भवानीपुर में भाजपा की बढ़त, ममता बनर्जी की राजनीति को क्या होगी चुनौती?

नई दिल्ली

एक केंद्र शासित प्रदेश समेत देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में नतीजों की घड़ी आ गई है. वोटों की गिनती के साथ ही रुझान आने शुरू हो गए हैं. बंगाल के रुझानों में टीएमसी-बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है. वहीं असम में बीजेपी आगे चल रही है जबिक केरलम में यूडीएफ को बढ़त दिख रही है. वहीं तमिलनाडु में सत्ताधारी डीएमके अपनी बढ़त को कायम किए हुए है.  जिन पांच राज्यों के चुनाव नतीजे आज आ रहे हैं, उनमें पश्चिम बंगाल और असम के साथ ही केरल और तमिलनाडु भी शामिल हैं. केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में रंगास्वामी राज जारी रहेगा या सत्ता बदलेगी, इसका फैसला भी आज आएगा। 

पश्चिम बंगाल में विधानसभा की कुल 294 सीटें हैं. जिन पर वोट डाले गए थे. पहले चरण में 152 सीटों के लिए 23 अप्रैल को मतदान हुआ था. वहीं, दूसरे चरण में 142 सीटों पर 29 अप्रैल को वोट डाले गए थे. एक सीट पर पुनर्मतदान होना है, जिसकी वजह से आज 293 सीटों के नतीजे आ रहे हैं. शुरुआती रुझानों में बीजेपी और टीएमसी के बीच टाइट फाइट नजर आ रही है। 

बंगाल में बीजेपी 129 सीटों पर आगे
पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने फिर से लीड ले ली है. बीजेपी के उम्मीदवार शुरुआती रुझानों में 129  सीटों पर आगे चल रही है. वहीं, टीएमसी 110 सीटों पर आगे है. कांग्रेस एक सीट पर बढ़त बनाए हुए है. लेफ्ट का खाता भी खुलता नजर नहीं आ रहा है। 

असम में बहुमत से आगे निकली बीजेपी
असम के रुझानों में बीजेपी बहुमत के आंकड़े से आगे निकल गई है. बीजेपी 66 सीटों पर आगे निकल गई है. कांग्रेस की अगुवाई वाला गठबंधन 19 सीटों पर आगे चल रहा है. अन्य का खाता अब तक खुलता नहीं नजर आ रहा है। 

 बंगाल के रुझानों में टाइट फाइट
पश्चिम बंगाल के शुरुआती रुझानों में फाइट टाइट दिख रही है. कभी बीजेपी, तो कभी टीएमसी आगे निकल रही है. फिलहाल, बीजेपी ने 122 विधानसभा सीटों पर लीड ले ली है. टीएमसी भी अधिक पीछे नहीं है. ममता बनर्जी की पार्टी 105 सीटों पर आगे चल रही है। 

बंगाल और असमें बीजेपी को बढ़त, केरलमें यूडीएफ आगे
बंगाल में 162 सीटों के रुझान आ गए ङैं जिसमें बीजेपी 88 सीटों पर आगे है जबकि टीएमसी72 सीटों पर आगे है. वहीं असम में 126 में से 54 सीटों के रुझान आ गए हैं जिसमें बीजेपी 44 सीटों पर आगे हैं जबकि कांग्रेस 10 सीटों पर आगे है.  केरलम में 140 सीटों में से 27 के रुझान आए हैं जिसमें यूडीएफ 15 और एलडीएफ और बीजेपी 5-5 सीटों पर आगे चल रहे हैं। 

कभी बीजेपी, तो कभी टीएमसी आगे निकल रही है. शुरुआती रुझानों में बीजेपी और टीएमसी, दोनों दलों की लीड का आंकड़ा सौ के पार पहुंच चुका है. सत्ताधारी टीएमसी ममता बनर्जी की अगुवाई में जीत का चौका लगाने की कोशिश में है, वहीं बीजेपी को कमल खिलने की पुरजोर उम्मीद है., पश्चिम बंगाल में आजादी के बाद से अब तक का सर्वाधिक मतदान दर्ज किया गया है. सूबे में 92 फीसदी से अधिक मतदान हुआ है. भवानीपुर विधानसभा सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सूबे की विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी आमने-सामने हैं। 

एक्टर विजय का प्रचंड उलटफेर, असम में बीजेपी की जीत तय

पश्चिम बंगाल : बैलट पेपर के शुरुआती रुझानों के मुताबिक बीजेपी आगे चल रही है. हालांकि टीएमसी ज्यादा पीछे नहीं है. पश्चिम बंगाल विधानसभा में 294 सीटें हैं. बहुमत का आंकड़ा 148 है. एक सीट फालटा में वोटों की गिनती नहीं हो रही है. बीजेपी की पैठ इस बार दमदार है. अब तक भद्रलोक बीजेपी के साथ नहीं था. इस बार कोलकाता, हावड़ा, आसनसोल जैसे शहरी इलाकों में 2021 के मुकाबले 20 प्रतिशत ज्यादा वोटिंग हुई. इसका असर रुझानों में है. इन शहरी सीटों पर बीजेपी आगे है। 

