मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की आशंका, ट्रंप की चेतावनी के बाद देशों ने दूतावास किए खाली, भारत सतर्क

नई दिल्ली

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और संभावित क्षेत्रीय संघर्ष की आशंकाओं के बीच अमेरिका, ब्रिटेन, चीन और भारत सहित कई देशों ने अपने नागरिकों और दूतावास के कर्मचारियों के लिए एडवाइजरी जारी की है। यह स्थिति तब और गंभीर हो गई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हवाई हमलों को टालने के लिए चल रही कूटनीतिक बातचीत पर निराशा व्यक्त की है।

ट्रंप का कड़ा रुख और बातचीत की स्थिति
बातचीत से निराशा: टेक्सास में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा- मैं बातचीत से खुश नहीं हूं। हम अभी बातचीत कर रहे हैं, लेकिन वे सही नतीजे पर नहीं पहुंच रहे हैं।

यह पूछे जाने पर कि वह सैन्य हमलों का फैसला करने के कितने करीब हैं, ट्रंप ने स्पष्ट जवाब देने से इनकार करते हुए कहा- मैं आपको यह बताना पसंद नहीं करूंगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

जिनेवा में हाल ही में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता के बाद, ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर के नेतृत्व वाले अमेरिकी वार्ताकार निराश होकर लौटे हैं। अगली तकनीकी बातचीत सोमवार को वियना में होने की संभावना है।

दूसरी ओर, ईरान और मध्यस्थ देश ओमान ने प्रगति को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी ने वाइट हाउस में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात के बाद कहा- शांति हमारी पहुंच में है।

दूतावासों को खाली करने के निर्देश और यात्रा परामर्श
लगातार मंडरा रहे युद्ध के खतरे को देखते हुए कई देशों ने एहतियाती कदम उठाए हैं।

अमेरिका: अमेरिका ने यरूशलेम (इजरायल) में अपने गैर-आपातकालीन कर्मचारियों को देश छोड़ने की अनुमति दे दी है। अमेरिका को आशंका है कि यदि वह ईरान पर हमला करता है और इजरायल उसमें साथ देता है, तो ईरान इजरायल पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। इससे पहले वाशिंगटन ने बेरूत (लेबनान) के लिए भी इसी तरह का आदेश जारी किया था।

भारत और अन्य देश: भारत, ब्रिटेन, चीन, ऑस्ट्रेलिया, पोलैंड, फिनलैंड, स्वीडन और सिंगापुर जैसे देशों ने भी अपने नागरिकों और राजनयिकों को मध्य पूर्व के कुछ हिस्से छोड़ने की सलाह दी है।

ब्रिटेन का कदम: ब्रिटेन ने घोषणा की है कि वह ईरान से अपने राजनयिक कर्मचारियों को अस्थायी रूप से वापस बुला रहा है।

सैन्य तैनाती और इजरायल पर प्रभाव
अमेरिकी सेना का जमावड़ा: कूटनीतिक रास्ते खुले होने के दावों के बावजूद, अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य ताकत लगातार बढ़ा रहा है। एक दूसरा अमेरिकी विमानवाहक पोत (USS जेराल्ड आर. फोर्ड) क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है और वर्तमान में इजरायली जलक्षेत्र में तैनात है।

उड़ानें रद्द: कई एयरलाइंस ने इजरायल की वाणिज्यिक राजधानी तेल अवीव के लिए अपनी उड़ानें निलंबित कर दी हैं। अमेरिकी दूतावास ने अपने कर्मचारियों के लिए यरूशलेम के ओल्ड सिटी और वेस्ट बैंक जैसे क्षेत्रों में यात्रा करने पर रोक लगाने की चेतावनी दी है।

इजरायली अर्थव्यवस्था पर मार: संभावित संघर्ष के डर से इजरायल के वित्तीय बाजारों पर भारी दबाव है। वहां की मुद्रा 'शेकेल' (Shekel) में पिछले साल जून के 12-दिवसीय युद्ध के बाद से दो दिनों की सबसे भारी गिरावट देखी गई है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
तेल की कीमतों में उछाल: ऊर्जा-समृद्ध मध्य पूर्व में अमेरिकी हमलों की संभावना के बीच कच्चे तेल की कीमतें 3.2% बढ़कर 73 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो जुलाई के बाद सबसे अधिक है। हालांकि, ट्रंप ने तेल की कीमतों की चिंता को दरकिनार करते हुए कहा- मुझे लोगों की जान और इस देश के दीर्घकालिक स्वास्थ्य की अधिक परवाह है।

व्यापारिक जहाजों का मार्ग बदला: लाल सागर क्षेत्र में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की सक्रियता और सुरक्षा खतरों के कारण, दुनिया की प्रमुख शिपिंग कंपनियों (A.P. Moller-Maersk और Hapag-Lloyd) ने अपने जहाजों का मार्ग बदल दिया है। अब ये जहाज स्वेज नहर से गुजरने के बजाय अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से का लंबा चक्कर लगाकर जा रहे हैं।

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