Saudi Real Estate बना भारतीय निवेशकों की पहली पसंद, शानदार रिटर्न और नए अवसरों ने बढ़ाया आकर्षण

दुबई 

खाड़ी देशों के रियल एस्टेट बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सऊदी अरब ने पहली बार विदेशी नागरिकों और विदेशी कंपनियों के लिए अपने प्रॉपर्टी बाजार के दरवाजे खोल दिए हैं। नए विदेशी रियल एस्टेट स्वामित्व कानून के लागू होने के साथ ही सरकार ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए ‘सऊदी प्रॉपर्टीज’ पोर्टल भी शुरू कर दिया है। इस फैसले को सऊदी अरब के आर्थिक परिवर्तन कार्यक्रम ‘विजन 2030’ का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य विदेशी निवेश बढ़ाना, वैश्विक पूंजी आकर्षित करना और देश को अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं निवेश का प्रमुख केंद्र बनाना है।

यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के असर से दुबई का रियल एस्टेट बाजार दबाव में दिखाई दे रहा है। ऐसे माहौल में सऊदी अरब का नया कानून भारतीय प्रवासियों, एनआरआई निवेशकों और वैश्विक खरीदारों के लिए एक नए विकल्प के रूप में उभरकर सामने आया है।
दशकों बाद विदेशियों को मिला प्रॉपर्टी का मालिक बनने का अधिकार

सऊदी अरब (Saudi Arabia Property News) में लंबे समय से लाखों विदेशी नागरिक काम करते रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल किराए के मकानों में रहने की अनुमति थी। अब पहली बार विदेशी नागरिकों को कानूनी रूप से आवासीय और निर्धारित श्रेणी की व्यावसायिक संपत्तियों का स्वामित्व प्राप्त करने का अवसर दिया गया है।

भारतीय समुदाय सऊदी अरब में सबसे बड़े प्रवासी समुदायों में शामिल है। ऐसे में इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ भारतीय पेशेवरों, कारोबारियों और लंबे समय से वहां रह रहे परिवारों को मिलने की संभावना जताई जा रही है। अब वे केवल किराएदार नहीं बल्कि निर्धारित नियमों के तहत संपत्ति के मालिक भी बन सकेंगे।
दुबई बाजार की सुस्ती के बीच सऊदी बना नया विकल्प

पिछले कुछ समय से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर दुबई के रियल एस्टेट बाजार पर भी देखने को मिला है। विशेषज्ञों के अनुसार निवेशकों की सतर्कता बढ़ने से वहां संपत्तियों की खरीद-बिक्री की गति कुछ धीमी हुई है। इसी बीच सऊदी अरब ने विदेशी निवेशकों के लिए अपने बाजार को खोलकर क्षेत्रीय निवेश के समीकरण बदल दिए हैं।

हालांकि एक्सपर्ट व्यू से दुबई की तुलना में सऊदी का रियल एस्टेट बाजार अभी शुरुआती चरण में है। यहां भविष्य की संभावनाएं मजबूत हैं, लेकिन रीसेल मार्केट और लिक्विडिटी को परिपक्व होने में अभी समय लग सकता है। इसके बावजूद विजन 2030 के तहत हो रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट इस बाजार को तेजी से आगे बढ़ा सकते हैं।
‘सऊदी प्रॉपर्टीज’ पोर्टल से पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन

रियल एस्टेट जनरल अथॉरिटी (REGA) ने विदेशी रियल एस्टेट स्वामित्व कानून के साथ ‘सऊदी प्रॉपर्टीज’ नाम का डिजिटल पोर्टल लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और पूरी तरह ऑनलाइन बनाना है। विदेशी खरीदारों को अब विभिन्न सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। आवेदन, सत्यापन और पात्रता की अधिकांश प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से पूरी की जाएगी, जिससे निवेश प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएगी।
किन लोगों को मिलेगा संपत्ति खरीदने का अधिकार

नई नीति के तहत सऊदी अरब में वैध रूप से रह रहे विदेशी निवासी अपने रेजिडेंसी नंबर यानी इकामा के आधार पर सीधे आवेदन कर सकेंगे। पोर्टल पर उनकी पात्रता का डिजिटल सत्यापन किया जाएगा। सऊदी अरब से बाहर रहने वाले विदेशी नागरिक भी निवेश कर सकेंगे, लेकिन उन्हें अपने देश में स्थित सऊदी दूतावास या वाणिज्य दूतावास से डिजिटल पहचान प्राप्त करनी होगी। इसके बाद वे ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। विदेशी कंपनियों को भी पहली बार सऊदी अरब में सीधे प्रॉपर्टी खरीदने की अनुमति दी गई है। इसके लिए उन्हें निवेश मंत्रालय (MISA) के ‘इन्वेस्ट सऊदी’ प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कर राष्ट्रीय एकीकृत नंबर प्राप्त करना होगा।
भारतीय निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह फैसला