तमिलनाडु : डीएमके पर जनता फिर भरोसा जताती दिख रही है. एक्टर विजय के टीवीके से भी पिछड़ गई है एआईएडीएमके. तमिलनाडु विधानसभा में 324 सीटें हैं और बहुमत के लिए 173 सीटें चाहिए। 

 तमिलनाडु में टीवीके बड़ी ताकत के तौर पर उभर रही है
असम : कांग्रेस से अलग होने के बाद इसी की हस्ती मिटाने वाले हिमंत बिस्वा सरमा भगवा झंडा फिर फहराने की तैयारी में है. असम विधानसभा में 126 सीटें हैं और बहुमत का जादुई आंकड़ा 64 है। 

केरलम : अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहा लेफ्ट फ्रंट कठिन दौर से गुजर रहा है. हालांकि पिनरई विजयन की पार्टी कांग्रेस की अगुआई वाले यूडीएफ को कड़ी टक्कर दे रही है. अगर एलडीएफ की हार होती है तो पूरे देश से कम्युनिस्टों का सफाया हो जाएगा. ताजा डेटा के मुताबिक 76 सीटों पर यूडीएफ आगे है. केरलम विधानसभा में 140 सीटें हैं और बहुमत का जादुई आंकड़ा 71 है. रुझान अगर परिणाम में तब्दील हो गए तो कांग्रेस का सीएम बनना तय है। 

असम में विधानसभा की कुल 126 विधानसभा सीटें हैं. प्रदेश की सभी 126 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल को वोट डाले गए थे. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की अगुवाई में चुनाव मैदान में उतरी बीजेपी को जीत की हैट्रिक लगाने का भरोसा है. वहीं, सूबे की सत्ता से 10 साल लंबा वनवास समाप्त कराने की कोशिशों में जुटी कांग्रेस को भी जीत की उम्मीद है. प्रदेश में इस बार रिकॉर्ड 85 फीसदी से अधिक वोटिंग हुई है। 

तमिलनाडु में 234 विधानसभा सीटों हैं. इन सीटों के लिए 23 अप्रैल को मतदान हुआ था. सूबे में मतदाताओं ने जबरदस्त उत्साह दिखाया और मतदान का आंकड़ा सभी पिछले रिकॉर्ड तोड़ते हुए 85.14 फीसदी तक पहुंच गया. सूबे में डीएमके की अगुवाई वाली मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सरकार है. विपक्षी एनडीए की अगुवाई सूबे में एआईएडीएमके कर रही है. थलापति विजय की अगुवाई वाली नई नवेली टीवीके मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में है। 

केरलम की बात करें तो इस तटीय प्रदेश की 140 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में 9 अप्रैल को वोट डाले गए थे. इस बार सूबे में 78.27 फीसदी मतदान हुआ है. वहीं, केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की 30 सीटों के लिए भी 9 अप्रैल को ही वोट डाले गए थे. केंद्र शासित प्रदेश में 89.97 फीसदी मतदान हुआ है. केरल में पी विजयन की अगुवाई वाले एलडीएफ सरकार है. वहीं, पुडुचेरी में रंगास्वामी की अगुवाई वाला एनडीए गठबंधन सत्ता में है। 

मोबाइल फोन पर सख्‍त प्रतिबंध
इसके अलावा मतगणना कक्ष के भीतर मोबाइल फोन ले जाने पर भी सख्त पाबंदी लगाई गई है. केवल मतगणना पर्यवेक्षकों और रिटर्निंग अधिकारियों को ही मोबाइल फोन साथ रखने की अनुमति होगी. यह कदम मतगणना प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है. ईसीआई ने मतगणना प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए अतिरिक्त पर्यवेक्षकों की भी नियुक्ति की है. 4 मई के लिए 165 अतिरिक्त मतगणना पर्यवेक्षकों को तैनात किया गया है, जो पहले से मौजूद पर्यवेक्षकों की सहायता करेंगे. साथ ही, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 77 पुलिस पर्यवेक्षकों की भी नियुक्ति की गई है. फिलहाल सभी को चुनाव रिजल्‍ट का इंतजार है। 

चुनाव आयोग का क्‍या कहना?
आयोग का कहना है कि इन सभी उपायों का उद्देश्य मतगणना प्रक्रिया को सुरक्षित, शांतिपूर्ण, भयमुक्त और पारदर्शी बनाना है. इसके साथ ही, 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए एहतियातन केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 700 कंपनियों को राज्य में अगले आदेश तक तैनात रखा गया है. इस बार की मतगणना प्रक्रिया को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है, ताकि नतीजों की घोषणा निष्पक्ष और बिना किसी व्यवधान के की जा सके। 

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