COVID-19 की उत्पत्ति पर नई बहस, चीन की लैब और अमेरिकी फंडिंग को लेकर सामने आए चौंकाने वाले दावे

बीजिंग /न्यूयॉर्क

पूरी दुनिया को झकझोर देने वाली कोरोना महामारी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. कुछ दिनों पहले अमेरिकी खुफिया विभाग की निदेश का पद छोड़ने का ऐलान करने वाली तुलसी गबार्ड नेकोरोना वायरस को लेकर बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के चीफ मेडिकल एडवाइजर एंथोनी फुसी ने चीन स्थित वुहान के उस लैब को फंडिंग की थी, जहां से कोरोना महामारी फैली थी। 

प्रतिबंधित दस्तावेज हुए सार्वजनिक
अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने हाल ही में अमेरिकी की ओर से फंड किए गए बायोलैब्स से संबंधित कई दस्तावेज को सार्वजनिक कर दिया.  उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि अमेरिका के राष्ट्रीय एलर्जी और संक्रामक रोग संस्थान (एनआईएआईडी) के पूर्व निदेशक एंथनी फौसी ने कोरोना महामारी की शुरुआत पर खुफिया आकलन को प्रभावित किया और बाद में संसद के सामने कसम खाकर ऐसे कनेक्शन को खारिज किया था। 

राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के दफ्तर (ओडीएनआई) ने इस दस्तावेज को जारी किया. गबार्ड का यह कदम ट्रंप प्रशासन के उस प्रयास में एक बड़ा कदम है, जिसमें महामारी की उत्पत्ति की फिर से समीक्षा करने और वैश्विक स्वास्थ्य संकट के दौरान अमेरिकी सरकारी एजेंसियों, वैज्ञानिकों और खुफिया अधिकारियों की भूमिका की जांच करने की बात कही गई है। 

गबार्ड के अनुसार, नए जारी किए गए बातचीत और दस्तावेजों से पता चलता है कि जब वायरस नैचुरली निकला या चीन के वुहान की लैब से, इसपर बहस तेज हुई तो कैसे फौसी ने राष्ट्रीय एलर्जी और संक्रामक रोग संस्थान (एनआईएआईडी) के निदेशक के तौर पर काम करते हुए खुफिया अधिकारियों के साथ बातचीत की। 

बाइडेन के अधिकारी पर तुलसी गबार्ड का बड़ा आरोप
गबार्ड ने कहा, 'कोविड-19 महामारी की वजह से हमारे लाखों साथी, अमेरिकियों और दुनिया भर के अनगिनत लोगों को बहुत मुश्किल भरे दौर से गुजरना पड़ा. सालों के झूठ, सेंसरशिप और छिपाने के बाद, अमेरिकी लोग पारदर्शिता, सच्चाई और जवाबदेही के हकदार हैं.' उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. फौसी जैसे राजनीतिक स्वार्थी नेताओं ने अपने गलत कामों और सत्ता के दुरुपयोग को छुपाया, खुफिया जानकारी में हेरफेर किया, कांग्रेस से झूठ बोला और देश को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी सूचानाओं तक निर्वाचित राष्ट्रपति की पहुंच सीमित करके उनकी छवि को कमजोर किया। 

ओडीएनआई ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पारदर्शिता संबंधी निर्देश के तहत उसने एक वर्ष तक चली गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की समीक्षा प्रक्रिया संचालित की. इस दौरान अनियमितताओं का खुलासा करने वाले अधिकारियों की गवाही भी एकत्र की गई. इन अधिकारियों ने आरोप लगाया कि वायरस की उत्पत्ति को लेकर आधिकारिक आकलनों पर सवाल उठाने के कारण उनके खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की गई। 

ओडीएनआई ने दावा किया कि फौसी के खुफिया अधिकारियों के साथ अच्छे संबंध थे, जिससे वह कोविड-19 की शुरुआत के बारे में चर्चा में अहम भूमिका निभा पाए. इसमें आरोप लगाया गया कि फौसी ने खुफिया एजेंसियों से सलाह लेने वाले विशेषज्ञों के बारे में सुझाव दिए और ऐसे आकलन बनाने में मदद की जिन्हें बाद में वैज्ञानिक सहमति के तौर पर सबके सामने पेश किया गया। 

