बंगाल में महाराष्ट्र जैसा ‘खेला’ होने के संकेत? ऋतब्रत बनर्जी की भूमिका पर बढ़ी चर्चा

  कोलकाता

पश्चिम बंगाल की सत्ता बदलते ही ममता बनर्जी के सामने सियासी संकट गहराता जा रहा है. चुनाव में मिली करारी हार के बाद एक-एक करके टीएमसी के पत्ते झड़ते जा रहे हैं. टीएमसी के एक के बाद एक नेता बागी तेवर अपनाता जा रहा है. ममता बनर्जी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. टीएमसी से निष्कासित विधायक रि ऋतब्रत बनर्जी क्या अब टीएमसी के 'एकनाथ शिंदे' साबित होंगे? 

साल 2022 का महाराष्ट्र में जब एकनाथ शिंदे ने शिवसेना से बगावत कर उद्धव ठाकरे के हाथों से सरकार और सियासत दोनों ही छीन ली थी. अब ठीक वैसी ही सियासी स्क्रिप्ट अब पश्चिम बंगाल में लिखे जाने की सुगबुगाहट है. इसके केंद्र में टीएमसी से निष्कासित विधायक  ऋतब्रत बनर्जी हैं। 

 ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने बीती रात कोलकाता स्थित विधायक हॉस्टल में टीएमसी के कई विधायकों से मुलाकात की. टीएमसी के 80 विधायकों में से 60 विधायकों ने ममता बनर्जी की बैठक से दूरी बना ली थी. अब उन्हीं विधायकों से ऋतब्रत बनर्जी की मुलाकात ने बंगाल में सियासी हलचल बढ़ा दी है.  ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोई बड़ा खेला होने जा रहा है? 

टीएमसी में बगावत के बढ़ते आसार 
बंगाल की सत्ता से बाहर होते ही ममता बनर्जी की सियासी चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही है. टीएमसी के कार्यकर्ता से लेकर नेता तक का मोहभंग हो रहा है. ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को लेकर विरोध के सुर टीएमसी में तेज होते जा रहे हैं.  टीएमसीके कई नेता और विधायक पार्टी की इस हालत के लिए खुले तौर पर उन्हें ही दोषी ठहरा रहे हैं. वे उन पर भ्रष्टाचार, घमंड, परिवारवाद, सीनियर नेताओं को किनारे करने और I-PAC के प्रोफेशनल्स के ज़रिए पार्टी को अपनी जागीर की तरह चलाने का आरोप लगा रहे हैं। 

टीएमसी के कुछ नेता खुले तौर पर पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं कि 15 साल सत्ता में रहने के बाद पार्टी जमीनी हकीकत से कट गई है. सिंडिकेट और 'कट-मनी' (कमीशन) की आदी हो गई है, और हिंसक रूप से अहंकारी हो गई है. वे जवाबदेही और आत्म-मंथन की मांग कर रहे हैं, जिसका ममता बनर्जी ने जिद के साथ विरोध किया है.  टीएमसी में टूटने का सबसे खतरा वहीं से आ रहा है जहां से तृणमूल कांग्रेस खड़ी हुई थी, मतलब जमीनी स्तर से विरोध तेज हो गया है। 

ममता बनर्जी ने रविवार को टीएमसी विधायकों की  पीशी-भाईपो की बुलाई थी, जिसमें 80 में से सिर्फ टीएमसी 20 विधायक ही शामिल हुए. इससे पहले विभिन्न नगर निकायों के लगभग 100 TMC पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है. कई टीएमसी नेता की बीजेपी के साथ बातचीत कर रहे हैं. कुछ लोग, जैसे फिल्म निर्माता और पूर्व विधायक राज चक्रवर्ती, चुनाव में हार के बाद पूरी तरह से राजनीति छोड़ चुके हैं. इस तरह टीएमसी से नेताओं को मोहभंग हो रहा है, जो ममता बनर्जी के लिए सियासी टेंशन का सबब बनता जा रहा है। 

 ऋतब्रत बनर्जी बनेंगे टीएमसी के 'शिंदे'
टीएमसी के टिकट पर विधायक बने ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिसके चलते ममता बनर्जी ने दोनों विधायकों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. अब इन्हीं दोनों विधायकों ने टीएमसी के साथ खेला करने की कवायद में जुट गए हैं.  टीएमसी के कई विधायकों के साथ  ऋतब्रत बनर्जी ने देर रात मुलाकात की है. इससे यह अटकलें तेज हो गई हैं कि टीएमसी के भीतर एक नया समूह आकार ले सकता है। 

