ग्रामीण उत्तर प्रदेश में डिजिटल क्रांति की तैयारी, ब्रॉडबैंड, फ्री वाई-फाई और डिजिटल सेवाओं से बदलेगी गांवों की तस्वीर

लखनऊ

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से डिजिटल आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में प्रदेश सरकार का महत्वाकांक्षी “प्रोजेक्ट गंगा” अब जल्द “लाइव” होने जा रहा है। सरकार की ओर से परियोजना से जुड़े लगभग सभी प्रमुख माइलस्टोन पूरे कर लिए गए हैं और अब इसे जमीनी स्तर पर लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

प्रोजेक्ट गंगा का उद्देश्य गांवों और छोटे शहरों तक आधुनिक डिजिटल सेवाओं को पहुंचाना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र भी हाई स्पीड इंटरनेट और नई तकनीकों से सीधे जुड़ सकें। परियोजना के तहत ग्रामीण इलाकों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी, फ्री पब्लिक वाई-फाई, साइबर सिक्योरिटी, आईपीटीवी और डिजिटल सेवाओं का बड़ा नेटवर्क तैयार किया जाएगा।

जुलाई 2025 से शुरू हुआ था मिशन

प्रोजेक्ट गंगा की शुरुआत जुलाई 2025 में प्रारंभिक सीडिंग के साथ हुई थी। इसके बाद दिसंबर 2025 में विभिन्न सरकारी विभागों और स्टेकहोल्डर्स के साथ रणनीतिक चर्चाएं शुरू हुईं। जनवरी 2026 में कॉन्सेप्ट नोट साझा किया गया, जबकि 9 मार्च 2026 को वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना की उपस्थिति में एमओयू साइन किया गया। इसके बाद मीडिया कवरेज, फाइनल डीपीआर और एमएसएमई विभाग के माध्यम से जिलाधिकारियों को पत्र जारी करने जैसी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। अप्रैल 2026 तक बैंकिंग पार्टनर्स के साथ फाइनेंशियल एनेबलमेंट को लेकर भी रणनीतिक बातचीत शुरू कर दी गई, जिससे अब यह परियोजना “लाइव” के लिए पूरी तरह तैयार मानी जा रही है।

गांवों तक पहुंचेगा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर

प्रोजेक्ट गंगा के तहत डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और आधुनिक डिजिटल सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करेगा। इसके माध्यम से घर-घर हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड, पब्लिक वाई-फाई और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच संभव होगी। साथ ही सीसीटीवी आधारित सुरक्षा समाधान, साइबर सिक्योरिटी सेवाएं और संस्थानों की डिजिटल कनेक्टिविटी को भी मजबूत किया जाएगा। परियोजना का लक्ष्य केवल इंटरनेट पहुंचाना नहीं, बल्कि गांवों को भविष्य की डिजिटल तकनीकों के लिए तैयार करना है।

युवाओं को मिलेंगे रोजगार और ट्रेनिंग के अवसर

प्रोजेक्ट गंगा के जरिए ग्रामीण युवाओं को डिजिटल रोजगार से जोड़ने पर विशेष फोकस किया गया है। इसके तहत फ्रीलांसिंग, रिमोट वर्क, ऑनलाइन वोकेशनल ट्रेनिंग और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे गांवों में रहने वाले युवाओं को भी बड़े शहरों जैसी डिजिटल संभावनाओं का लाभ मिलेगा। माना जा रहा है कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल इकॉनामी को नई गति दे सकती है और रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती है। योगी सरकार का मानना है कि डिजिटल कनेक्टिविटी ही भविष्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ऐसे में प्रोजेक्ट गंगा “कनेक्टेड गांव, समृद्ध यूपी” के विजन को मजबूत आधार देगा। सरकार की कोशिश है कि डिजिटल सेवाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और उत्तर प्रदेश तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर राज्य के रूप में नई पहचान बनाए।

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