- मेरे बेटे ने पीएमओ को 20-25 ईमेल भेजे, कोई जवाब नहीं। बस हमारी बात विदेश मंत्री एस जयशंकर तक पहुंचा दी जाए।

जहाज पर बचे 8 भारतीय- खाने का संकट
जहाज पर बचे आठ नाविक बेहद कठिन हालात में हैं। परिजनों के मुताबिक, उन्हें केवल पानी दिया जा रहा है और वे चावल-दाल पर गुजारा कर रहे हैं। राशन दो-तीन दिन में खत्म होने की आशंका जताई गई है।

दूतावास से सीमित मदद, हाई कोर्ट की शरण
परिवारों ने 12 दिसंबर को डीजी शिपिंग से संपर्क किया, फिर मामला विदेश मंत्रालय और तेहरान स्थित दूतावास तक गया। 17 दिसंबर को दूतावास ने Bandar Abbas स्थित कांसुलेट से संपर्क करने की सलाह दी, लेकिन कांसुलर एक्सेस के अनुरोध बार-बार ठुकरा दिए गए। अब परिजन दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। खामेनेई-नेतृत्व वाले शासन के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों, इंटरनेट ब्लॉकेड और हालिया अस्थिरता ने परिजनों की चिंता और बढ़ा दी है। लंबे समय से चल रही अनिश्चितता ने क्रू के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाला है।

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