गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वालों के लिए अहम अपडेट, 30 दिनों की डेडलाइन से पहले निपटाएं काम

नई दिल्ली

मिडिल ईस्ट टेंशन के चलते देशभर में एलपीजी की सप्लाई पर असर पड़ते हुए नजर आया. इस बीच सरकार ने कई बड़े फैसले लिए जिसका सीधा असर एलपीजी उपभोक्ताओं पर पड़ा है. देश में एलपीजी सप्लाई को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है. अब जिन घरों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा उपलब्ध है और उपभोक्ता PNG कनेक्शन ले चुके हैं, उन्हें निर्धारित समय के अंदर अपना LPG कनेक्शन सरेंडर करना होगा. सरकार का मानना है कि इससे गैस डिस्ट्रिबुशन प्रोसेस अधिक ट्रांसपरेंट बनेगा, डुप्लिकेट कनेक्शनों पर रोक लगेगी और जरूरतमंद परिवारों तक LPG की पहुंच बेहतर हो सकेगी। 

हाल के सालों में कई शहरों में PNG नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है. इसके बावजूद कई ऐसे परिवार हैं जो PNG और LPG दोनों सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं. सरकार का कहना है कि इससे रिसोर्स और सब्सिडी व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. इसी को ध्यान में रखते हुए नए नियम लागू किए गए हैं। 

क्या है नया 30 दिन वाला नियम?
सरकार द्वारा जारी किए गए नियमों के अनुसार, अगर किसी घरेलू उपभोक्ता ने अपने घर में PNG कनेक्शन ले लिया है, तो उसे 30 दिनों के भीतर अपना LPG कनेक्शन सरेंडर करना होगा. यह नियम इंडेन, भारतगैस और एचपी गैस समेत सभी प्रमुख घरेलू LPG कनेक्शनों पर लागू होगा. जैसे- अगर किसी उपभोक्ता को 10 जून को PNG कनेक्शन मिला है, तो उसे अगले 30 दिनों के भीतर LPG कनेक्शन वापस करना होगा. फिक्स्ड अवधि के बाद ऐसे उपभोक्ताओं को LPG रिफिल या संबंधित सुविधाएं मिलने में दिक्कत आ सकती है. सरकार का फोकस है कि एक परिवार में एक ही घरेलू गैस व्यवस्था को बढ़ावा देना है। 

सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?
सरकार की ‘वन हाउसहोल्ड, वन गैस कनेक्शन’ सोच के तहत यह कदम उठाया गया है. अधिकारियों का मानना है कि कई शहरी क्षेत्रों में PNG उपलब्ध होने के बावजूद लोग LPG कनेक्शन बनाए रखते हैं, जिससे गैस डिस्ट्रिबुशन पर अनावश्यक दबाव पड़ता है. नए नियम के जरिए डुप्लिकेट कनेक्शनों को कम करने, सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने और उन इलाकों में LPG की सप्लाई बढ़ाने को कोशिश की जा रही है जहां अभी PNG नेटवर्क नहीं पहुंचा है. इससे गैस डिस्ट्रिबुशन अधिक बेहतर और संतुलित बनने की उम्मीद है। 

PNG अपनाने वालों के लिए क्या हैं सुविधाएं?
सरकार ने उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कुछ राहत भी दी है. यदि कोई परिवार भविष्य में ऐसे क्षेत्र में ट्रांसफर होता है जहां PNG की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो उसके लिए LPG कनेक्शन दोबारा हासिल करना आसान बनाया गया है. LPG कनेक्शन सरेंडर करते समय उपभोक्ता ट्रांसफर वाउचर प्राप्त कर सकते हैं. इस डॉक्यूमेंट की मदद से वे नए स्थान पर आसान प्रोसेस के जरिए LPG कनेक्शन दोबारा शुरू करा सकते हैं. इससे उपभोक्ताओं को नए कनेक्शन के लिए लंबे प्रोसेस से नहीं गुजरना पड़ेगा। 

OTP और e-KYC से बढ़ी निगरानी
गैस डिस्ट्रिबुशन प्रोसेस को और सुरक्षित तथा ट्रांसपरेंट बनाने के लिए सरकार पहले ही OTP आधारित डिलीवरी सिस्टम लागू कर चुकी है. अब सिलेंडर की डिलीवरी के समय उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP भेजा जाता है, जिसे वेरिफाई करने के लिए डिलीवरी एजेंट को बताना होता है. इसके अलावा, उज्ज्वला योजना समेत अलग-अलग लाभार्थियों के लिए e-KYC प्रोसेस भी जरूरी हो गई है. सरकार चाहती है कि सभी उपभोक्ताओं का डेटा अपडेट और वेरिफाइड रहे ताकि फायदा सही लोगों तक पहुंच सके और फर्जी कनेक्शनों पर रोक लगाई जा सके। 

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