मोहन यादव के निर्देश: सरकारी निगम और प्राधिकरणों में नियुक्तियों के लिए BJP कार्यकर्ताओं की लिस्ट तैयार

इंदौर 

दो दशक से अधिक की सत्ता में अब तक भाजपा के आम कार्यकर्ताओं ने सत्ता की रेवड़ी का स्वाद तक नहीं चखा, लेकिन मोहन सरकार में उनकी लॉटरी खुलने वाली है। मुख्यमंत्री की विशेष रुचि के चलते जिला स्तर पर बनने वाली समिति सहकारी समितियों का गठन होने जा रहा है। प्रदेश संगठन के निर्देश पर जिला इकाई ने सभी विधायकों से नाम मांग लिए हैं। माना जा रहा है कि इस माह सभी घोषणाएं हो जाएंगी।

भाजपा की सत्ता और संगठन में नियुक्तियों का सिलसिला जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव चाहते थे कि सरकारी के सभी निगम, मंडल और प्राधिकरणों में नियुक्ति हो जाए जिससे पार्टी नेताओं को भी सरकार के होने का अहसास रहे। उनके लगातार प्रयास और संगठन से चले लंबे मंथन के बाद बड़ी संख्या में नेताओं को उपकृत किया गया और बची हुई नियुक्तियां भी पाइप लाइन में है। जहां पर विवाद की स्थिति है उनका निराकरण कर वे घोषणाएं हो जाएगी।

एक सप्ताह तक दें पूरी सूची
ये नियुक्तियां बड़े नेताओं की हो रही है, लेकिन जल्द ही अब आम कार्यकर्ता को भी उपकृत करने की तैयारी है ताकि उन्हें भी लगे कि वे सत्ताधारी संगठन से ताल्लुक रखते हैं। इसको लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने हाल ही में सभी जिला अध्यक्षों को 25 से अधिक समितियों में नियुक्तियों को लेकर नाम की फेहरिस्त मांग ली है। इसके चलते नगर भाजपा अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने सभी विधायकों के अलावा कोर कमेटी के सदस्यों से कार्यकर्ताओं के नाम मांग लिए हैं। एक सप्ताह में पूरी सूची बनाकर देने का कहा गया है जिसमें सभी नेताओं का समन्वय होना चाहिए।

ये हैं प्रमुख समितियां
जिला स्तर पर बनने वाली समितियों में प्रमुख रूप से आरटीओ समिति, उद्यानिकी विभाग की समिति, जेल विभाग में अशासकीय संदर्शक समिति व विजिटर बोर्ड, पशु क्रूरता निवारण समिति, जिला पशु रोगी कल्याण समिति, मछुआ कल्याण व मत्स्य समिति, जिला शहरी विकास अभिकरण में प्रबंधकारिणी व निगरानी समिति, आइटीआइ में जिला कौशल समिति, शिक्षा विभाग में जिला स्तरीय अनुदान व निर्णायक समिति, खाद्य विभाग की सतर्कता समिति, जिला योजना समिति, अंत्योदय समिति, कॉलेज में जनभागीदारी समिति, पुलिस शिकायत बोर्ड, जिला व्यापार एवं उद्योग बोर्ड, सामाजिक न्याय व निशक्त जन समिति, खेल प्रशिक्षण समिति, जिला जल व स्वच्छता समिति, खनिज निधि समिति, मुख्यमंत्री ऋण माफी योजना, सिटी फॉरेस्ट योजना सहित कुल 25 समितियां हैं। अधिकांश समितियां उमा भारती के मुख्यमंत्री रहते बनी थीं। उसके बाद शिवराज सिंह चौहान के सीएम रहते कुछ समितियों का ही गठन हुआ था। हर बार कार्यकर्ताओं के नाम बुलाए गए, लेकिन घोषणा नहीं हो सकी।

विधायक आधारित हुआ संगठन
एक समय था जब संगठन आधारित सत्ता होती थी, लेकिन अब उल्टा हो गया है। सत्ता हो या संगठन की नियुक्ति उसमें विधायकों की पसंद से दिए गए नामों को ही उपकृत किया जाता है। बूथ से लेकर मंडल अध्यक्ष तक उनके समर्थक रहते हैं तो बची कसर अब सत्ता में भी पूरी हो जाएगी। उनके दिए गए नामों को ही पार्टी सत्ता में भी उपकृत करेगी। उन कार्यकर्ताओं की कोई पूछपरख नहीं है जो कि गुटबाजी में न पड़ कर संगठन के लिए समर्पित है। मजेदार बात ये है कि विधायक ऐसे कार्यकर्ताओं का विरोध कर हाशिए पर पहुंचा देते हैं।

फिर मांगे एल्डरमैन के नाम
वैसे तो महापौर पुष्यमित्र भार्गव के नेतृत्व वाली नगर निगम परिषद को एक साल ही शेष रह गया है। इस पर अब पार्टी एल्डरमैन की नियुक्ति करने जा रही है। इसको लेकर पहले भी दो बार नाम लिए जा चुके हैं, लेकिन संगठन में कुछ नाम ऐसे थे जो पदाधिकारी बन गए। इस वजह से फिर से सूची मांगी गई है। 12 पदों को लेकर विधायक चाहते हैं कि उनकी पसंद से ही बने, लेकिन सांसद शंकर लालवानी और महापौर भार्गव भी अपने समर्थकों को उपकृत करना चाहते हैं। उनका तर्क है कि एक-एक एल्डरमैन विधायकों की पसंद से हो जाए तो बाकी छह एल्डरमैन के लिए हमारे नामों को तवज्जो दी जाना चाहिए।

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