वन क्षेत्रों में जल प्रबंधन से भीषण गर्मी में वन्य जीवों को मिलेगी राहत

भोपाल

भीषण गर्मी के बीच मध्यप्रदेश में वन्य जीवों को पेयजल के लिए भटकना पड़े, इसके लिएजल गंगा संवर्धन अभियान 2026’ के अंतर्गत वन क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर जल प्रबंधन के कार्य किए जा रहे हैं। वन विभाग द्वारा जंगलों में जल स्रोतों का निर्माण, संरक्षण और पुनर्जीवन सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे वन्य जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में ही पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालितजल गंगा संवर्धन अभियान' ‘जल ही जीवन हैकी भावना को साकार करते हुए केवल मानव जीवन, बल्कि वन्यजीवों और प्रकृति के संतुलन को भी सुरक्षित करने की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में उभर रहा है।

वन्य जीवों के लिए विशेष जल प्रबंधन

अभियान के अंतर्गत जंगलों में तालाब, स्टॉप डैम, झिरिया और अन्य जल संरचनाओं का निर्माण एवं गहरीकरण किया जा रहा है। वन क्षेत्रों में वन्य जीवों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु तालाबों के निर्माण, गहरीकरण, जल स्रोतों के विकास तथा पुराने स्रोतों के जीर्णोद्धार जैसे कार्य प्रगति पर हैं। कई स्थानों पर नए जल स्रोतों का निर्माण किया गया है, जबकि मौजूदा जल संरचनाओं की मरम्मत और पुनर्जीवन का कार्य भी व्यापक स्तर पर जारी है। इससे गर्मी के मौसम में वन्य जीवों को सतत जल उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।

वन क्षेत्रों में वन्य जीवों के लिये पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के कार्य

क्र.

कार्य का विवरण

निर्धारित लक्ष्य

उपलब्धि

वित्तीय लक्ष्य (₹)

वित्तीय उपलब्धि (₹)

1

निर्माण हेतु तालाब (संख्या)

11

6

77,96,000

35,96,000

2

तालाब गहरीकरण (संख्या)

3

0.5

10,00,000

0

3

निर्माण सॉसर (संख्या)

19

0.5

10,80,000

0

4

स्टॉपडैम निर्माण (संख्या)

1

0

20,00,000

10,00,000

5

झिरिया निर्माण (संख्या)

22

0

0

0

6

डाइक निर्माण (संख्या)

0

0

0

0

7

वाटर लिफ्टिंग सिस्टम (किमी)

0

0

0

0

8

मौजूदा झिरिया की मरम्मत एवं जीर्णोद्धार

50

40

5,00,000

4,00,000

कुल

 

 

 

1,23,76,000

49,96,000

पारिस्थितिकी संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

वन क्षेत्रों में जल स्रोतों का निर्माण केवल वन्य जीवों की प्यास बुझाने का कार्य कर रहा है, बल्कि इससे जंगलों के पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती मिल रही है। जल उपलब्धता बढ़ने से वन्य जीवों का विचलन कम होगा और मानववन्य जीव संघर्ष की घटनाओं में भी कमी आने की संभावना है।

जनआंदोलन के रूप में जल संरक्षण

'जल गंगा संवर्धन अभियान' जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन का एक राज्य स्तरीय जनआंदोलन है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अभियान के तीसरे चरण का शुभारंभ 19 मार्च 2026 को गुड़ी पड़वा (नव संवत्सर) के अवसर पर इंदौर से किया। इस अभियान कोजनशक्ति से नवभक्तिके मंत्र से जोड़ते हुए आमजन को श्रमदान के माध्यम से जल संरक्षण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

100 दिवसीय राज्य व्यापी अभियान

यह अभियान 19 मार्च से 30 जून 2026 तक, लगभग 100 दिनों तक पूरे प्रदेश में संचालित किया जा रहा है। प्रदेश के सभी 55 जिलों में नदियों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों के आसपास व्यापक गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं।

इस अभियान में 18 विभागों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है, जिसमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल तथा नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग को सहनोडल विभाग बनाया गया है।

2500 करोड़ रुपये के कार्य और बड़े लक्ष्य

अभियान के अंतर्गत इस वर्ष लगभग 2,500 करोड़ रुपये की लागत से जल संरक्षण के कार्य किए जा रहे हैं। इसमें 10 हजार से अधिक चेक डैम और स्टॉप डैम की मरम्मत का लक्ष्य रखा गया है। अभियान में पुराने तालाबों और बावड़ियों का गहरीकरण एवं सफाई , नदियों (कोलांस, शिप्रा, बेतवा) के संरक्षण के लिए कार्य योजना, जल स्रोतों के आसपास बड़े पैमाने पर पौधारोपण (लगभग 28 लाख पौधे) और अतिक्रमण हटाने और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किये जायेंगे।

जागरूकता के लिए विशेष आयोजन

अभियान के दौरान जनजागरूकता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण आयोजन भी किए जा रहे हैं। इनमें 23–24 मई को भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय जल सम्मेलन, 25–26 मई को क्षिप्रा परिक्रमा यात्रा और 30 मई से 7 जून तक भारत भवन, भोपाल में सदानीरा समागम आयोजित की जायेगी।

 

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