अयोध्या में उठे सवाल, अब जांच के लिए मैदान में उतरी SIT

अयोध्या  
अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी का मामला इन दिनों सुर्खियों में है. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के आरोपों के बाद यह विवाद राजनीतिक रंग ले चुका है. मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी और उनके पास से लाखों रुपये बरामद होने के बाद जांच तेज कर दी गई है. उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे प्रकरण की तह तक पहुंचने के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है. ऐसे में जानिए, इस विवाद की शुरुआत कैसे हुई और अब तक क्या-क्या घटनाक्रम सामने आए हैं?

ऐसे हुई विवाद की शुरुआत
जून की शुरुआत में अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा किए गए ऑडिट के दौरान दानपात्र से नकदी और अन्य वस्तुओं के गायब होने की आशंका सामने आई. इसके बाद मंदिर परिसर और दानपात्र के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की गई. फुटेज में एक कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध दिखाई दी, जिसके आधार पर आंतरिक स्तर पर जांच शुरू की गई. शुरुआत में मामले को गोपनीय रखा गया.

7 जून को अखिलेश यादव की एंट्री से सुर्खियों में आया मामला
राम मंदिर चंदा चोरी मामले में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को योगी सरकार पर हमला बोला. उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके का कि अयोध्या में मंदिर के चढ़ावे को लेकर जो जानकारी सामने आई है, वह गंभीर चिंता का विषय है. अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि यदि डबल इंजन सरकार की निगरानी व्यवस्था इतनी प्रभावी होती और दूरबीन व ड्रोन सही तरीके से काम कर रहे होते, तो विपक्ष को सवाल उठाने का मौका ही नहीं मिलता. उन्होंने कहा कि चढ़ावे में चोरी होगी तो उसकी शिकायत भी होगी.

इसके बाद अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी के मामले को लेकर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने भी योगी सरकार पर निशाना साधा. संजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र में दान राशि की कथित चोरी बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष व पारदर्शी जांच होनी चाहिए. उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए पूरे मामले की सच्चाई जनता के सामने लाने की बात कही.

10 जून को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कही जांच कराने की मांग
अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी की बात बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने मानी. कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के तीन दिवसीय दौरे के दौरान पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा कि मामले की जांच सरकार करा रही है. सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह सतर्क है और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं.

उन्होंने कहा कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो. राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े किसी भी मामले में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है.

13 जून को CM योगी के आदेश के बाद SIT गठित
13 जून को अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के चंदे और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई है. अधिकारियों के मुताबिक SIT का गठन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर किया गया. यह कदम 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के अनुरोध पर उठाया गया, जिसने इसे "गलत जानकारी को रोकने और सच सामने लाने" के लिए ज़रूरी बताया और आरोप लगाया कि राम मंदिर की छवि खराब करने की कोशिशें की जा रही हैं.

SIT में लखनऊ के डिविज़नल कमिश्नर IAS विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (IG) IPS किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं. राज्य सरकार के अनुसार मंदिर ट्रस्ट ने अयोध्या मंदिर परिसर में दान पेटियों से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की थी.

13 जून को मामले में हुई 2 कर्मचारियों की गिरफ्तारी
जांच के दौरान 13 जून को मंदिर में चढ़ावे की राशि गिनने वाले कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं. बताया जा रहा है कि कुछ रकम घर की आलमारी में रखी गई थी, जबकि कुछ नकदी गोबर के ढेर में दबाकर छिपाई गई थी. बरामद धनराशि के स्रोत को लेकर फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों ने इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है.

मामले में एक और कर्मचारी को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है. दोनों कर्मचारियों की जिम्मेदारी मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़े कार्यों की थी. बताया जा रहा है कि दोनों कर्मचारियों को प्रतिमाह लगभग 18 से 20 हजार रुपये वेतन मिलता था, लेकिन हाल के महीनों में उनकी संपत्तियों में असामान्य वृद्धि की चर्चा जांच एजेंसियों के रडार पर है. जानकारी के मुताबिक एक कर्मचारी ने लगभग डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य की भूमि खरीदी, जबकि दूसरे ने करीब 40 लाख रुपये का प्लॉट लिया है.

5 दिनों के भीतर दो बार अयोध्या पहुंचे नृपेंद्र मिश्र
इधर, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी पांच दिनों के भीतर दूसरी बार अयोध्या पहुंचे. हालांकि उन्होंने कथित धन गबन के मामले पर टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि उनकी जिम्मेदारी केवल मंदिर निर्माण कार्यों की निगरानी तक सीमित है. फिलहाल राम मंदिर की दान राशि से जुड़ा यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और विश्वास से जुड़ा हुआ है. ऐसे में अब सभी की निगाहें संभावित SIT जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं.

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