IMF की वॉर्निंग: युद्ध से वैश्विक संकट गहरा, भविष्य और खराब होने का अंदेशा

  नई दिल्ली
  
अमेरिका और ईरान के बीच हमलों की खबर से एक बार फिर ग्लोबल टेंशन चरम पर पहुंच गई है. कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है. दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की तमाम कोशिशें होर्मुज स्ट्रेट पर आकर फेल हो रही हैं. न तो डोनाल्ड ट्रंप Hormuz Strait पर पीछे हटने को तैयार हैं, न ही ईरान हथियार डालने के मूड में नजर आ रहा है। 

मिडिल ईस्ट में गहराए इस तनाव को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने बड़ी चेतावनी दी है. आईएमएफ चीफ ने कहा है कि अगर ये युद्ध 2027 तक चला, तो इसके सबसे बुरे परिणाम देखने को मिलेंगे। 

अनुमान से ज्यादा बुरे परिणाम
आईएमएफ ने चेतावनी देते हुए कहा है कि दुनिया में महंगाई पहले से ही बढ़ रही है. इस बीच मिडिल ईस्ट युद्ध एक और बड़ा संकट बनकर सामने आया है. IMF Chief क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने कहा कि अगर अमेरिका-ईरान के बीच ये युद्ध 2027 तक खिंचता है और इसके चलते कच्चे तेल की कीमतें लगभग 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को अनुमान से कहीं ज्यादा बुरे परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। 

जॉर्जीवा ने आगे कहा कि US-Iran War को लेकर अब तक जो पूर्वानुमान जताए गए थे, वो धरे रहते जा रहे हैं. इसके साथ ही इनमें जाहिर किए गए ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ में गिरानट के बाद इसके 3.1 फीसदी और महंगाई के 4.4 फीसदी रहने के अनुमान पीछे छूटते जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हर बीतते दिन के साथ ये अनुमान बेकार होते जा रहे हैं। 

IMF Chief के मुताबिक, युद्ध का जारी रहना, तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल या उससे अधिक पर बने रहना और इसके चलते महंगाई के बढ़ते दबाव का साफ मतलब है कि हालात आगे खराब होने वाले हैं और आईएमएफ का आउटलुक अब आधार बन चुका है. इसमें कहा गया है कि 2026 में वैश्विक ग्रोथ 2.5 फीसदी तक गिर सकती है, जबकि महंगाई का बम फूट सकता है और ये 5.4 फीसदी पर पहुंच सकती है। 

Hormuz बंद होने से बिगड़ेंगे हालात
शेवरॉन (Chevron) के चेयरमैन और सीईओ माइक विर्थ ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के कारण दुनिया भर में तेल आपूर्ति में भौतिक कमी दिखाई देने लगेगी, जिसके माध्यम से युद्ध से पहले वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति का 20% हिस्सा गुजरता था. विर्थ के मुताबिक, लंबे समय तक युद्ध चला तो दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं सिकुड़ने लगेंगी, सबसे पहले एशिया में बुरा असर देखने को मिलेगा। 

IMF की हालात पर पैनी नजर
क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने कहा कि IMF इस संघर्ष के सप्लाई चेन पर पड़ने वाले धीमे असर पर बारीकी से नजर रख रहा है. इसके असर को देखें, तो खाद पहले से ही 30% से 40% महंगी हो चुकी है, जिससे खाने-पीने की चीजों के दाम 3% से 6% तक बढ़ सकती हैं. सिर्फ खाने-पीने की चीजें ही नहीं, बल्कि दूसरे बिजनेस भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। 

उन्होंने आगे कहा, 'मैं जिस बात पर जोर देना चाहती हूं, वह यह है कि यह वाकई बहुत गंभीर मामला बनता जा रहा है. कई पॉलिसी मेकर्स अभी भी ऐसा बर्ताव कर रहे हैं, मानो यह संकट कुछ ही महीनों में खत्म हो जाएगा. वे उपभोक्ताओं और व्यवसायों पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए ऐसे कदम उठा रहे हैं, जिससे तेल की डिमांड लगातार हाई पर बनी हुई है। 

More From Author

अमित शाह तय करेंगे बंगाल का सीएम, ये नेता हैं संभावित दावेदार

चुनावी जीत के बाद MP में सियासी गतिविधियां बढ़ीं, जल्द होगा कैबिनेट विस्तार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13783/138

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.