लखनऊ
योगी सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह बनाने के लिए लगातार व्यापक प्रयास कर रही है। इसी क्रम में योगी सरकार द्वारा संचालित "स्टेट रिव्यू मिशन" के तहत प्रदेश भर में स्वास्थ्य संस्थानों का बड़े पैमाने पर निरीक्षण और समीक्षा अभियान चलाया जा रहा। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करना, कमियों की पहचान करना और आम जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
29 अक्टूबर 2025 से "स्टेट रिव्यू मिशन" की शुरुआत
अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग अमित कुमार घोष ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर नागरिक को उसके घर के पास गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। सीएम योगी की मंशा के अनुरूप चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन लगातार स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए कार्य कर रहे हैं। इसी के तहत अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग अमित कुमार घोष द्वारा 29 अक्टूबर 2025 से "स्टेट रिव्यू मिशन" की शुरुआत की गई। मिशन के तहत प्रदेश के सभी स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति, गुणवत्ता और प्रभावशीलता की गहन समीक्षा की जा रही है। मंडल स्तर पर संचालित अभियान में स्वास्थ्य इकाइयों का स्थल निरीक्षण, व्यवस्थाओं का मूल्यांकन तथा अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। पिछले छह माह के दौरान 18 मंडलों के सभी 75 जिलों और 826 विकास खंडों में संचालित स्वास्थ्य संस्थानों का बड़े पैमाने पर निरीक्षण किया गया।
राज्य स्तर पर विशेष "फैसिलिटी ऑब्जर्वेशन चेकलिस्ट" विकसित की गई
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक एवं स्वास्थ्य सचिव डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि अभियान के दौरान प्रदेश की कुल 33,044 चिकित्सा इकाइयों में से 16,249 चिकित्सा इकाइयों का निरीक्षण किया गया, जो कुल इकाइयों का लगभग 49 प्रतिशत है। निरीक्षण कार्य 901 मंडलीय एवं जनपदीय अधिकारियों तथा 43 राज्य स्तरीय अधिकारियों की दो सदस्यीय टीमों द्वारा किया गया। इन टीमों ने प्रदेश के 93 जिला अस्पतालों, 861 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, 2,825 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, 12,405 स्वास्थ्य उपकेंद्रों एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, 50 विशेष चिकित्सालयों तथा 15 मेडिकल कॉलेजों का स्थलीय मूल्यांकन किया। इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित 2,661 मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेलों का भी निरीक्षण किया गया। इन स्वास्थ्य मेलों के माध्यम से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य जांच, परामर्श और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कुछ मंडलों में निरीक्षण के दूसरे चरण का कार्य भी जारी है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सके।
उन्होंने बताया कि स्टेट रिव्यू मिशन के तहत निरीक्षण के लिए राज्य स्तर पर विशेष "फैसिलिटी ऑब्जर्वेशन चेकलिस्ट" विकसित की गई। इसके माध्यम से अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी ढांचे, दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता, मानव संसाधनों की स्थिति, एंबुलेंस सेवाओं, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में उपलब्ध सुविधाओं तथा रिकॉर्ड प्रबंधन का मूल्यांकन किया गया। साथ ही रोगियों से फीडबैक लेकर स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक गुणवत्ता का भी आकलन किया गया।
निगरानी और समीक्षा से स्वास्थ्य संस्थानों की बढ़ी कार्यक्षमता
स्टेट रिव्यू मिशन के दौरान किए गए गहन निरीक्षण, आकस्मिक जांच और लगातार समीक्षा का सकारात्मक प्रभाव अब प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। विभिन्न स्वास्थ्य सूचकांकों में सुधार दर्ज किया गया है और चिकित्सा संस्थानों में सेवा गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा जवाबदेही के नए मानक स्थापित हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की सतत निगरानी और समीक्षा से न केवल स्वास्थ्य संस्थानों की कार्यक्षमता बढ़ रही है, बल्कि आम नागरिकों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर विश्वास भी मजबूत हुआ है। प्रदेश सरकार का यह अभियान स्वास्थ्य सेवाओं को जनकेंद्रित, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता के अनुरूप प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार और आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।

