10 रुपये की ओवरचार्जिंग पड़ी भारी, उपभोक्ता शिकायत के बाद सरकार को देना पड़ा 25 हजार का मुआवजा

कोच्चि

 अक्सर कई जगहों पर प्रिंट रेट (MRP) से ज्यादा पैसे वसूल लिए जाते हैं और लोग इसे मामूली बात मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन केरल में एक ग्राहक से बीयर की बोतल पर 10 रुपये ज्यादा वसूलना सरकारी शराब निगम को भारी पड़ गया। कंज्यूमर कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए केरल स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन (KSBC) को ग्राहक को 25,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

क्या है पूरा मामला?
केरल के पथानामथिट्टा में एक शख्स ने KSBC के आउटलेट से 650 ml की एक बीयर की बोतल खरीदी। इस बीयर की बोतल पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) 170 रुपये छपा था, लेकिन आउटलेट के कर्मचारियों ने इसके लिए 180 रुपये (यानी 10 रुपये अतिरिक्त) का बिल थमाया।

जब ग्राहक ने रेट में इस अंतर का विरोध किया, तो कर्मचारियों ने बदसलूकी की। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिल में जो राशि लिखी है, वही देनी होगी और अगर कोई आपत्ति है तो जाकर शिकायत दर्ज करा दें। इसके बाद परेशान ग्राहक ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कंज्यूमर कोर्ट (उपभोक्ता आयोग) का दरवाजा खटखटाया और मुआवजे की मांग की।

शराब निगम ने दी ये दलील
कंज्यूमर कोर्ट में KSBC ने 180 रुपये वसूलने की बात तो स्वीकार की, लेकिन इसके बचाव में कई तर्क पेश किए। निगम का कहना था कि केरल सरकार ने 'सोशल सिक्योरिटी सेस' (सामाजिक सुरक्षा उपकर) लागू किया था और शराब की कीमतों में संशोधन हुआ था, जिस वजह से 10 रुपये ज्यादा लिए गए।

निगम ने दलील दी कि गोदामों और सप्लाई चेन में पहले से रखी करोड़ों शराब की बोतलों पर नई कीमत का लेबल (Re-labeling) लगाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था।

निगम ने लीगल मेट्रोलॉजी नियमों का हवाला देते हुए कहा कि पुराने स्टॉक को नई कीमत पर बेचने की सरकारी अनुमति थी और आउटलेट पर नई कीमतों का नोटिस भी लगाया गया था। साथ ही, ग्राहक पर ही काम में बाधा डालने और कर्मचारियों से दुर्व्यवहार करने का आरोप भी मढ़ दिया।

कंज्यूमर कोर्ट की अहम टिप्पणी
पथानामथिट्टा उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष जॉर्ज बेबी और सदस्य निषाद थंकप्पन की बेंच ने 3 जून को सुनाए गए अपने आदेश में निगम की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि नियम 18(2) स्पष्ट रूप से रिटेलर्स को पैकेट पर छपे रिटेल प्राइस से अधिक कीमत पर सामान बेचने से रोकता है। 170 रुपये की MRP वाली बोतल 180 में बेचना सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है।

किसी भी ग्राहक से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि उसे सरकार के अंदरूनी आदेशों या फाइलों की जानकारी हो। एक उपभोक्ता के तौर पर ग्राहक केवल पैकेट पर दी गई जानकारी पर भरोसा करता है। बोतल पर छपा MRP ही ग्राहक और विक्रेता के बीच कॉन्ट्रैक्ट प्राइस है। कोर्ट ने कहा कि MRP से ज्यादा पैसा वसूलना 'कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019' के तहत 'सर्विस में कमी' और 'अनुचित व्यापार व्यवहार' है।

क्या सुनाया गया फैसला?
अदालत ने माना कि इस अवैध वसूली की वजह से ग्राहक को भारी मानसिक परेशानी और असुविधा का सामना करना पड़ा। इस तरह के ट्रेंड को रोकने के लिए आयोग ने सख्त फैसला सुनाते हुए KSBC को आदेश दिया कि ग्राहक से वसूले गए 10 रुपये अतिरिक्त राशि को शिकायत दर्ज करने की तारीख से 9% सालाना ब्याज के साथ वापस किया जाए। मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए 15,000 रुपये का मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा कानूनी खर्च के तौर पर 10,000 रुपये भी चुकाने होंगे। कुल मिलाकर कॉरपोरेशन को 30 दिन के भीतर ग्राहक को 25,000 रुपये का भुगतान करना होगा।

More From Author

राफेल के बाद सेना को मिला बड़ा हथियार, 23,000 करोड़ के रक्षा सौदे से दुश्मनों की बढ़ी चिंता

मौसम का कहर! तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश का अलर्ट, IMD ने लोगों को किया सतर्क

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13814/1

RO No. 13843/161

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.