पत्थर और व्यक्ति: बुद्ध की कहानी जो बताती है, अपनी कीमत खुद पहचानो

बुद्ध पूर्णिमा इस साल 1 मई, शुक्रवार को मनाई जाएगी. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल यह वैशाख महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है, इसलिए इसे वैशाखी पूर्णिमा भी कहा जाता है. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, यह दिन भगवान गौतम बुद्ध को समर्पित है क्योंकि इनका जन्म इसी तिथि पर हुआ था. गौतम बुद्ध ने अपने पूरे जीवन में अहिंसा, सत्य, करुणा और शांति का संदेश दिया, जो आज भी लोगों को सही राह दिखाता है. गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़ी कई कहानियां व कथाएं भी हमें गहरी सीख देती हैं. उनकी ऐसी ही एक कथा आत्म-मूल्य को समझाने वाली है. आइए पढ़ते हैं वह कथा.

जब अपनी कीमत जानने की खोज में बुद्ध के पास पहुंचा एक व्यक्ति
कहानी के अनुसार, एक व्यक्ति गौतम बुद्ध के पास पहुंचा और उनसे पूछा कि, 'मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है और मेरी असली कीमत क्या है?'  गौतम बुद्ध ने सीधे जवाब देने के बजाय उसे एक पत्थर दिया और कहा कि, 'जाओ, इसकी कीमत बाजार में पूछकर आओ, लेकिन इसे बेचना मत चाहे कितना भी महंगा क्यों न हो.'

वह व्यक्ति सबसे पहले एक फल बेचने वाले के पास गया. फलवाले ने पत्थर को देखकर कहा कि यह उसके ज्यादा काम का नहीं है, लेकिन इसकी चमक अच्छी है, इसलिए वह इसके बदले 10 आम दे सकता है. इसके बाद वह एक सब्जी वाले के पास गया, जिसने कहा कि इसके बदले एक बोरी आलू मिल सकते हैं.

एक ही पत्थर, लेकिन हर जगह अलग कीमत क्यों?
अब वह और हैरान हो गया कि एक ही पत्थर की अलग-अलग कीमत क्यों लग रही है. आखिर में वह एक जौहरी के पास पहुंचा. जौहरी ने पत्थर को ध्यान से देखा और कहा, 'यह तो बहुत कीमती रत्न है, मैं इसके लाखों रुपये देने को तैयार हूं.' जब व्यक्ति वहां से जाने लगा, तो जौहरी ने कीमत और बढ़ा-चढ़ाकर देने की बात कही.

इसके बाद वह व्यक्ति वापस गौतम बुद्ध के पास आया और पूरी बात बताकर फिर वही सवाल पूछा. गौतम बुद्ध मुस्कुराए और बोले, 'तुमने देखा, हर किसी ने अपनी समझ के हिसाब से उस पत्थर की कीमत लगाई. लेकिन उसकी असली पहचान सिर्फ वही कर पाया, जिसे उसकी सही परख थी.'

खुद को पहचानना है सबसे बड़ी ताकत
गौतम बुद्ध ने समझाया कि इंसान की कीमत भी कुछ ऐसी ही होती है. हर कोई आपके गुणों को नहीं समझ पाएगा. असली बात यह है कि आप खुद को पहचानें और अपने अंदर छिपी खूबियों को निखारें. किसी भी व्यक्ति की असली कीमत दूसरों के विचारों से नहीं, बल्कि उसके आत्मविश्वास और उसकी पहचान से तय होती है.

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