महिला वित्त एवं विकास निगम की 80वीं संचालक मंडल की बैठक में हुए बड़े फैसले

भोपाल 

महिला सशक्तिकरण की दिशा में निर्णायक कदम उठाते हुए महिला वित्त एवं विकास निगम को नई कार्य संस्कृति और परिणामोन्मुखी भूमिका में लाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। महिला-बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया की अध्यक्षता में मंत्रालय में मध्यप्रदेश महिला वित्त एवं विकास निगम की 80वीं संचालक मंडल समिति की बैठक हुई। बैठक में जिसमें निगम की कार्यप्रणाली, लंबित प्रस्तावों, महिला रोजगार, कौशल विकास और संस्थागत सुधारों को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

बैठक में मंत्री सुभूरिया ने स्पष्ट कहा कि महिला-बाल विकास विभाग का मूल उद्देश्य केवल योजनाओं का संचालन नहीं, बल्कि महिलाओं का वास्तविक आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण है। उन्होंने निर्देश दिए कि महिला वित्त एवं विकास निगम को प्रदेश की महिला वर्क-फोर्स तैयार करने वाली प्रमुख संस्था के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए निगम एक व्यापक ऑनलाइन पोर्टल तैयार करेगा, जिसमें महिलाओं की कौशल दक्षता का परीक्षण कर उन्हें कुशल, अर्द्ध-कुशल और अकुशल श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा।

मंत्री सुभूरिया ने कहा कि अकुशल एवं अर्द्ध-कुशल महिलाओं को व्यवस्थित प्रशिक्षण देकर विभिन्न विभागों, उद्योगों और संस्थानों की मांग के अनुरूप रोजगार से जोड़ा जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि निगम महिला श्रमिकों, कारीगरों और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित महिलाओं का “रिसोर्स पूल” विकसित करे, जिससे प्रदेश के विभागों और संस्थाओं को आवश्यकता अनुसार प्रशिक्षित महिला वर्क-फोर्स उपलब्ध कराई जा सके।

बैठक में यह भी तय किया गया कि महिला वित्त एवं विकास निगम अब केवल वित्तीय गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कौशल विकास, बाज़ार संपर्क, तकनीकी प्रशिक्षण और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने में भी सक्रिय भूमिका निभाएगा। मंत्री सुभूरिया ने अन्य राज्यों में महिला वित्त विकास निगमों की कार्यपद्धति का अध्ययन कर बेहतर मॉडल अपनाने के निर्देश दिए।

बैठक में निगम के सुदृढ़ीकरण को लेकर पूर्व में प्रस्तावित “चैनल पार्टनर” व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। मंत्री सुभूरिया ने स्पष्ट किया कि निगम को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाते हुए केवल गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण संस्थानों और विशेषज्ञ एजेंसियों को ही जोड़ा जाए। कौशल विकास और फाइनेंशियल लिटरेसी कार्यक्रमों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए हाई-क्वालिटी संस्थानों के एम्पैनलमेंट पर जोर दिया गया।

बैठक में IPE Global Limited के साथ हुए महत्वपूर्ण एमओयू की भी समीक्षा की गई। “देवी अहिल्याबाई नारी सशक्तिकरण मिशन” के तहत यह पहल प्रदेश की युवा महिलाओं को वेतन आधारित रोजगार से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 1.6 लाख महिलाओं को रोजगार से जोड़ना, 50 हजार महिलाओं को बाज़ार की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण देना तथा 500 से अधिक कंपनियों में जेंडर डाइवर्सिटी प्रथाओं को बढ़ावा देना है।

मंत्री सुभूरिया ने निगम के प्रशासनिक ढांचे में अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए भी सख्त निर्देश दिए। संचालक मंडल ने निर्णय लिया कि निगम के ऐसे कर्मचारी जो अन्यत्र अटैच हैं, उन्हें तत्काल नोटिस जारी किए जाएं तथा एक माह के भीतर मूल पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण नहीं करने की स्थिति में उनकी सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई की जाए।

बैठक में महिला बाल विकास, सचिव श्रीमती जी.वी. रश्मि, आयुक्त महिला बाल विकास श्रीमती निधि निवेदिता सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

 

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