ब्रिक्स मंच पर भारत का बढ़ता दबदबा, अमेरिका संग कारोबार पर फोकस, डॉलर नीति पर नजर

 नई दिल्ली 

अगले हफ्ते (14-15 मई) भारत की अध्यक्षता में होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक की तैयारियों में चीन और रूस की ओर से गैर-डॉलरीकरण को और तेजी देने का दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन भारत इस प्रस्ताव को लेकर कोई उत्साह नहीं दिखा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, बैठक के बाद जारी होने वाले संयुक्त बयान में स्थानीय मुद्राओं में कारोबार को बढ़ावा देने को लेकर कोई स्पष्ट या मजबूत टिप्पणी शामिल किए जाने की संभावना नहीं है।

भारत सरकार का मानना है कि अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत अभी जारी है। इसलिए वह ऐसे किसी मुद्दे को हवा नहीं देना चाहती जिसे वाशिंगटन संवेदनशील मानता हो। अमेरिका के साथ भारत का सालाना कारोबार करीब 200 अरब डॉलर का है, जबकि 50 लाख से अधिक भारतीय वहां रहते हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग भी अत्यंत मजबूत है।

भारत की अगुवाई में हो रही इस बैठक में वह स्पष्ट संदेश नहीं देना चाहता कि ब्रिक्स मंच का इस्तेमाल अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

चीन और रूस लगातार ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच अमेरिकी डॉलर की जगह राष्ट्रीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। लेकिन भारत ने आधिकारिक तौर पर साफ कर दिया है कि उसका अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर से अलग होने का कोई प्लान नहीं है और ब्रिक्स समूह भी ऐसा नहीं कर रहा।

फिर भी, ब्रिक्स के संयुक्त घोषणा-पत्रों में स्थानीय मुद्रा कारोबार को प्रोत्साहन देने का जिक्र नियमित रूप से होता रहा है। जुलाई 2025 में ब्राजील के रियो डी जनेरियो में हुए 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद जारी रियो डी जनेरियो घोषणा-पत्र में इस मुद्दे पर कहा गया था: “हम ब्रिक्स इंटरबैंक कोऑपरेशन मैकेनिज्म (आईसीएम) के प्रयासों का स्वागत करते हैं, जो परियोजनाओं और कार्यक्रमों के लिए नवाचारी वित्तीय प्रथाओं और तरीकों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिसमें स्थानीय मुद्राओं में वित्तपोषण के स्वीकार्य तंत्र ढूंढना शामिल है।''

वर्ष 2024 की शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों की एक समिति भी बनाई गई थी जिसने स्थानीय मुद्रा में कारोबार व भुगतान उपकरणों पर साझा सहयोग की रिपोर्ट तैयार की है। हालांकि इस रिपोर्ट के आधार पर अभी तक कोई अहम फैसला नहीं किया गया है।

इस बार भी बैठक के बाद जारी होने वाले संयुक्त बयान में स्थानीय मुद्रा कारोबार का सामान्य जिक्र हो सकता है, लेकिन कोई नया ठोस प्रस्ताव या समयबद्ध रोडमैप शामिल किए जाने की उम्मीद नहीं है।

वैसे भारत द्विपक्षीय स्तर पर ब्रिक्स और गैर-ब्रिक्स दोनों देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने की नीति पर लगातार काम कर रहा है। रूस के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में कहा है कि भारत के साथ उसके कुल कारोबार का 95 फीसदी हिस्सा अब स्थानीय मुद्राओं (रुपया-रूबल) में हो रहा है।

भारत ब्रिक्स के कुछ अन्य देशों जैसे यूएई व चीन के साथ भी स्थानीय मुद्रा में कारोबार करता है। यूएई के साथ तो भारत का द्विपक्षीय से समझौता भी है। उधर, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई वरिष्ठ अमेरिकी नेताओं ने ब्रिक्स पर अमेरिकी डॉलर को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। जुलाई 2025 में ब्राजील शिखर सम्मेलन के घोषणा-पत्र के बाद ट्रंप ने ब्रिक्स देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की थी, हालांकि बाद में इसे लागू नहीं किया गया।

 

More From Author

मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने घोषणा: यूपी में फिल्म ‘कृष्णावतारम्’ अब टैक्स फ्री

पहला विश्व कप मेडल: साहिल जाधव ने डेनमार्क को हराकर रचा इतिहास

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13783/138

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.