अजमेर में खीरे की खेती परियोजना को लेकर मंत्री के सब्सिडी लाभ पर हितों के टकराव के सवाल उठे

अजमेर
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को अपने ही मंत्रालय के अधीन आने वाली एक योजना से लगभग 99 लाख रुपये की भारी-भरकम सब्सिडी मिली है। यह सब्सिडी उन्हें राजस्थान में उनके खीरे के खेत के लिए दी गई है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह पैसा जिस बोर्ड द्वारा मंजूर किया गया, मंत्री महोदय खुद उसके पदेन उपाध्यक्ष हैं।

साइनबोर्ड खोलता है राज: क्या है पूरा मामला?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान के अजमेर स्थित पीह में एक विशाल खेत है, जहां कृत्रिम तालाब और चार बड़े पॉलीहाउस बने हैं। यहां लगे सफेद साइनबोर्ड पर लिखा है, "राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB), कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सहायता प्राप्त।" बोर्ड पर लाभार्थी का नाम 'भागीरथ चौधरी' और 50% सब्सिडी की रकम '99,60,000 रुपये' लिखी गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में यह सामने आया है कि केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को यह सब्सिडी कुछ महीने पहले उसी मंत्रालय की योजना से मिली है, जिसमें वह खुद मंत्री (MoS) हैं। यह पैसा राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की योजना "हॉर्टिकल्चर फसलों के उत्पादन और फसल के बाद के प्रबंधन के माध्यम से वाणिज्यिक बागवानी का विकास" के तहत दिया गया है। 2025 में इस योजना के तहत जिन 467 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली, उसमें मंत्री जी का 16,592 वर्ग मीटर में खीरे की खेती का प्रोजेक्ट भी शामिल है।

मंजूरी में 'सुपरफास्ट' स्पीड: प्रोजेक्ट और लोन की फुल डिटेल
साइनबोर्ड के मुताबिक, प्रोजेक्ट की कुल लागत 1.99 करोड़ रुपये है। इसमें प्रमोटर का शेयर 49.8 लाख रुपये है। चौधरी ने इस प्रोजेक्ट के लिए HDFC बैंक से 1.49 करोड़ रुपये का लोन लिया था।

मार्च 2026 में NHB से अंतिम मंजूरी मिलने के कुछ ही हफ्तों के भीतर 99 लाख रुपये से ज्यादा की सब्सिडी सीधे उनके HDFC बैंक के लोन खाते में क्रेडिट कर दी गई।

मंत्री जी ने 15 अप्रैल 2025 को आवेदन किया था और सिर्फ 14 दिनों के भीतर ही इसे सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई थी। जबकि, नियमों के मुताबिक मंजूरी से पहले साइट का संयुक्त रूप से निरीक्षण होना अनिवार्य है।

सवालों के घेरे में क्यों है यह सब्सिडी?
जिस बोर्ड (NHB) ने इस सब्सिडी को पास किया है, भगीरथ चौधरी उसके पदेन उपाध्यक्ष हैं। हालांकि अंतिम मंजूरी देने वाली कमेटी में अध्यक्ष या उपाध्यक्ष शामिल नहीं होते हैं। अप्रूवल से एक महीने पहले प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को दी गई संपत्ति की घोषणा में मंत्री ने अपनी पीह वाली कृषि भूमि का जिक्र तो किया है, लेकिन इस पेंडिंग NHB प्रोजेक्ट की कोई जानकारी नहीं दी। हालांकि, उनके एक सहयोगी का कहना है कि इसका "खुलासा किया जाएगा।" भगीरथ चौधरी ने इससे पहले 2018 में भी इस योजना के तहत आवेदन किया था, लेकिन तब हार्ड कॉपी जमा करने में देरी के चलते उनका आवेदन रिजेक्ट हो गया था।

क्या है मंत्रालय की यह योजना?
इस योजना का मुख्य उद्देश्य व्यावसायिक खेती (मुनाफे के लिए) को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देना है। इसके तहत शिमला मिर्च, खीरा, टमाटर जैसी 3 सब्जियों और गुलाब व आर्किड सहित 8 प्रकार के फूलों की खेती के लिए प्रोजेक्ट कॉस्ट की अधिकतम 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। एक परिवार के लिए सब्सिडी की अधिकतम सीमा 1 करोड़ रुपये तय है। प्रोजेक्ट पूरा होने के तीन महीने के भीतर सब्सिडी की रकम लोन अकाउंट में जमा कर दी जाती है। हितों के टकराव को लेकर जब मीडिया संस्थान ने केंद्रीय मंत्री भगीरथ चौधरी से संपर्क किया और सवालों की सूची भेजी, तो उनके कार्यालय ने ईमेल मिलने की पुष्टि की, लेकिन मंत्री की तरफ से कोई जवाब या टिप्पणी नहीं आई।

 

More From Author

अनानास की खेती ने बदली किसान अरुण साहू की किस्मत, मेड़ से शुरू हुआ सफर बना लाखों की कमाई का जरिया

पुनर्वासित युवाओं से मिले उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप, जाना हाल-चाल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13814/1

RO No. 13843/161

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.