भारतीय जहाजों पर हमले के बाद ईरान को नई दिल्ली का चेतावनी भरा संदेश, नतीजे भुगतने होंगे

नई दिल्ली
दो भारतीय क्रूड ऑयल जहाजों पर ईरानी नौसेना की गोलीबारी में कोई हताहत नहीं हुआ है। भारतीय अधिकारियों ने रविवार को इसकी पुष्टि की। हालांकि, उन्होंने बताया कि जहाजों के एक केबिन की खिड़की का शीशा टूट गया। भारतीय अधिकारियों ने तेहरान को साफ संदेश दिया कि ऐसी किसी भी हरकत के नतीजे भुगतने पड़ेंगे। समझा जाता है कि भारत में ईरानी दूतावास और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बीच इस घटना को लेकर मतभेद है। सूत्रों ने बताया कि IRGC अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले सभी जहाजों पर टोल वसूलना चाहता है, जबकि भारतीय अधिकारी ऐसी मांग मानने को तैयार नहीं हैं।

2 भारतीय जहाजों (जग अर्णव और सन्मार हेराल्ड) पर ईरानी नौसेना की ओर से गोलीबारी की यह घटना तब हुई है, जब ईरानी युद्धपोत IRIS लवान अभी भी कोच्चि बंदरगाह पर खड़ा है। यह भारत से शरण मांगकर आया था। इस युद्धपोत के 183 चालक दल सदस्यों में से लगभग 120 को पहले ही स्वदेश भेज दिया गया है, जबकि कुछ जरूरी कर्मी जहाज की देखभाल के लिए केरल के बंदरगाह पर रुके हुए हैं। इस ईरानी जहाज की ओर से भारत से शरण इसलिए मांगी गई क्योंकि उसका दूसरा युद्धपोत IRIS डेना 4 मार्च को श्रीलंका के पास अमेरिकी पनडुब्बी से हमला कर डुबो दिया गया था।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि IRGC स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूल रहा है, लेकिन एक भारतीय अधिकारी ने कहा कि भारत किसी भी तरह का टोल देने की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने बताया कि ईरानी गोलीबारी की इस घटना के नतीजे सामने होंगे। दोनों भारतीय जहाज बड़े क्रूड ऑयल टैंकर हैं और लाखों बैरल तेल ले जा रहे थे, जो शनिवार को ओमान के उत्तर में ईरानी नौसेना की गोलीबारी का शिकार हुए और उन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वापस मुड़ना पड़ा।
नई दिल्ली ने ईरानी राजदूत को किया तलब

ईरान ने पहले कहा था कि अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष में शामिल न होने वाले देशों के जहाजों को निशाना नहीं बनाया जाएगा। ताजा घटनाक्रम के बाद भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से कड़ी आपत्ति जताई गई है। नई दिल्ली ने ईरानी राजदूत को तलब किया और घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। मरीन ट्रैफिक के अनुसार, भारतीय झंडे वाला बल्क कैरियर जग अर्णव सऊदी अरब के अल जुबैल से भारत की ओर आ रहा था। वहीं, दूसरा जहाज सन्मार हेराल्ड इराक से क्रूड ऑयल लेकर भारत जा रहा था।

अधिकारियों ने कहा कि भारत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की गोलीबारी को बहुत गंभीरता से ले रहा है और देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में खुली और स्वतंत्र नौवहन का समर्थन करता है। ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल पारगमन गलियारों में से एक है, जिसमें वैश्विक क्रूड शिपमेंट का 20% हिस्सा गुजरता है। भारत उन देशों में शामिल है जिनके सबसे अधिक जहाज इस स्ट्रेट से गुजरते हैं, जो खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आयात पर उसकी निर्भरता को दर्शाता है। ईरान ने अमेरिका के साथ युद्ध के बीच भारत को मित्र राष्ट्रों की सूची में रखा है, जिनके जहाजों को इस स्ट्रेट से गुजरने की इजाजत दी जा रही है, जबकि अन्य देशों के जहाजों को ड्रोन-मिसाइल हमलों की धमकी देकर रोका जा रहा है।

“होर्मुज़ फिर से बंद”-VHF प्रसारण ने बढ़ाई दहशत
घटना के दौरान कई जहाजों ने एक रेडियो प्रसारण सुना, जिसमें दावा किया गया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को “पूरी तरह बंद” कर दिया गया है। प्रसारण में कहा गया कि अमेरिका के साथ वार्ता विफल होने के बाद यह कदम उठाया गया है और किसी भी जहाज को गुजरने की अनुमति नहीं होगी। इस संदेश ने पूरे समुद्री क्षेत्र में दहशत फैला दी, जिसके बाद कई जहाजों ने तुरंत अपनी दिशा बदल ली।

भारत की कड़ी प्रतिक्रिया: ईरानी राजदूत तलब
घटना के बाद भारत सरकार ने ईरानी राजदूत को तलब किया और इस पूरे मामले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय ने इस घटना को गंभीर चिंता का विषय बताया और सुरक्षित समुद्री मार्ग सुनिश्चित करने की मांग की। सरकारी सूत्रों के अनुसार, शिपिंग महानिदेशालय (DG Shipping) स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
 
ईरान की सफाई और कूटनीतिक संतुलन की कोशिश
इस बीच, ईरान की ओर से स्थिति को शांत करने की कोशिश भी दिखाई दी। भारत में ईरानी प्रतिनिधि ने कहा कि उन्हें घटना के विस्तृत विवरण की जानकारी नहीं है और दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत बने हुए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि मामला जल्द सुलझ जाएगा।

समुद्री गलियारों में बढ़ता अनिश्चितता का साया
होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय निगरानी तेज कर दी गई है।

क्या कहा भारत ने ईरान से?
भारत ने ईरान से साफ कहा कि वह इस घटना को गंभीरता से लेता है और ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। विदेश सचिव ने ईरानी राजदूत से आग्रह किया कि वे भारत की चिंता अपने देश के अधिकारियों तक पहुंचाएं और भारतीय जहाजों के सुरक्षित मार्ग को जल्द बहाल करें।

क्या ईरान ने कोई जवाब दिया?
बैठक में ईरान के राजदूत ने भारत की चिंताओं को सुना और भरोसा दिया कि वे इस संदेश को तेहरान तक पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत की बात को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित अधिकारियों तक तुरंत जानकारी दी जाएगी।

होर्मुज का महत्व क्यों?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में वैश्विक कच्चा तेल गुजरता है। भारत जैसे देश, जो खाड़ी क्षेत्र से तेल आयात करते हैं, इस मार्ग पर काफी निर्भर हैं। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव सीधे भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर डाल सकता है।

क्या आगे हालात सुधरेंगे?
भारत ने साफ किया है कि वह इस मार्ग में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन चाहता है। सरकार ने उम्मीद जताई है कि ईरान जल्द ही स्थिति को सामान्य करेगा और भारतीय जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करेगा। फिलहाल भारत इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और आगे की रणनीति पर काम कर रहा है। 

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