भारतीय निवेशकों के लिए यह निर्णय कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सऊदी अरब में पहले से बड़ी भारतीय आबादी मौजूद है, जिससे किराए की मांग और आवासीय जरूरतें लगातार बनी रहती हैं। इसके अलावा देश में तेजी से विकसित हो रहे स्मार्ट शहर, औद्योगिक कॉरिडोर और पर्यटन परियोजनाएं भविष्य में प्रॉपर्टी की मांग को और बढ़ा सकती हैं।

    रियल एस्टेट एक्स्पर्ट्स की माने तो लंबे समय के निवेश की सोच रखने वाले भारतीय निवेशकों के लिए यह बाजार बेहतर अवसर प्रदान कर सकता है। हालांकि निवेश से पहले स्थानीय कानून, कर व्यवस्था, स्वामित्व नियम और रीसेल शर्तों का विस्तृत अध्ययन करना आवश्यक होगा।

    सऊदी अरब ने जिन क्षेत्रों को विदेशी निवेश के लिए खोला है, उनमें दुनिया की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें रेड सी प्रोजेक्ट, दिरियाह, अलउला और भविष्य का स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट नियोम (NEOM) प्रमुख हैं। सरकार इन क्षेत्रों को पर्यटन, व्यापार, तकनीक और वैश्विक निवेश का केंद्र बनाने की दिशा में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है।

    इन परियोजनाओं के विकसित होने के साथ आवासीय, व्यावसायिक और होटल सेक्टर में भी बड़े निवेश की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

मक्का और मदीना के लिए अलग नियम

हालांकि नई नीति के साथ कुछ महत्वपूर्ण प्रतिबंध भी लागू किए गए हैं। धार्मिक महत्व को देखते हुए मक्का और मदीना में संपत्ति स्वामित्व के नियम अलग रखे गए हैं। इन दोनों पवित्र शहरों में संपत्ति खरीदने का अधिकार सीमित श्रेणी के पात्र व्यक्तियों और सऊदी कंपनियों तक ही रखा गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले क्षेत्रों की विशेष पहचान को सुरक्षित बनाए रखना है।

सऊदी अरब के इस फैसले के प्रमुख फायदे

    विदेशी नागरिकों को पहली बार कानूनी रूप से प्रॉपर्टी खरीदने का अवसर।
    भारतीय प्रवासियों और एनआरआई निवेशकों के लिए नया निवेश विकल्प।
    पूरी आवेदन प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी बनाई गई।
    विजन 2030 के तहत विकसित हो रहे मेगा प्रोजेक्ट्स में निवेश की संभावना।
    विदेशी कंपनियों को भी रियल एस्टेट बाजार में प्रवेश की अनुमति।
    वैश्विक निवेश आकर्षित करने और अर्थव्यवस्था को विविध बनाने की दिशा में बड़ा कदम।

किन बातों का रखना होगा ध्यान

    निवेश से पहले स्थानीय संपत्ति कानूनों का अध्ययन आवश्यक होगा।
    शुरुआती वर्षों में बाजार की लिक्विडिटी दुबई जितनी मजबूत नहीं हो सकती।
    मक्का और मदीना में स्वामित्व संबंधी विशेष नियम लागू रहेंगे।
    निवेश करने से पहले प्रोजेक्ट, डेवलपर और कानूनी दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण होगा।
    लंबी अवधि के निवेश की रणनीति अपनाने वाले निवेशकों के लिए यह बाजार अधिक उपयुक्त माना जा रहा है।

विजन 2030 के साथ बदल रहा है सऊदी अरब

सऊदी अरब केवल तेल आधारित अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहना चाहता। विजन 2030 के तहत देश पर्यटन, तकनीक, रियल एस्टेट, मनोरंजन, वित्तीय सेवाओं और वैश्विक निवेश के नए केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। विदेशी नागरिकों के लिए रियल एस्टेट बाजार खोलना इसी व्यापक आर्थिक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में यदि यह नीति सफल रहती है तो खाड़ी क्षेत्र में निवेश का संतुलन बदल सकता है और भारतीय निवेशकों के लिए भी नए अवसर लगातार बढ़ सकते हैं।

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