विधायक हॉस्टल में  ऋतब्रत बनर्जी से मिलने वालों में पश्चिमी मिदनापुर की एक महिला विधायक भी शामिल थीं.  ऋतब्रत और संदीपन से मिलने वाले टीएमसी के एक विधायक के मुताबिक हम पार्टी तोड़कर कोई अलग दल बनाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, हम टीएमसी के झंडे तले ही काम करेंगे. ऐसे में साफ है कि टीएमसी के अंदर कुछ सियासी खिचड़ी जरूर पक रही है.  टीएमसी से निष्कासित विधायक जिस तरह से एक्टिव हैं और अभिषेक पर पार्टी को हाईजैक करने का आरोप लगाया, उससे सियासत तेज हो गई है। 

 ऋतब्रत बनर्जी ने खोला सियासी मोर्चा
 ऋतब्रत बनर्जी ने आजतक से बात करते हुएअभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को सीधे तौर पर चुनौती दी है. मुख्य मुद्दा पार्टी में IPAC के संबंध में जूनियर बनर्जी की भूमिका अहम थी. TMC विधायक कुणाल घोष ने आरोप लगाया था कि निकाले गए ये दोनों विधायक पार्टी को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं और उन्होंने दक्षिण कोलकाता के एक होटल में कुछ विधायकों के साथ एक गुप्त बैठक की थी, बाद में ऋतब्रत ने इस आरोप से इनकार कर दिया। 

अभिषेक बनर्जी की घटना ने बढ़ाई टेंशन
अभिषेक बनर्जी को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ा. वह सोनारपुर गए थे., उनके ऊपर अंडे और जूते फेंके गए। कल्याण बनर्जी ने अगले दिन आरोप लगाया कि उनके सिर पर एक पत्थर लगा था, लेकिन इन सबसे ऊपर, जहां भी वे गए, चोर, चोर के नारे लगे. इस तरह का दृश्य हर टीएमसी विधायक और सांसद को सियासी तौर पर चिंतित कर रहा है। 

टीएमसी के कई नेताओं को डर सता रहा है कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के साथ जुड़ाव उनका राजनीतिक करियर बर्बाद कर सकता है.  इसके चलते ही टीएमसी के नेता ममता बनर्जी की बैठक में शामिल नहीं हुए. इससे ममता बनर्जी की सियासी टेंशन बढ़ गई है, क्योंकि जो विधायक बैठक में नहीं आए, लेकिन उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात की है. इसके चलते ही माना जा रहा है कि कोई बड़ा खेला होने जा रहा है। 

कुणाल घोष की अपील डूबते जहाज न छोड़े
टीएमसी के 80 विधायकों और 29 सांसदों में से आधे से ज्यादा (लगभग 40-45 विधायक और 15-18 सांसद) ममता बनर्जी से अलग होकर 'दो घास-फूल' वाले चुनाव चिह्न के लिए चुनाव आयोग से संपर्क करते हैं, तो यह ममता बनर्जी और उनके भतीजे के पार्टी पर दावे को खारिज करने के लिए काफी हो सकता है. सोमवार को MLA कुणाल घोष ने टीएमसी नेताओं से हाथ जोड़कर गुज़ारिश की कि वे डूबते जहाज को छोड़कर न भागें, लेकिन ऐसे मुश्किल समय में, उनके नेता को उन पर भी यह भरोसा नहीं है कि वे कोई लाइफबोट छीनकर कूद न जाएं। 

बंगाल चुनाव के बाद हुई समीक्षा बैठक में कम से कम तीन चुने हुए विधायकों ने खुलकर पार्टी नेतृत्व का विरोध किया. उन्होंने चुनाव में मिली करारी हार के लिए अभिषेक बनर्जी की पसंद को जबरदस्ती थोपे जाने को जिम्मेदार ठहराया. कआलोचना करने वालों में वे दो विधायकों निकाल दिया गया है. तीसरे विधायक, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि वे कुणाल घोष हैं। 

दरअसल, ममता बनर्जी जिन्हें कभी जमीनी संघर्ष का चेहरा माना जाता था, लेकिन सत्ता से बाहर होते ही धीरे-धीरे अपना नियंत्रण खोती जा रही हैं.  टीएमसी अध्यक्ष के तौर पर और संगठन पर, दोनों पर ही उन्होंने अपना नियंत्रण लगभग खो दिया है. ऐसे में पार्टी के भीतर की उथल-पुथल से ममता बनर्जी के लिए सियासी टेंशन खड़ी कर दी है, पार्टी में जिस तरह से विरोध के सुर उठ रहे हैं, उससे साफ है कि महाराष्ट्र की तरह सियासी खेला होने जा रहा है। 

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