होर्मुज संकट से निपटने के लिए ग्रीन सिग्नल, 2000 मेगावाट बिजली और LPG-तेल की आपूर्ति में कोई कमी नहीं

मुंबई

ईरान जंग के चलते होर्मुज स्‍ट्रेट से तेल और गैस लदे जहाजों का आना-जाना बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. इससे दुनियाभर में एनर्जी क्राइसिस जैसे हालात पैदा हो गए हैं. तेल और गैस की आपूर्ति में कमी आने का खामियाजा अब आमलोगों को भुगतना पड़ रहा है. पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों में भारी उछाल आया है. पश्चिम एशिया में तनाव से पैदा हुए संकट के बीच अब कई देशों ने ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर गंभीरता से काम करना शुरू कर दिया है. भारत भी इसमें पीछे नहीं है. सौर और पवन ऊर्जा के बाद अब एक और क्‍लीन एनर्जी ऑप्‍शन पर गंभीरता से काम शुरू हो गया है. वह परमाणु ऊर्जा. भारत ने कुडनकुलम न्‍यूक्लियर एनर्जी प्‍लांट की यूनिट 5 और 6 पर आगे बढ़ने का फैसला किया है। 

दरअसल, भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को बड़ा बढ़ावा देते हुए Atomic Energy Regulatory Board (AERB) ने तमिलनाडु के Kudankulam Nuclear Power Plant (कुडनकुलम) परमाणु ऊर्जा परियोजना की यूनिट 5 और 6 में प्रमुख उपकरणों की स्थापना के लिए मंजूरी दे दी है. यह अनुमति 30 अप्रैल 2026 को जारी की गई, जिससे देश के परमाणु ऊर्जा विस्तार को नई गति मिलने की उम्मीद है. इस मंजूरी के तहत Nuclear Power Corporation of India Limited (NPCIL) अब रिएक्टर प्रेशर वेसल, स्टीम जनरेटर और कूलेंट पंप जैसे अहम उपकरणों की स्थापना का कार्य शुरू कर सकेगा. यह चरण किसी भी परमाणु संयंत्र के निर्माण में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसके बाद परियोजना अपने अंतिम विकास चरणों में प्रवेश करती है। 

मल्‍टी-लेवल सिक्‍योरिटी रिव्‍यू
AERB की यह अनुमति एक विस्तृत और मल्‍टी-लेवल सुरक्षा समीक्षा के बाद दी गई है. नियामक संस्था ने रिएक्टर डिजाइन को अपने निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप पाया और यह सुनिश्चित किया कि परियोजना में अब तक हुए सिविल निर्माण कार्य भी संतोषजनक हैं. इससे पहले अप्रैल 2021 में ‘फर्स्ट पोर ऑफ कंक्रीट’ के लिए अनुमति दी गई थी, जिसके बाद से निर्माण कार्य लगातार प्रगति पर है. यूनिट 5 और 6 में अत्याधुनिक सुरक्षा सुविधाएं शामिल की गई हैं, जो AERB के लाइट वॉटर रिएक्टर आधारित परमाणु संयंत्रों के लिए निर्धारित सुरक्षा कोड के अनुरूप हैं. ये मानक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर International Atomic Energy Agency (IAEA) द्वारा निर्धारित नवीनतम सुरक्षा दिशानिर्देशों से मेल खाते हैं. इन यूनिट्स में उन्नत पैसिव सेफ्टी सिस्टम और मजबूत कंटेनमेंट मैकेनिज्म लगाए जा रहे हैं, जिससे ऑपरेशन के दौरान उच्च स्तर की सुरक्षा और दुर्घटना-प्रतिरोध सुनिश्चित किया जा सके। 

हर यूनिट की क्षमता 1000 मेगावाट
तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित कुडनकुलम परियोजना भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा उत्पादन केंद्र है. यहां कुल छह प्रेसराइज्ड वॉटर रिएक्टर (VVER डिजाइन) स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें प्रत्येक की क्षमता 1000 मेगावाट है. यह परियोजना रूस के साथ तकनीकी सहयोग के तहत विकसित की जा रही है और इसे भारत-रूस परमाणु साझेदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है. कुडनकुलम की पहली दो यूनिट्स 2013 और 2015 से ऑपरेशन में हैं और दक्षिणी ग्रिड को बिजली आपूर्ति कर रही हैं. वहीं यूनिट 3 और 4 एडवांस स्‍टेज में हैं, जिनके लिए पहले ही प्रमुख उपकरणों की स्थापना की मंजूरी दी जा चुकी है. अब यूनिट 5 और 6 के लिए मिली ताजा अनुमति से पूरे प्रोजेक्ट की गति और तेज होने की संभावना है। 

परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा
कुडनकुलम इन नई यूनिट्स के चालू होने से भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. इससे न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता भी कम होगी. साथ ही स्वच्छ और स्थिर ऊर्जा स्रोत के रूप में परमाणु ऊर्जा की भूमिका और मजबूत होगी. कुडनकुलम परियोजना का पूर्ण रूप से छह यूनिट्स के साथ संचालन भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा. यह परियोजना देश की तकनीकी क्षमता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सुरक्षा मानकों के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। 

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