बाइडेन सरकार ने की थी समीक्षा बैठक
जुलाई 2021 के एक इंटेलिजेंस कम्युनिटी ईमेल में कहा गया था कि अधिकारी फौसी के सुझावों पर आगे बढ़ना चाहते थे क्योंकि उन्हें एक एसएमई के ​​तौर पर देखा जाता था, जिसके पास मौजूदा और ऐतिहासिक रिसर्च के बारे में बहुत जानकारी है और जो शायद ज्यादातर लोगों से बेहतर जानता है कि असली कोरोना वायरस विशेषज्ञ कौन हैं। 

तत्कालीन बाइडेन सरकार ने कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर 90 दिनों की समीक्षा बैठक की थी. इसे लेकर दस्तावेज में बताया गया है कि 2021 में खुफिया अधिकारी ने 90-दिनों की समीक्षा के दौरान फौसी की तरफ से रिकमेंड किए गए वैज्ञानिक तक पहुंचने को लेकर चर्चा कर रहे थे. आंतरिक पत्राचार में उन्हें एक सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट बताया गया था, जिनकी रिकमेंडेशन्स को समीक्षा प्रक्रिया के लिए जरूरी माना गया था। 

फौसी ने 2024 में कोरोना वायरस महामारी पर हाउस सिलेक्ट सबकमेटी के सामने अपनी गवाही में वायरल रिसर्च के बारे में इंटेलिजेंस एजेंसियों के साथ बातचीत की जानकारी से इनकार किया. रिपोर्ट में कहा गया है कि डॉक्यूमेंट्स में इंटेलिजेंस अधिकारियों और कोविड-की उत्पत्ति की जांच के बीच कई बातचीत दिखाई गई हैं. उस समय कुछ सरकारी कम्युनिकेशन ने इस दावे को खारिज कर दिया था कि वायरस को लैब में बनाया गया था, जबकि दूसरों ने लैबोरेटरी एक्सीडेंट सिनेरियो और वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की क्षमताओं की जांच की। 

वुहान लैब को लेकर बड़ा खुलासा
लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी की ओर से मई 2020 में तैयार किए गए एक आकलन में यह निष्कर्ष निकाला गया कि वुहान में लेबोरेटरी में बदले गए कोरोना वायरस के गलती से फैलने के लिए हालात मौजूद थे और लेबोरेटरी और प्राकृतिक उत्पत्ति की परिकल्पनाओं को बराबर महत्व दिया गया. ओडीएनआई रिलीज में अनियमितताओं का खुलासा करने वाले अधिकारियों के आरोप भी शामिल हैं कि जिन खुफिया विश्लेषकों ने लैब-लीक हाइपोथीसिस का समर्थन किया, उन्हें परेशानी झेलना पड़ी, किनारे कर दिया गया या अलग राय रखने से रोका गया। 

तुलसी गबार्ड ने कहा कि इनमें से कई शिकायतों को आगे की समीक्षा के लिए इंटेलिजेंस कम्युनिटी इंस्पेक्टर जनरल के पास भेज दिया गया है. कोविड-19 की शुरुआत महामारी के सबसे विवादित मुद्दों में से एक है. अमेरिकी खुफिया एजेंसियां ​​लंबे समय से बंटी हुई हैं, कुछ का मानना ​​है कि यह जानवरों से प्राकृतिक रूप से फैला है और कुछ लैब से जुड़ी घटना को ज्यादा संभावित वजह मानते हैं। 

 

More From Author

तलाक के एक दशक बाद हुआ पुनर्मिलन, बेटियों की खातिर फिर साथ आए पति-पत्नी

WhatsApp यूजर्स के लिए नया सब्सक्रिप्शन प्लान, ₹79 प्रति माह में मिलेगा प्रीमियम अनुभव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13814/1

RO No. 13843/161

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.